Friday, July 30, 2021
Homeराजनीति'झूठ फैलाना कुछ लोगों का पेशा': PM मोदी ने कहा- विरोध का आधार फैसला...

‘झूठ फैलाना कुछ लोगों का पेशा’: PM मोदी ने कहा- विरोध का आधार फैसला नहीं, बल्कि आशंकाओं को बनाया जा रहा है

"पिछले कुछ समय से एक अलग ही ट्रेंड देश में देखने को मिल रहा है। पहले होता ये था कि सरकार का कोई फैसला अगर किसी को पसंद नहीं आता था तो उसका विरोध होता था। लेकिन बीते कुछ समय से हम देख रहे हैं कि अब विरोध का आधार फैसला नहीं, बल्कि आशंकाओं को बनाया जा रहा है।"

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार (नवंबर 30, 2020) को अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में 6 लेन सड़क मार्ग का उद्घाटन किया। उनके दौरे से पहले न सिर्फ वहाँ पर घाटों की साफ़-सफाई की गई, बल्कि सुरक्षा का भी विशेष ख्याल रखा गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देव-दीपावली का पहला दीपक जलाएँगे। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग 19 का भी उद्घाटन किया, जो 2 प्राचीन राजमार्गों को जोड़ता है। उन्होंने कृषि कानूनों और किसानों के प्रदर्शन पर भी बात की।

ये सड़क वाराणसी को प्रयागराज से जोड़ती है। इस सड़क के निर्माण में 2447 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। इस राजमार्ग के चालू होने के बाद दोनों शहरों की दूरी 3 घंटे कम हो जाएगी। मात्र 1 घंटा में लोग वाराणसी से प्रयागराज की यात्रा कर सकेंगे। घाटों का सौंदर्यीकरण भी किया गया है। देव-दीपावली के दौरान काशी के 84 घाटों पर 15 लाख दीपक जगमगाएँगे। पीएम मोदी गंगा नदी में तैनात क्रूज से जलमार्ग से विश्वनाथ धाम पहुँचे

इस दौरान जनता को सम्बोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में काशी के सौंदयीकरण के साथ-साथ यहाँ की कनेक्टिविटी पर जो काम हुआ है, उसका लाभ अब आप सभी देख रहे हैं। उन्होंने जनता से कहा कि नए हाईवे हो, पुल-फ्लाईओवर हो, ट्रैफिक जाम कम करने के लिए रास्तों को चौड़ा करना हो, जितना काम बनारस और आसपास में अभी हो रहा है, उतना आजादी के बाद कभी नहीं हुआ।

पीएम ने समझाया कि जब किसी क्षेत्र में आधुनिक कनेक्टिविटी का विस्तार होता है, तो इसका बहुत लाभ हमारे किसानों को होता है। उन्होंने जानकारी दी कि बीते वर्षों में ये प्रयास हुआ है कि गाँवों में आधुनिक सड़कों के साथ भंडारण, कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्थाएँ खड़ी की जाएँ और इसके लिए 1 लाख करोड़ रुपए का फंड भी बनाया गया है। पीएम ने बताया कि वाराणसी में पेरिशेबल कार्गो सेंटर बनाया गया है।

इसके बनने के कारण अब यहाँ के किसानों को फल और सब्जियों को स्टोर करके रखने और उन्हें आसानी से बेचने की बहुत बड़ी सुविधा मिली है। पीएम मोदी ने कहा कि इस स्टोरेज कैपेसिटी के कारण पहली बार यहाँ के किसानों की उपज बड़ी मात्रा में निर्यात हो रही है। पीएम ने याद दिलाया कि कैसे चंदौली के किसानों की आय बढ़ाने के लिए 2 साल पहले काले चावल की एक वैरायटी का प्रयोग यहाँ किया गया था।

उन्होंने बताया कि पिछले साल खरीफ के सीज़न में करीब 400 किसानों को ये चावल उगाने के लिए दिया गया और साथ ही इन किसानों की एक समिति बनाई गई, इसके लिए मार्केट तलाश किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार के प्रयासों औऱ आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से किसानों को कितना लाभ हो रहा है, इसका एक बेहतरीन उदाहरण चंदौली का काला चावल (ब्लैक राइस) है। पीएम मोदी ने कहा कि ये चावल चंदौली के किसानों के घरों में समृद्धि लेकर आ रहा है।

दिल्ली में चल रहे ‘किसान आंदोलन’ के बीच वाराणसी पहुँचे पीएम मोदी ने कहा कि भारत के कृषि उत्पाद पूरी दुनिया में मशहूर हैं। उन्होंने पूछा कि क्या किसान की इस बड़े मार्केट और ज्यादा दाम तक पहुँच नहीं होनी चाहिए? साथ ही पूछा कि अगर कोई पुराने सिस्टम से ही लेनदेन ही ठीक समझता है तो, उस पर भी कहाँ रोक लगाई गई है? नए कृषि सुधारों से किसानों को नए विकल्प और नए कानूनी संरक्षण दिए गए हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि कैसे पहले मंडी के बाहर हुए लेनदेन ही गैरकानूनी थे, वहीं अब छोटा किसान भी, मंडी से बाहर हुए हर सौदे को लेकर कानूनी कार्यवाही कर सकता है। उन्होंने दावा किया कि किसान को अब नए विकल्प भी मिले हैं और धोखे से कानूनी संरक्षण भी मिला है। उन्होंने कहा कि सरकारें नीतियाँ बनाती हैं, कानून-कायदे बनाती हैं। नीतियों और कानूनों को समर्थन भी मिलता है तो कुछ सवाल भी स्वभाविक ही हैं। उन्होंने इसे लोकतंत्र का हिस्सा बताया और कहा कि भारत में ये जीवंत परंपरा रही है। पीएम ने कहा:

“पिछले कुछ समय से एक अलग ही ट्रेंड देश में देखने को मिल रहा है। पहले होता ये था कि सरकार का कोई फैसला अगर किसी को पसंद नहीं आता था तो उसका विरोध होता था। लेकिन बीते कुछ समय से हम देख रहे हैं कि अब विरोध का आधार फैसला नहीं, बल्कि आशंकाओं को बनाया जा रहा है। दुष्प्रचार किया जाता है कि फैसला तो ठीक है लेकिन इससे आगे चलकर ऐसा हो सकता है। जो अभी हुआ ही नहीं, जो कभी होगा ही नहीं, उसको लेकर समाज में भ्रम फैलाया जाता है। कृषि सुधारों के मामले में भी यही हो रहा है। ये वही लोग हैं जिन्होंने दशकों तक किसानों के साथ लगातार छल किया है। MSP तो घोषित होता था लेकिन MSP पर खरीद बहुत कम की जाती थी। सालों तक MSP को लेकर छल किया गया। किसानों के नाम पर बड़े-बड़े कर्जमाफी के पैकेज घोषित किए जाते थे। लेकिन छोटे और सीमांत किसानों तक ये पहुँचते ही नहीं थे। यानी, कर्ज़माफी को लेकर भी छल किया गया।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि किसानों के नाम पर बड़ी-बड़ी योजनाएँ घोषित होती थीं, लेकिन वे खुद मानते थे कि 1 रुपए में से सिर्फ 15 पैसे ही किसान तक पहुँचते थे। उन्होंने इसे योजनाओं के नाम पर छल करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब इतिहास छल का रहा हो, तब 2 बातें स्वभाविक हैं। पहली ये कि किसान अगर सरकारों की बातों से कई बार आशंकित रहता है तो उसके पीछे दशकों का इतिहास है। दूसरी ये कि जिन्होंने वादे तोड़े, छल किया, उनके लिए ये झूठ फैलाना मजबूरी बन चुका है कि जो पहले होता था, वही अब भी होने वाला है।

उन्होंने चुनौती दी कि जब इस सरकार का ट्रैक रिकॉर्ड देखेंगे तो सच अपने आप सामने आ जाएगा। पीएम ने याद दिलाया कि भाजपा ने यूरिया की कालाबाज़ारी रोकने का वादा किया था और किसान को पर्याप्त यूरिया देने की बात की थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने बीते 6 साल में यूरिया की कमी नहीं होने दी। यहाँ तक कि लॉकडाउन में जब हर गतिविधि बंद थी, तब भी दिक्कत नहीं आने दी गई।

उन्होंने कहा कि हमने वादा किया था कि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुकूल लागत का डेढ़ गुणा MSP देंगे और ये वादा सिर्फ कागज़ों पर ही पूरा नहीं किया गया, बल्कि किसानों के बैंक खाते तक पहुँचाया गया है। बकौल पीएम मोदी, सिर्फ दाल की ही बात करें तो 2014 से पहले के 5 सालों में लगभग साढ़े 6 सौ करोड़ रुपए की ही दाल किसान से खरीदी गईं, लेकिन इसके बाद के 5 सालों में हमने लगभग 49 हज़ार करोड़ रुपए की दालें खरीदी हैं। अर्थात, लगभग 75 गुणा बढ़ोतरी।

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि 2014 से पहले के 5 सालों में पहले की सरकार ने 2 लाख करोड़ रुपए का धान खरीदा था। लेकिन इसके बाद के 5 सालों में 5 लाख करोड़ रुपए धान के MSP के रूप में किसानों तक हमने पहुँचाए हैं। उन्होंने आँकड़े गिनाते हुए साबित किया कि लगभग ढाई गुणा ज्यादा पैसा किसान के पास पहुँचा है। 2014 से पहले के 5 सालों में गेहूँ की खरीद पर डेढ़ लाख करोड़ रुपए के आसपास ही किसानों को मिला। वहीं भाजपा की सरकार में 5 सालों में 3 लाख करोड़ रुपए गेहूँ किसानों को मिल चुका है, लगभग 2 गुणा।

इसके बाद पीएम मोदी ने सवाल दागा कि अगर मंडियों और MSP को ही हटाना था, तो इनको ताकत देने, इन पर इतना निवेश ही क्यों करते? साथ ही बताया कि मोदी सरकार तो मंडियों को आधुनिक बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। उन्होंने लोगों को ये याद रखने को कहा कि यही लोग हैं जो पीएम किसान सम्मान निधि को लेकर लोग सवाल उठाते थे। ये लोग अफवाह फैलाते थे कि चुनाव को देखते हुए ये पैसा दिया जा रहा है और चुनाव के बाद यही पैसा ब्याज सहित वापस देना पड़ेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एक राज्य में तो वहाँ की सरकार, अपने राजनीतिक स्वार्थ के चलते आज भी किसानों को इस योजना का लाभ नहीं लेने दे रही है। देश के 10 करोड़ से ज्यादा किसान परिवारों के बैंक खाते में सीधी मदद दी जा रही है। अब तक लगभग 1 लाख करोड़ रुपए किसानों तक पहुँच भी चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया कि उन्हें एहसास है कि दशकों का छलावा किसानों को आशंकित करता है। लेकिन अब छल से नहीं गंगाजल जैसी पवित्र नीयत के साथ काम किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि आशंकाओं के आधार पर भ्रम फैलाने वालों की सच्चाई लगातार देश के सामने आ रही है और जब एक विषय पर इनका झूठ किसान समझ जाते हैं, तो ये दूसरे विषय पर झूठ फैलाने लगते हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया की जिन किसान परिवारों की अभी भी कुछ चिंताएँ हैं, कुछ सवाल हैं, तो उनका जवाब भी सरकार निरंतर दे रही है। साथ ही विश्वास जताया कि आज जिन किसानों को कृषि सुधारों पर कुछ शंकाएँ हैं, वो भी भविष्य में इन कृषि सुधारों का लाभ उठाकर, अपनी आय बढ़ाएँगे।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

स्वतंत्र है भारतीय मीडिया, सूत्रों से बनी खबरें मानहानि नहीं: शिल्पा शेट्टी की याचिका पर बॉम्बे हाईकोर्ट

कोर्ट ने कहा कि उनका निर्देश मीडिया रिपोर्ट्स को ढकोसला नहीं बताता। भारतीय मीडिया स्वतंत्र है और सूत्रों पर बनी खबरें मानहानि नहीं है।

रामायण की नेगेटिव कैरेक्टर से ममता बनर्जी की तुलना कंगना रनौत ने क्यों की? जावेद-शबाना-खान को भी लिया लपेटे में

“...बंगाल मॉडल एक उदाहरण है… इसमें कोई शक नहीं कि देश में खेला होबे।” - जावेद अख्तर और ममता बनर्जी की इसी मीटिंग के बाद कंगना रनौत ने...

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
112,014FollowersFollow
394,000SubscribersSubscribe