Saturday, October 16, 2021
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‘भारत दुनिया का रेप कैपिटल’ – विदेशी मीडिया के प्रोपेगेंडा को एक बार फिर राहुल गाँधी ने बढ़ाया आगे

राहुल गाँधी आज विपक्ष में हैं इसलिए सत्ता पक्ष को टारगेट कर रहे हैं वो भी रेप के मुद्दे पर लेकिन शायद यह भूल रहे हैं कि 16 दिसंबर 2012 को जब देश को झकझोर देने वाला निर्भया रेप कांड हुआ था, तब इनकी ही सरकार थी।

कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी सशस्त्र सेना झंडा दिवस के मौके पर शनिवार (दिसंबर 7, 2019) केरल के कालपेट्‌टा में एक कार्यक्रम में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने देश में हो रहे रेप वारदातों को लेकर बयान दिया – अमूमन जैसा होता है, बयान विवादित ही दिया! उन्होंने कहा कि भारत को दुनिया की रेप कैपिटल के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कहा कि इंटरनैशनल न्यूजपेपर में भारत को रेप कैपिटल कहा जाता है।

उनका कहना है कि विदेशी राष्ट्र सवाल पूछ रहे हैं कि भारत अपनी बेटियों और बहनों की देखभाल क्यों नहीं कर पा रहा है। विदेशी मीडिया हमारे देश के बारे में क्या कहता है, इस पर हमारा बस नहीं है लेकिन विपक्ष के बड़े नेता होने की गरिमा के तहत आप क्या कहते हैं, यह तो राहुल गाँधी को पता होना ही चाहिए। लेकिन नहीं! इन्हें तो सिर्फ राजनीति करनी है। मुद्दा फिर चाहे रेप जैसा गंभीर ही क्यों न हो, ये करेंगे राजनीति ही! शायद राहुल गाँधी को यह भी नहीं पता कि विदेशों में भी रेप होते हैं और बहुत ही विभत्स होते हैं।

चूँकि राहुल गाँधी आज विपक्ष में हैं इसलिए सत्ता पक्ष को टारगेट कर रहे हैं वो भी रेप के मुद्दे पर लेकिन शायद यह भूल रहे हैं कि 16 दिसंबर 2012 को जब देश को झकझोर देने वाला निर्भया रेप कांड हुआ था, तब इनकी ही सरकार थी। दरअसल सरकार के बाहर रहकर सरकार के ऊपर दोषारोपण करना बेहद आसान होता है। और यही काम राहुल गाँधी ने अब तक किया, कर रहे हैं।

राहुल गाँधी ने देश की कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर सवाल उठाए। राहुल गाँधी ने कहा कि देश भर में महिलाओं के खिलाफ अपराध और हिंसा के मामले बढ़े हैं। महिलाओं के खिलाफ अत्याचार बढ़ता जा रहा है। हर दिन देश में महिलाओं से रेप, छेड़छाड़ और उत्पीड़न की खबरें सामने आती हैं, यह कानून के नदारद होने की स्थिति है।

इसके अलावा उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा बढ़ रही है। उनके खिलाफ नफरत फैलाई जा रही है। दलितों को पीटा जा रहा है, उनकी बाहों को काटा जा रहा है। आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे हैं, उनकी जमीनें छीनी जा रही है। हम रोज पढ़ते हैं कि यहाँ दुष्कर्म हुआ, छेड़छाड़ हुई। देश को चलाने वालों को लगता है कि सारी ताकतें उन्हीं के हाथ में हैं। हमारी संस्थागत ढांचा नाटकीय रूप से टूट रहे हैं। इसका बड़ा कारण है, लोग कानून अपने हाथ में ले रहे हैं। ऐसा इसलिए है, क्योंकि इस देश को चलाने वाला व्यक्ति हिंसा और आँखें बंदकर सत्ता में विश्वास करता है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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