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बेटे की हार पर रार: पायलट लें मेरे बेटे की हार की ज़िम्मेदारी, CM गहलोत और डेप्युटी CM आमने-सामने

"पायलट साहब ने यह भी कहा था कि वैभव बड़े अंतर से जीतेगा, क्योंकि उस क्षेत्र में हमारे 6 विधायक हैं, और हमारा चुनाव अभियान भी बढ़िया था। मुझे लगता है कि..."

राजस्थान में कॉन्ग्रेस पार्टी की कलह अब शीर्ष नेताओं के बीच पहुँच गई है। राज्य में पार्टी के दो शीर्ष नेताओं के बीच सब कुछ ठीकठाक नहीं चल रहा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को आड़े हाथों लिया है। गहलोत ने कहा कि पायलट को भी उनके बेटे वैभव गहलोत की हार की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए। बता दें कि जोधपुर क्षेत्र से 5 बार सांसद व इसी क्षेत्र में आने वाले विधानसभा क्षेत्र से 5 बार विधायक बनने वाले सीएम गहलोत अपने बेटे वैभव गहलोत को ही यहाँ से जीत नहीं दिला पाए। उनके ख़ुद के ही विधानसभा क्षेत्र में उनके बेटे लीड नहीं ले सके।

सरदारपुरा में वैभव गहलोत लगभग 18,000 मतों से पीछे छूट गए। मुख्यमंत्री के एक ही क्षेत्र में सीमित रह जाने का खामियाजा पार्टी को उठाना पड़ा और पूरे राजस्थान में कॉन्ग्रेस का सूपड़ा साफ़ हो गया। वहीँ राजस्थान प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने वरिष्ठ नेता गहलोत के इस बयान पर आश्चर्य जताया है। एबीपी न्यूज़ से इंटरव्यू के दौरान गहलोत ने कहा:

“पायलट साहब ने यह भी कहा था कि वैभव बड़े अंतर से जीतेगा, क्योंकि उस क्षेत्र में हमारे 6 विधायक हैं, और हमारा चुनाव अभियान भी बढ़िया था। मुझे लगता है कि उन्हें वैभव की हार की जिम्मेदारी तो लेनी चाहिए। जोधपुर में पार्टी की हार का पूरा पोस्टमॉर्टम होगा कि हम वह सीट क्यों नहीं जीत सके।”

अशोक गहलोत ने आगे कहा कि यदि जीतने पर श्रेय लेने के लिए सभी लोग आगे आ जाते हैं तो हारने पर भी ज़िम्मेदारी सामूहिक होनी चाहिए। पायलट समर्थक लगातार कहते रहे हैं कि राज्य में सीएम के काम करने का तरीका कॉन्ग्रेस की हार का कारण बना है। गहलोत ने कहा कि ये चुनाव किसी एक व्यक्ति नहीं, बल्कि सामूहिक नेतृत्व में संपन्न हुआ है। उधर राजस्थान में मंत्रियों के बीच से भी विरोध के स्वर उठे हैं। राजस्थान के कृषि मंत्री लालचंद कटारिया ने इस्तीफा दे दिया था। राज्य के दो अन्य कैबिनेट मंत्रियों, सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना व खाद्य मंत्री रमेश मीणा ने कॉन्ग्रेस की हार की समीक्षा करने की सलाह दी है।

इससे पहले कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने भी अशोक गहलोत समेत अन्य नेताओं द्वारा अपने बेटों को पार्टी से ऊपर तरजीह देने को हार का कारण बताया था। कई दिनों तक दिल्ली कैम्प करने के बाद भी राहुल गहलोत से मुलाक़ात करने से साफ़ इनकार करते रहे। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान गहलोत ने प्रदेश में कुल 130 रैलियाँ की, जिनमें से 93 रैलियाँ उन्होंने अकेले अपने बेटे वैभव के लिए कीं।

जोधपुर में भाजपा उम्मीदवार गजेन्द्र सिंह शेखावत को 788888 मत मिले, वहीं वैभव गहलोत 514448 मत पाकर क़रीब पौने 3 लाख मतों से पीछे छूट गए। शेखावत को 58.6% मत मिले जबकि वैभव को कुल मतों का 38.21% हिस्सा ही मिल पाया। राजस्थान सरकार में मंत्री मंत्री उदय लाल ने कहा था कि उन्होंने पहले ही सीएम गहलोत को अपने बेटे को जोधपुर से न लड़ाने की सलाह दी थी। उदय लाल ने कहा था कि अगर वैभव जोधपुर की जगह जालौर से लड़ते तो स्थिति अलग हो सकती थी।


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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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