रामचंद्र गुहा रवीश से निकालना चाह रहे दुश्मनी, कहा पत्रकारिता छोड़ कर मोदी से लड़ जाओ

प्रख्यात ‘उपन्यासकार’ (जिन्हें कभी-कभी इतिहासकार भी कहते हैं कुछ लोग) गुहा ने कहा कि राहुल गाँधी से उन्हें कुछ खास आशा नहीं इसलिए रवीश कुमार को मोदी से लड़ना चाहिए क्योंकि वो हिन्दी बड़ी अच्छी बोल लेते हैं!

हाल ही में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता के आगे राहुल गाँधी के औचित्य को खारिज कर सुर्खियों में आने वाले ‘उपन्यासकार’ (जिन्हें कभी-कभी इतिहासकार भी कहते हैं कुछ लोग) रामचंद्र गुहा ने एनडीटीवी चैनल पर पत्रकार निधि राजदान से बातचीत के दौरान अपने बयान पर सफाई दी। गुहा ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि उनका मानना है कि अगर नरेंद्र मोदी को चुनावों में हराना है तो कॉन्ग्रेस को किसी मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है।

इस बातचीत को आगे बढ़ाते हुए गुहा ने एनडीटीवी के पत्रकार रवीश कुमार के राजनीति में आने की सलाह दी। उनकी खूबियों को गिनवाते हुए उन्होंने कहा कि वो ऐसा इसलिए कह रहे हैं- क्योंकि रवीश कुमार स्वनिर्मित हैं, अपनी बातों को स्पष्ट रूप से रखना जानते हैं, वो बहादुर हैं और सबसे बड़ा बात ये कि वो बहुत अच्छी हिंदी बोलते हैं।

इसके बाद गुहा ने कॉन्ग्रेस की हकीकत की पोल खोलते हुए एक और लाइन कही, जिसमें उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से संदेश देने कि कोशिश की कि अगर कॉन्ग्रेस में शीर्ष नेताओं को कोई अन्य राजनेता उनकी कुर्सी के लिए खतरा लगता हैं, तो वे उसे दबा देते हैं।

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गुहा ने निधि के सामने रवीश की तारीफों के पुलिंदे बाँधने के बाद कहा कि कॉन्ग्रेस में भी बहुत से अच्छे नेता हैं। जिन्हें वो बहुत अच्छे से जानते हैं। लेकिन अगर वो उनका नाम सार्वजनिक तौर पर लेंगे तो पार्टी में उन्हें दबा दिया जाएगा। बता दें कि इस दौरान गुहा ने आगे बात करते हुए कॉन्ग्रेस से अच्छे उम्मीदवारों में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री और पंजाब मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह का नाम लिया।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आलोचक माने जाने वाले इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने पिछले दिनों बयान दिया था कि लोकसभा चुनाव में वायनाड से राहुल गाँधी को चुनकर केरल के लोगों ने विनाशकारी काम किया। उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने राहुल गाँधी का कोई भविष्य नहीं है।

केरल साहित्य महोत्सव के दूसरे दिन शुक्रवार (17 जनवरी, 2019) को ‘राष्ट्र भक्ति बनाम अंधराष्ट्रीयता’ विषय पर बोलते हुए रामचंद्र गुहा के सुर बदले-बदले थे। उन्होंने लोगों की अपेक्षा से उलट जाकर कहा कि ‘खानदान की पाँचवी पीढ़ी’ के राहुल गाँधी के पास भारतीय राजनीति में ‘कठोर परिश्रमी और खुद मुकाम बनाने वाले’ नरेंद्र मोदी के सामने कोई मौका नहीं है।

हालाँकि इस दौरान उन्होंने ये भी स्पष्ट किया था कि वे निजी तौर पर राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ नहीं हैं। क्योंकि राहुल सौम्य और सुसभ्य व्यक्ति हैं। लेकिन अगर फिर भी युवा भारत एक खानदान की पाँचवी पीढ़ी को नहीं चाहता। उन्होंने इस दौरान जनता को संबोधित करते हुए कहा था कि अगर मलयाली लोग साल 2024 में भी दोबारा राहुल गाँधी को चुनने की गलती करेंगे तो वे नरेंद्र मोदी को फायदा पहुँचाएँगे।

इस दौरान गुहा ने अपनी बात को स्पष्ट रूप से समझाते हुए कहा था कि नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वो राहुल गाँधी नहीं हैं। नरेंद्र मोदी और राहुल गाँधी के बीच अंतर समझाते हुए इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने कहा था, “नरेंद्र मोदी ने अपनी शख्सियत खुद बनाई है। उन्होंने खुद यह मुकाम हासिल किया है। वे सेल्फमेड हैं। उन्होंने 15 वर्षों तक एक राज्य को चलाया है। उनके पास प्रशासनिक अनुभव है। वे जबर्दस्त रूप से परिश्रमी हैं और कभी यूरोप में छुट्टियाँ मनाने नहीं जाते। विश्वास करें, मैं ये बातें पूरी गंभीरता के साथ कह रहा हूँ।”

कॉन्ग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होने पार्टी को दयनीय पारिवारिक कंपनी करार दिया था। साथ ही बोला था, “भारत लोकतांत्रिक बन रहा है और यहाँ सामंतवाद कम हो रहा है। लेकिन गाँधी परिवार इसे अभी समझ नहीं रहा। (सोनिया गाँधी) दिल्‍ली में हो, आपका साम्राज्‍य लगातार सिकुड़ रहा है लेकिन आपके चमचे आपको अभी भी बता रहे हैं आप अभी भी बादशाह हो।”

गौरतलब है कि रामचंद्र गुहा द्वारा केरल साहित्य महोत्सव में कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी की खिंचाई के बाद खुद को पत्रकार कहने वाली कॉन्ग्रेस की फुलटाइम गालीबाज स्वाति चतुर्वेदी ने राहुल गाँधी का समर्थन किया। गुहा पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह विश्वास करना मुश्किल है कि मीडिया सहित किसी को भी मोदी के बारे में कोई भ्रम था। मुझे अभी तक समझ में नहीं आ रहा है कि शिक्षाविद, नीति निर्माता और मीडिया किस तरह से मोदी मिथक में पड़ गए?”

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