गुर्जर आरक्षण: गहलोत-पायलट के गले की फाँस, हो सकता है उग्र आंदोलन

दरअसल, पायलट राजस्थान के गुर्जर समाज से ही आते हैं। यही वजह है कि चुनाव में इस जाति की वोट भी कॉन्ग्रेस के पक्ष में पड़ी थी।

राजस्थान विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस पार्टी ने गुर्जरों से आरक्षण का वादा किया था। ऐसे में आरक्षण के लोभ से गुर्जर समाज के लोगों ने कॉन्ग्रेस के पक्ष में मतदान किया। यही वजह है कि प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार बनने के बाद गुर्जर आरक्षण की माँग को लेकर उग्र हो गए हैं।

सत्ता में आने के लिए कॉन्ग्रेस ने आरक्षण का कार्ड खेला था, जो अब कॉन्ग्रेस सरकार के लिए ही मुसीबत बन गई है। गुर्जरों ने राजस्थान सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि 8 फरवरी तक सरकार ने गुर्जर आरक्षण की घोषणा नहीं की तो गुर्जर समुदाय के लोग रोड और रेल जाम करेंगे।

जब कॉन्ग्रेस कार्यालय में आरक्षण के मामले पर मुख्यमंत्री गहलोत से पत्रकारों ने सवाल पूछा तो गहलोत ने माइक सचिन पायलट की तरफ खिसका दिया। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक गहलोत के इस व्यवहार पर सभी पत्रकार ठहाके लगाकर हँसने लगे।

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इसके बाद राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष पायलट ने मुख्यमंत्री से कहा कि सवाल का जवाब मैं क्यों दूँ, आप क्यों नहीं ? इसके बाद पायलट ने पत्रकारों से पूछा कि आप लोग यह सवाल सरकार से पूछ रहे हैं या कॉन्ग्रेस पार्टी से पूछ रहे हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेन्स में सचिन पायलट के गुस्सा को भांपते हुए मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि अरे नहीं आप ही बोलो आप भी सरकार के हिस्सा हो। इसके बाद सचिन पायलट ने पत्रकारों से बात की। पायलट ने पत्रकारों से कहा कि हमारी सरकार गुर्जर आरक्षण को लेकर गंभीर है, लेकिन केंद्र सरकार की सहमती के बग़ैर यह संभव नहीं है। इस तरह प्रेस कॉन्फ्रेन्स से साफ़ हो गया कि आरक्षण के मामले पर कॉन्ग्रेस पार्टी घिर गई है।

दरअसल, पायलट राजस्थान के गुर्जर समाज से ही आते हैं। यही वजह है कि चुनाव में इस जाति की वोट भी कॉन्ग्रेस के पक्ष में पड़ी थी। लेकिन आरक्षण के मामले पर सरकार को घिरते देख गहलोत ने अचानक से गेंद पायलट के पाले में डाल दी। पायलट इस बात को बख़ूबी समझ रहे थे कि यह कितना अहम मुद्दा है जो आगे चलकर कॉन्ग्रेस सरकार और पायलट के राजनीतिक करियर के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है।

जानकारी के लिए बता दें कि आरक्षण के मामले में गुर्जर समाज के लोगों ने राजस्थान सरकार के ख़िलाफ़ 27 जनवरी से खंडार नाम की जगह पर पंचायत की, इसके बाद यह पंचायत राज्य भर में इस तरह की पंचायतें किए जाने की घोषणा की गई।

1 फरवरी को नैनवा और 5 फरवरी को अजमेर में भी पंचायत हुई। इसके बाद 13 फरवरी को दौसा में पंचायत होगी। गुर्जर समुदाय के लोगों ने राज्य सरकार के लोगों को अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि राज्य के अलग-अलग ज़िले में होने वाले इस पंचायत के बाद इस जाति के लोग रोड और रेल बंद करेंगे।

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