शाह का गणित और फ्लोर मैनेजमेंट: राज्यसभा में ऐसे पास होगा नागरिकता संसोधन विधेयक!

शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही अमित शाह की क़रीबी टीम सहित फ्लोर मैनेजर अपने काम में लगे हुए हैं। इसी तरह की क़वायद, अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के प्रस्ताव पर हुई थी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लोकसभा में नागरिकता संशोधन विधेयक-2019 पेश कर दिया है। लोकसभा में तो सरकार के पास नंबर है लेकिन दिक्कत राज्यसभा में हो सकती है। वहाँ भी विधेयक पास हो जाए, इसके लिए तैयारी करनी होती है। फ्लोर मैनेजमेंट उसी को कहते हैं। आइए कुछ आँकड़ो से समझते हैं इस विधेयक के पास होने के गुणा-गणित को।

कॉन्ग्रेस और तृणमूल कॉन्ग्रेस द्वारा समर्थित UPA के नेतृत्व वाले विपक्ष के पास सदन की कुल संख्या 245 में से 100 से कम लग रही है। कॉन्ग्रेस के पास 46 सांसद हैं, लेकिन मोतीलाल वोहरा स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों के चलते अनुपस्थित हैं।

उच्च सदन में ममता बनर्जी की तृणमूल में 13 सदस्य हैं। समाजवादी पार्टी के 9 हैं, डीएमके के पास 5, RJD और बसपा दोनों के पास 4-4 सांसद हैं, और अन्य छोटे दलों को मिलाकर यह संख्या 100 तक पहुँचती है।

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जबकि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले NDA और उनकी संख्या पर नज़र डालें तो इनके अपने 83 सांसद हैं, जिसमें नव-निर्वाचित सांसद अरुण सिंह और केसी राममूर्ति भी शामिल हैं।

शिरोमणि अकाली के पास 3 सांसद हैं और दूसरी सहयोगी पार्टी AIADMK के पास 11 सदस्यों ने वोट देकर अपना समर्थन दिया। जदयू के नीतीश कुमार ने भी बिल का समर्थन करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा नॉमिनेटिड सांसदों को सम्मिलित करके अन्य 12 सदस्यों, स्वतंत्र  एवं लघु पार्टियों और नॉर्थ ईस्ट के सहयोगी दलों को ही केवल गणना में जोड़ा गया है।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में भाजपा और शिवसेना के बीच राजनैतिक घमासान हुआ, जिसकी वजह से उनका गठबंधन टूट गया। इसके बावजूद उद्धव ठाकरे की पार्टी ने इस विधेयक का समर्थन किया। जबकि निष्पक्ष पार्टियों का अब भी केंद्र सरकार के समर्थन में आना बाकी है।

इसके अलावा, नवीन पटनायक की बीजू जनता दल ने भी 7 मतों से अपना समर्थन दिया। हालाँकि पार्टी ने इसमें कुछ काट-छाँट की माँग करते हुए संशोधनों को प्रस्ताव रखा।

TRS के 6 सासंदों ने और YS जगन की YSRCP ने 2 वोटों से अपना समर्थन दिया। वहीं, भाजपा की पूर्व सहयोगी पार्टी तेलगु देशम पार्टी भी 2 वोटों से अपना समर्थन देगी।

बता दें कि अनिल बलूनी को मिलाकर भाजपा के कम से कम 2 सांसद मेडिकल लीव पर हैं और दो स्वतंत्र दावेदारों का समर्थन भी नदारद है। और इस तरह NDA के पास सांसदो की संख्या 120 यानी आधे से ऊपर 132 तक पहुँचती नज़र आ रही है।

शीतकालीन सत्र की शुरुआत से ही अमित शाह की क़रीबी टीम सहित फ्लोर मैनेजर अपने काम में लगे हुए हैं। इसी तरह की क़वायद, अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने के प्रस्ताव पर हुई थी।

रेल मंत्री पीयूष गोयल अपने मंत्रिमंडल के सहयोगी धर्मेंद्र प्रधान के रूप में AIADMK को अपने पक्ष में लाने में रहे, उन्होंने बीजेडी को भी लूप में रखा।

पार्टी के महासचिव भूपेंद्र यादव JDU से बात कर रहे हैं। संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी TRS, YSR और TDP समेत छोटे दलों से बात कर रहे हैं।

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