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सिटीजन बिल पर मोदी कैबिनेट की मुहर: पाक, बांग्लादेश के प्रताड़ित हिंदुओं को नागरिकता का प्रावधान

इस बिल के प्रावधानों के मुताबिक पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के मज़हबी रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता के लिए योग्य घोषित किया गया है।

केंद्र की मोदी सरकार ने नागरिकता विधेयक में संशोधन का मसौदा कैबिनेट में पास कर दिया है। इस बिल के अगले सप्ताह संसद में पेश किए जाने की उम्मीद है। इस बिल के प्रावधानों के मुताबिक भारत के तीन सबसे कट्टर रूप से मज़हबी पड़ोसी देशों पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और बांग्लादेश के मज़हबी रूप से अल्पसंख्यक समुदाय के प्रताड़ित लोगों को भारत की नागरिकता के लिए योग्य घोषित किया गया है। इसमें केवल हिन्दू धर्म ही नहीं, जैन, बौद्ध, सिख धर्म और ईसाई व अन्य पंथिक समुदाय के भी लोग शामिल हैं। यह बिल पिछली बार भी लोकसभा में लाया गया था, लेकिन इसके राज्यसभा में पास होने से पहले ही आम चुनावों के लिए निचले सदन को भंग कर दिया गया था।

सोशल मीडिया पर बहुत से लोगों ने इसका स्वागत भी किया है, जिसमें स्वराज्य पत्रिका के सीईओ प्रसन्ना विश्वनाथन भी शामिल हैं। उन्होंने इस अधिनियम को शरणार्थी हिन्दुओं के लिए बड़ी राहत बताया है।

वहीं लिबरल गिरोह ने भी अपनी रुदाली शुरू कर दी है। कॉन्ग्रेस नेता और तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर ने इसे लोकतंत्र के ही खिलाफ बता दिया है।

वहीं उनकी पार्टी की एक अन्य नेत्री शमा मोहम्मद ने इसे भारतीय संविधान के खिलाफ बताया है।

स्वराज्य के सम्पादक राघवन जगन्नाथन ने इस बिल के विरोधियों पर करारा प्रहार किया है। स्वराज्य के अपने कॉलम में उन्होंने इसे इन देशों के प्रताड़ित हिन्दुओं के खिलाफ साज़िश करार दिया है। उनके मुताबिक यह पहले से ही प्रताड़ित और अपमानित हिन्दू शरणार्थियों को दोबारा परेशान करने की कोशिश है।

उनके लेख को ट्विटर पर साझा करते हुए प्रसन्ना विश्वनाथन ने भी भारतीय सेक्युलरिज़्म को हिन्दूफ़ोबिया से भरा हुआ करार दिया है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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