चुनाव आते ही राज्यों में योजनाओं की बाढ़ आ जाती है। तमिलनाडु सरकार ने भी 2026 शुरू होते ही कई योजनाओं का ऐलान कर जनता को ‘खुश’ करने की कोशिश की है। डीएमके सरकार ने नई पेंशन योजना से लेकर पोंगल पर 3000 रुपए नकद, छात्रों को लैपटॉप और परिवार की महिला मुखिया को 1000 रुपए नकद खाते में डालने की योजना का विस्तार करने का ऐलान किया है। मुफ्त की ये योजनाएँ सरकार की नाकामी को छिपाने का अच्छा तरीका है।
INDI गठबंधन ने बिहार चुनाव से ऐन पहले जब महिलाओं के खातों में 10 हजार रुपए डाले थे, तो उसका विरोध किया था, लेकिन डीएमके सरकार जब तमिलनाडु में एक के बाद एक रेवड़ियाँ बाँटती रही है, तो उन्हें ये समाज कल्याण नजर आता है। देश में सबसे ज्यादा सब्सिडी पर खर्च तमिलनाडु में है। इसके अलावा देश में सबसे ज्यादा मुफ्त रेवड़ी देने वाले राज्यों में ये अव्वल है।
यहाँ तक कि सीएम स्टालिन ने बिहार में महिलाओं को 10000 रुपए देने की आलोचना करते हुए इसे ‘वोट खरीदने’ का तरीका बताया था। उनका कहना था कि ये आदर्श चुनाव संहिता का उल्लंघन है। लेकिन चुनाव के ऐन पहले भले ही चुनाव के तारीख का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन ऐन पहले जनता को पोंगल के नाम पर 3000 रुपए हर परिवार को ‘गिफ्ट’ के नाम पर देना और एक अन्य योजना में परिवार की महिला मुखिया को 1000 रुपए देना क्या वोट खरीदने का तरीका नहीं है।
डीएमके ने तमिलनाडु में शुरू किया था मुफ्त रेवड़ी बांटना
तमिलनाडु में डीएमके के संस्थापक अन्नादुरई ने ही 1 रुपए में 1 किलो चावल देने की शुरुआत की थी। लेकिन 2006 में पार्टी ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में कलर टीवी देना का वादा किया। इसका फायदा चुनाव में मिला और डीएमके सत्ता पर काबिज हो गई। इसके बाद मुफ्त की रेवड़ियाँ बांटने की परंपरा चल पड़ी। 2011 में डीएमके ने छात्रों को मुफ्त लैपटॉप देने का वादा किया। 2021 के बाद तो डीएमके ने जमकर रेवड़ियाँ बांटी हैं।
हाल में सीएम स्टालिन ने सभी सरकारी कर्मचारियों के लिए नई पेंशन योजना लागू करने का ऐलान किया। इसके अलावा पोंगल पर 22 लाख आरसी फैमिली कार्ड धारकों को पोंगल पर 3000 रुपए कैश दिए जाएँगे। इससे पहले पोंगल पर 1 किलो भूरा चावल, 1 किलो चीनी और साबुत गन्ने को बतौर गिफ्ट देने की घोषणा की गई थी।
मुख्यमंत्री स्टालिन चेन्नई में 20 लाख कॉलेज छात्रों को लैपटॉप उपलब्ध कराने की योजना भी शुरू की। पहले चरण में सरकारी इंजीनियरिंग, कला, विज्ञान, चिकित्सा, कृषि, विधि, पॉलिटेक्निक और आईटीआई के 10 लाख छात्र-छात्राओं को लैपटॉप दिया जा रहा है। इस दौरान डेल, एसर, एचपी जैसी बड़ी कंपनियों के लैपटॉप भी छात्रों को दिए जाएँगे।
तमिलनाडु पर देनदारी का बोझ
मुफ्त की योजनाओं पर होने वाला खर्च राजकोषीय घाटे का अहम कारण है। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु की कुल बकाया देनदारी काफी अधिक हैं। मार्च 2025 के अंत में ₹9,55,690.5 करोड़ की देनदारी का अनुमान लगाया गया था।
मुफ्त की रेवड़ियों का विरोध इसलिए होता है, क्योंकि यह अर्थव्यवस्था पर बोझ डालती हैं। इससे लोगों की न्यूनतम जरूरतें पूरी हो जाती हैं और लोग काम नहीं करने की ओर प्रोत्साहित होते हैं। यही वजह है कि अर्थशास्त्री से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने रेवड़ी कल्चर पर चिंता जताई है और इसे लंबे वक्त के लिए नुकसानदायक बताया है।
दरअसल इससे राजनीतिक लाभ तो सीधा मिलता है, लेकिन राज्य का भला नहीं हो सकता। राज्य पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ उसके आत्मनिर्भर बनने की दिशा में बड़ी बाधा है।


