Sunday, July 14, 2024
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बात थी 10 लाख रोजगार की, जवाब में ‘चोटी-चिरकुट’ ले आए तेजस्वी यादवः क्या बिहार को याद दिला रहे ‘भूरा बाल साफ करो’

वैसे भी जातीय संघर्ष, जंगलराज वाले हालात मिलकर वो स्थिति पैदा कर सकते हैं, जिनमें भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साजिशें दब जाए। इस वर्ग की चिंता तेजस्वी यादव के लिए इसलिए भी जरूरी लगती है, क्योंकि राजद का आधार आज भी वह 'माई' समीकरण ही है जो मुस्लिम और यादव मिलकर बनाते हैं।

बिहार में ताजा-ताजा सत्ता परिवर्तन हुआ है। तेजस्वी यादव उपमुख्यमंत्री बने हैं। मीडिया में छाए हुए हैं। 2020 विधानसभा चुनाव के समय उन्होंने 10 लाख रोजगार देने का वादा किया था, उसके बारे में सवाल पूछे जा रहे हैं। इससे ही जुड़े केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के एक ट्वीट के जवाब में तेजस्वी यादव ने ‘चोटी, चिरकुट, सड़कछाप’ जैसे विशेषणों का इस्तेमाल किया है।

गिरिराज सिंह बीजेपी के नेता हैं। बिहार के बेगूसराय से सांसद हैं। विधायक रहते नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में मंत्री भी रहे हैं। वे लंबी शिखा रखते हैं। शिखा रखने वाला वर्ग पहले भी तेजस्वी यादव की पार्टी राजद के निशाने पर रही है।

दरअसल, गिरिराज सिंह ने 12 अगस्त 2022 को तेजस्वी के एक इंटरव्यू का क्लिप ट्वीट किया। साथ ही लिखा, “10 लाख रोजगार देने का जो हमने वादा किया था, वह हम मुख्यमंत्री बनने पर पूरा करेंगे। अभी तो हम उपमुख्यमंत्री हैं।” 21 सेकेंड के इस वीडियो को सुनने से आभास होता है कि रोजगार वाले वादे से तेजस्वी पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

इसके जवाब में तेजस्वी यादव ने अपने इंटरव्यू का 54 सेकेंड का क्लिप शेयर करते हुए लिखा, “श्रीमान जी, इतना बेशर्म मत बनिए। एक फुट लंबी चोटी रखने से कोई ज्ञानी नहीं बन जाता, जैसे आप रखते है। आप लोगों की इन चिरकुट हरकतों, एडिटेड वीडियो व सड़क छाप बयानों की बदौलत ही भाजपा की यह दुर्दशा है। इन बेचारों का बिहार में कोई चेहरा ही नहीं।”

दोनों नेताओं ने ट्विटर पर जिस इंटरव्यू के अंश साझा किए हैं, वह जी न्यूज को दिया गया है। 6 मिनट 19 सेकेंड का यह इंटरव्यू जी न्यूज बिहार/झारखंड के लिए रवि त्रिपाठी ने लिया है। आप नीचे यह इंटरव्यू पूरा सुन सकते हैं। 1 मिनट 10वें सेकेंड से 10 लाख रोजगार के वादे को लेकर बात शुरू होती है। इसमें तेजस्वी एक तरफ रोजगार देने की बात भी कह रहे हैं, दूसरी तरफ यह भी बता रहे हैं कि उन्होंने यह वादा मुख्यमंत्री बनने की स्थिति में किया था। फिलहाल वे उपमुख्यमंत्री हैं।

वैसे राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप कोई नई बात नहीं है। नेताओं की भाषा में गिरावट भी कोई मुद्दा नहीं रही। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के समय तृणमूल कॉन्ग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा ने भी गिरिराज सिंह की ‘चोटी’ को राजनीतिक बयानबाजी में घसीटा था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह कहते हैं कि ममता का गोत्र रोहिंग्याओं का है। हमें इस पर गर्व है। ये चोटीवाले राक्षस गोत्र से तो कहीं बेहतर है।”

2021 में महुआ मोइत्रा द्वारा किए गए ट्वीट का स्क्रीनशॉट

लेकिन तेजस्वी यादव की राजनीतिक विरासत की वजह से ‘चोटी’ को निशाना बनाए जाने के मायने गहरे हो जाते हैं। दरअसल, कभी बिहार में ‘भूरा बाल साफ करो’ का नारा दिया गया था। भूमिहार, राजपूत, ब्राह्मण और लाला (कायस्थ) को केंद्रित कर दिए गए इस नारे ने राज्य में जातीय कटुता पैदा की थी। इसकी वजह से कई भीषण जातीय नरसंहार हुए। यह सब उसी दौर की बात है, जिसे हम जंगलराज के नाम से जानते हैं। यह कालखंड 1990 से 2005 का है। इस दौरान तेजस्वी यादव के पिता लालू प्रसाद यादव और माँ राबड़ी देवी राज्य की मुख्यमंत्री रहीं।

नीतीश कुमार की मौजूदा सरकार में वे वामपंथी दल भी साझेदार हैं जो वर्ग संघर्ष के लिए कुख्यात हैं। बिहार की कानून-व्यवस्था पहले से भी कोई बहुत दुरुस्त नहीं है। ऐसे में सत्ता परिवर्तन के बाद से लोगों में जंगलराज पैदा होने का डर है। इस बीच ‘चोटी’ को राजनीतिक बयानबाजी में घसीटे जाने से यह आशंका भी पैदा हो गई है कि क्या बिहार में फिर से जातीय संघर्ष का वही दौर वापस लाने की साजिशें रची जा रही है।

वैसे भी जातीय संघर्ष, जंगलराज वाले हालात मिलकर वो स्थिति पैदा कर सकते हैं, जिनमें भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साजिशें दब जाए। इस वर्ग की चिंता तेजस्वी यादव के लिए इसलिए भी जरूरी लगती है, क्योंकि राजद का आधार आज भी वह ‘माई’ समीकरण ही है जो मुस्लिम और यादव मिलकर बनाते हैं।

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अजीत झा
अजीत झा
देसिल बयना सब जन मिट्ठा

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