Monday, August 15, 2022
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प्रियंका गाँधी पर ‘सुनो द्रौपदी’ चुराने का आरोप, कवि पुष्यमित्र उपाध्याय ने लगाई लताड़; कहा- कविता चोरों से देश क्या उम्मीद रखे

“प्रियंका गाँधी जी ये कविता मैंने देश की स्त्रियों के लिए लिखी थी न कि आपकी घटिया राजनीति के लिए। न तो मैं आपकी विचारधारा का समर्थन करता हूँ और न आपको ये अनुमति देता हूँ कि आप मेरी साहित्यिक संपत्ति का राजनैतिक उपयोग करें।"

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी पर कविता चोरी का आरोप लगा है। दरअसल उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटीं कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी बुधवार (17 नवंबर 2021) को चित्रकूट पहुँची। उन्‍होंने पहले मत्स्यगजेन्द्रनाथ मंदिर में जलाभिषेक कर आरती उतारी मंदाकिनी की जलधारा में बने मंच से महिलाओं से संवाद किया।

इस दौरान उन्होंने चित्रकूट के रामघाट पर ‘लड़की हूँ-लड़ सकती हूँ’ संवाद को संबोधित करते हुए महिलाओं से उत्तर प्रदेश को बदहाली से निकालने के लिए संघर्ष में आगे आने का आह्वान किया। उन्होंने एक कविता पढ़ते हुए कहा, “बहुत हुआ इंतजार अब, सुनो द्रौपदी शस्त्र उठा लो अब गोविंद ना आएँगे। औरों से कब तक आस लगाओगी…।”  उन्‍होंने कहा कि महिलाएँ खुद अपनी लड़ाई लड़ें।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि महिलाओं को अपनी हालत बदलने के लिए ख़ुद संघर्ष करना होगा, कॉन्ग्रेस पार्टी हर क़दम पर उनके साथ है। उन्होंने महिलाओं का आह्वान किया कि अगले चुनाव में वे आँख मूँद कर महिलाओं को वोट दें। अब इस कविता को लिखने वाले कवि पुष्यमित्र उपाध्याय ने इस पर आपत्ति जताते हुए प्रियंका गाँधी को लताड़ लगाई है।

उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, “प्रियंका गाँधी जी ये कविता मैंने देश की स्त्रियों के लिए लिखी थी न कि आपकी घटिया राजनीति के लिए। न तो मैं आपकी विचारधारा का समर्थन करता हूँ और न आपको ये अनुमति देता हूँ कि आप मेरी साहित्यिक संपत्ति का राजनैतिक उपयोग करें। कविता भी चोरी कर लेने वालों से देश क्या उम्मीद रखेगा?” उन्होंने एक और ट्वीट में इस कविता को लेकर छपी खबर का कटिंग शेयर किया है।

प्रियंका गाँधी ने कहा कि महिलाओं की स्थिति में तब तक सुधार नहीं होगा जब तक फ़ैसले लेने वाली जगहों पर महिलाएँ नहीं होंगी। कॉन्ग्रेस ने इसीलिए चुनाव में 40 फ़ीसदी टिकट महिलाओं को देने का ऐलान किया है। महिलाएँ ही महिलाओं का दर्द समझ सकती हैं और जब विधानसभा में बड़ी तादाद में महिलाएँ होंगी तो उनके पक्ष में नीतियाँ भी बनेंगी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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