Sunday, June 16, 2024
Homeराजनीतिउद्धव ठाकरे के पास शिवसेना भी नहीं छोड़ेंगे एकनाथ शिंदे: बताया इरादा, कहा- 50...

उद्धव ठाकरे के पास शिवसेना भी नहीं छोड़ेंगे एकनाथ शिंदे: बताया इरादा, कहा- 50 MLA साथ; अब मुंबई कूच करेंगे

अब सवाल ये अटका है कि असली शिवसेना कौन सी है, उद्धव ठाकरे वाली या फिर एकनाथ शिंदे वाली। दो तिहाई बहुत अपने पास होने का दावा करते हुए एकनाथ शिंदे असली शिवसेना पर दावा ठोक रहे हैं।

शिवसेना के बागी गुट के नेता एकनाथ शिंदे जल्द ही गुवाहाटी से मुंबई पहुँचेंगे, जहाँ उनकी मुलाकात राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से होनी है। एकनाथ शिंदे बार-बार ये दोहरा रहे हैं कि वो एक शिवसैनिक हैं और उनका उद्देश्य शिवसेना को आगे ले जाना है। उन्होंने कहा कि हमने पार्टी नहीं छोड़ी है और हिंदुत्व के मुद्दे पर आगे बढ़ रहे हैं। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी दिल्ली पहुँचे हैं, जहाँ उनकी मुलाकात पार्टी के आलाकमान से होनी है।

गुवाहाटी के जिस रेडिसन ब्लू होटल में सभी बागी विधायक ठहरे हुए हैं, उसकी बुकिंग भी 12 जुलाई तक बढ़ाने की बात सामने आई है। उस दिन तक बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला भी स्पष्ट हो जाएगा। शिंदे गुट की पूरी कोशिश है कि NCP के डिप्टी स्पीकर को अयोग्य ठहराया जाए। बुधवार (29 जून, 2022) को भाजपा ने भी अपने विधायकों को मुंबई बुलाया है। दल-बदल कानून के तहत एकनाथ शिंदे को किसी दूसरे दल में शिवसेना का विलय करने के लिए 37 विधायकों के समर्थन की आवश्यकता है, जिसका वो दावा कर रहे हैं।

अब सवाल ये अटका है कि असली शिवसेना कौन सी है, उद्धव ठाकरे वाली या फिर एकनाथ शिंदे वाली। दो तिहाई बहुत अपने पास होने का दावा करते हुए एकनाथ शिंदे असली शिवसेना पर दावा ठोक रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद भी एकनाथ शिंदे ने इसे ‘असली शिवसेना की जीत’ बताया था। वहीं सांसद अरविंद सावंत और प्रियंका चतुर्वेदी कह रही हैं कि असली शिवसेना उद्धव ठाकरे वाली है। अब ऐसा लगता है कि इस लड़ाई के फैसला अदालत में ही आएगा।

विधानसभा के फ्लोर पर ही ये साबित किया जाता है कि किसके पास कितने विधायकों का समर्थन है। राज्यपाल के सामने परेड कराए जाने का विकल्प भी होता है। दलबदल कानून कहता है कि कोई व्यक्ति किसी पार्टी के चुनाव चिह्न पर जीत के बाद स्वेच्छा से पद और सदस्यता से इस्तीफा दे देता है तो इसे कानून के अंतर्गत माना जाएगा। पार्टी व्हिप के उल्लंघन पर भी कार्रवाई का प्रावधान है। पहले ये भी नियम था कि अगर किसी पार्टी के एक तिहाई सदस्य उससे इस्तीफा दे देते हैं तो उस पर दलबदल कानून लागू नहीं होगा, वाजपेयी सरकार ने इसे दो तिहाई किया।

वहीं किसी दूसरी पार्टी में विलय के लिए दो तिहाई सदस्यों के इस्तीफे की जरूरत होती है। स्पीकर अगर पक्षपाती फैसला देता है तो उसके खिलाफ अदालत जाने का भी विकल्प होता है। उद्धव गुट 16 विधायकों की सदस्यता रद्द करवाना चाहता है। अधिकतर जानकर कह रहे हैं कि शिंदे गुट के पास अब किसी दूसरी पार्टी में विलय का ही रास्ता है, ताकि वो दलबदल कानून से बच सकें। विधायकों को पार्टी अयोग्य ठहरा सकती है या कार्रवाई कर सकती है। मूल शिवसेना होने के लिए शिंदे को सांसदों, नगरसेवकों, कार्यकारी और जिला इकाइयों का पर्याप्त समर्थन भी हासिल करना होगा।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

आतंकवाद का बखान, अलगाववाद को खुलेआम बढ़ावा और पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा को बढ़ावा : पढ़ें- अरुँधति रॉय का 2010 वो भाषण, जिसकी वजह से UAPA...

अरुँधति रॉय ने इस सेमिनार में 15 मिनट लंबा भाषण दिया था, जिसमें उन्होंने भारत देश के खिलाफ जमकर जहर उगला था।

कर्नाटक में बढ़ाए गए पेट्रोल-डीजल के दाम: लोकसभा चुनाव खत्म होते ही कॉन्ग्रेस ने शुरू की ‘वसूली’, जनता पर टैक्स का भार बढ़ा कर...

अभी तक बेंगलुरु में पेट्रोल 99.84 रुपये प्रति लीटर और डीजल 85.93 रुपये प्रति लीटर बिक रहा था, लेकिन नए आदेश के बाद बढ़ी हुई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -