Tuesday, June 25, 2024
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कमारेड्डी डिपो में बची केवल KVR की बस, KCR और रेवंत रेड्डी दोनों के टायर पंक्चर: एक CM तो दूसरे के CM बनने के चर्चे, पर भाजपाई क्षत्रप के सामने दोनों ने टेके घुटने

केवीआर रेड्डी से चुनाव में शिकस्त पाने वाले केसीआर जहाँ राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं तो वहीं रेवंत रेड्डी के विषय में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह राज्य के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं।

तेलंगाना में कमारेड्डी सीट पर भाजपा के प्रत्याशी कटिपल्ला वेंकटरमन्ना रेड्डी (KVR रेड्डी) ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चन्द्रशेखर राव और कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष रेवंत रेड्डी को हरा दिया है। उनकी इस जीत के चर्चे पूरे देश में और सोशल मीडिया पर हो रहे हैं।

केवीआर रेड्डी से चुनाव में शिकस्त पाने वाले केसीआर जहाँ राज्य के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं तो वहीं रेवंत रेड्डी के विषय में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि वह राज्य के अगले मुख्यमंत्री हो सकते हैं। वह अभी राज्य के कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष हैं।

केवीआर रेड्डी के सामने मुख्यमंत्री केसीआर दूसरे और रेवंत तीसरे नम्बर पर रहे हैं। केवीआर रेड्डी को कुल 66,652 वोट मिले हैं। उन्होंने सीएम केसीआर को 6741 वोटों के अंतर हराया है। केसीआर को यहाँ 59,911 और रेवंत रेड्डी को 54,916 वोट मिले हैं।

केवीआर रेड्डी जीत गए हैं।

54 वर्षीय केवीआर रेड्डी कमारेड्डी के ही रहने वाले हैं। यहाँ उनके जीतने का सबसे बड़ा फैक्टर उनका स्थानीय होना ही है। उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान अपने एक भाषण में कहा था, “कमारेड्डी डिपो की बसें कमारेड्डी में ही रहेंगी और बाहर की बसें वापस चली जाएँगी।”

उनका इशारा इस दौरान रेवंत रेड्डी और सीएम केसीआर पर था। दोनों ही कमारेड्डी में बाहरी प्रत्याशी थे। रेड्डी, पेशे से एक कारोबारी हैं और वह कामारेड्डी में शिक्षण संस्थानों से जुड़े हुए हैं। वह भाजपा से पहले केसीआर की पार्टी बीआरएस और कॉन्ग्रेस से भी जुड़े रहे हैं। केवीआर रेड्डी कमारेड्डी में जिला परिषद के अध्यक्ष भी रहे हैं।

केवीआर रेड्डी पिछले चुनाव में भी भाजपा की तरफ से कामारेड्डी सीट से लड़े थे लेकिन वह चुनाव हार गए थे। हालाँकि, इस हार के बाद उन्होंने अपनी तैयारी चालू कर दी थी और स्थानीय स्तर पर अपना गढ़ मजबूत करने में जुटे हुए थे। केवीआर रेड्डी ने कामारेड्डी के भीतर गाँवों का दौरा किया। जो भी व्यक्ति उनसे मदद माँगने आया उसे मदद दी और क्षेत्र में कई सामुदायिक भवन बनवाए। इस कारण से उनका जनता में अच्छा प्रभाव बना। स्थानीय होने और जनता से जुड़ाव के कारण वह इन दोनों बड़े नेताओं को हराने में सफल रहे।

उनकी इस सफलता के साथ ही भाजपा ने भी तेलंगाना में अब तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। तेलंगाना में भाजपा इस बार के चुनाव में 8 सीटें जीतने में सफल रही है। वह इस बार राज्य में तीसरी सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी है। 2018 चुनावों में भाजपा ने तेलंगाना में मात्र 1 सीट जीती थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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