Friday, November 27, 2020
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क्या अब कोर्ट तय करेगी सरकार कब युद्ध की घोषणा करे, कब शांति की : अटॉर्नी जनरल

एजी ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि वे सीमित दायरे में रक्षा मामलों का उपयोग करें, क्योंकि अदालत द्वारा कहा गया कुछ भी विपक्ष द्वारा सरकार को लक्षित करने के लिए उपयोग किया जाता है।

अटॉर्नी जनरल ने सर्वोच्च न्यायालय में बताया कि याचिकाकर्ताओं द्वारा अदालत में पेश राफेल दस्तावेजों को रक्षा मंत्रालय से चुराया गया था। राफेल सौदे पर समीक्षा याचिकाओं पर सुनवाई आज (मार्च 6, 2019) दोपहर के भोजन के बाद फिर से शुरू हुई।

शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने संजय सिंह द्वारा सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ दिए गए कुछ बयानों पर आपत्ति जताई और उन्हें सुनने से इनकार कर दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि पीठ इसे बहुत गंभीरता से ले रही है और उनके खिलाफ गंभीर कार्रवाई करेगी। अदालत ने अधिवक्ता संजय हेगड़े से कहा कि वह अपने मुवक्किल संजय सिंह को सूचित करें। AAP नेता उन व्यक्तियों में से एक है जिन्होंने राफेल सौदे पर सुप्रीम कोर्ट में एक समीक्षा याचिका दायर की है।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अदालत को यह बताते हुए कि समाचार पत्रों द्वारा प्रकाशित और याचिकाकर्ताओं द्वारा उपयोग किए गए राफेल दस्तावेज रक्षा मंत्रालय से चुराए गए थे और सरकार उसी के लिए कार्रवाई कर रही है। याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को धमकाने और कोर्ट में सच्चाई लाने से उन्हें रोकने का प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अदालत की अवमानना ​​है।

अटार्नी जनरल ने आरटीआई अधिनियम के तहत बताया कि रक्षा दस्तावेजों को इस अधिनियम के तहत प्रकटीकरण से छूट प्राप्त है। उन्होंने उल्लेख किया कि हिंदू द्वारा प्रकाशित दस्तावेज “सीक्रेट” के रूप में चिह्नित हैं। उन्हें इस तरह सार्वजनिक डोमेन में पेश नहीं किया जा सकता। केके वेणुगोपाल ने कहा कि रक्षा दस्तावेज प्रकाशित होने के बाद भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा को भारी नुकसान हुआ है।

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने यह भी कहा, “क्या सुप्रीम कोर्ट युद्ध में जाने या शांति के लिए बातचीत करने के निर्देश देगा। कुछ मुद्दे न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर हैं। क्या हमें युद्ध की घोषणा करते समय या जब हम शांति की घोषणा करते हैं, क्या हमें हर बार अदालत की अनुमति लेनी होगी? क्या इसके लिए अदालत में आना होगा?”

उन्होंने तब देश के लिए राफेल जेट की आवश्यकता का उल्लेख किया, लेकिन पीठ ने उन्हें समीक्षा याचिका पर टिकने के लिए कहा।

न्यायमूर्ति के एम जोसेफ ने एजी से असहमति जताते हुए कहा कि चोरी के सबूतों को भी अदालत द्वारा साक्ष्य अधिनियम के अनुसार देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर कुछ भ्रष्टाचार हुआ है, तो सरकार आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम के तहत आश्रय नहीं ले सकती है। लेकिन अटॉर्नी जनरल ने असहमति जताई और कहा कि दस्तावेजों का स्रोत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पूछा कि आख़िर याचिकाकर्ताओं को रक्षा मंत्रालय के क्लासिफाइड दस्तावेज कैसे मिले।

CJI रंजन गोगोई ने एजी से पूछा, अगर किसी आरोपी को अपनी बेगुनाही साबित करने में कठिनाई हो रही है, एक दस्तावेज चुरा रहा है और अदालत में पेश किया गया है जो स्पष्ट रूप से दिखाता है कि वह निर्दोष है, तो न्यायाधीश को दस्तावेज को केवल इसलिए अनदेखा करना चाहिए क्योंकि यह चोरी का है। इसके लिए, वेणुगोपाल को दस्तावेज़ के स्रोत का खुलासा करना होगा।

CJI रंजन गोगोई ने एजी से कहा कि वे इस पर तथ्य प्रस्तुत करें कि सबूत का स्रोत महत्वपूर्ण है। इस पर, एजी ने सुप्रीम कोर्ट द्वारा 2004 के एक निर्णय का साक्ष्य प्रस्तुत किया, जिसमें कहा गया था कि अवैध रूप से प्राप्त सबूतों पर भरोसा नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति कौल ने यह कहते हुए भी एजी से असहमति जताई कि चूँकि दस्तावेज अदालत में आए हैं, इसलिए वह यह नहीं कह सकते कि अदालत को उन पर ध्यान नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि भले ही एजी सही है, कुछ मुद्दों को सुनने के लायक है यदि वे अदालत को कन्विंस कर पाते हैं तो।

अटॉर्नी जनरल ने दोहराया कि राफेल जेट की खरीद राष्ट्र के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे का एक राजनीतिक कोण भी है, और सीएजी ने संसद में इस सौदे पर अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप दी है, और संसद इस मुद्दे पर गौर करेगी। एजी ने अदालत से यह भी अनुरोध किया कि वे सीमित दायरे में रक्षा मामलों का उपयोग करें, क्योंकि अदालत द्वारा कहा गया कुछ भी विपक्ष द्वारा सरकार को लक्षित करने के लिए उपयोग किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष इस मामले का उपयोग करके सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहा है।

प्रशांत भूषण ने एजी के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि 2जी और कोलगेट मामलों में भी अदालत ने ऐसे दस्तावेजों पर भरोसा किया था। उन्होंने कहा कि उन मामलों के दौरान भी सरकार ने इसी तरह की दलीलें दी थीं, लेकिन जिन्हें अदालत ने खारिज कर दिया था।

प्रशांत भूषण ने यह भी कहा कि दस्तावेजों को द हिंदू और कारवाँ पत्रिका द्वारा प्रकाशित किया गया है, इसलिए यह कहना गलत है कि उन्होंने अपने दस्तावेजों के स्रोत का खुलासा नहीं किया है।

CJI रंजन गोगोई ने कहा कि अगर कोर्ट एजी के तर्क को स्वीकार करता है, तो वह खारिज कर देगा, अन्यथा वह आगे बढ़ जाएगा। इस बारे में प्रशांत भूषण ने कहा कि भले ही दस्तावेजों को स्वीकार नहीं किया जाता है, लेकिन इससे मामले में कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए अधिकांश दस्तावेजों में सूत्रों का उल्लेख किया गया है।

बता दें कि बीते साल 13 दिसंबर, 2018 को सुप्रीम कोर्ट ने राफेल विमान सौदे में फैसला सुनाया था और कहा था कि इस सौदे में किसी तरह की गड़बड़ी नहीं है। हालाँकि, तब कुछ लोगों ने सवाल उठाया था कि केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सही कागजात पेश नहीं किए इसलिए फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

फैसला आने के फौरन बाद केंद्र सरकार ने संशोधन याचिका दाखिल की थी।  इसके बाद प्रशांत भूषण ने याचिका दाखिल कर माँग की कि सरकार के दिए नोट में अदालत को गुमराह करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। 26 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि राफेल मामले को लेकर दिए अपने फैसले पर खुली अदालत में फिर से विचार होगा।

आपको बता दें कि वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण, बीजेपी के बागी नेता यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह और वकील एम एल शर्मा ने पुनर्विचार याचिका में अदालत से राफेल आदेश की समीक्षा करने के लिए अपील की है।

अपील में कहा गया कि सरकार ने राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए निर्णय लेने की सही प्रक्रिया का पालन नहीं किया है। मोदी सरकार ने 3 P यानी Price, Procedure, Partner के चुनाव में गफलत बनाए रखी और अनुचित लाभ लिया है।

वहीं, केंद्र सरकार की अपील में कहा गया है कि कोर्ट अपने फैसले में उस टिप्पणी में सुधार करे जिसमें CAG रिपोर्ट संसद के सामने रखने का ज़िक्र है। केंद्र का कहना है कि कोर्ट ने सरकारी नोट की गलत व्याख्या की है।

फ़िलहाल, मामले की सुनवाई 14 मार्च तक के लिए स्थगित कर दी गई है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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