राफेल सुनवाई: प्रशांत भूषण और ‘द हिन्दू’ ने लिया चोरी किए डाक्यूमेंट्स का सहारा, होगी जाँच

सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण द्वारा किसी भी प्रकार की अतिरिक्त एफिडेविड लेने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह ऐसे किसी भी प्रकार की अतिरिक्त एफिडेविड या डॉक्यूमेंट को को स्वीकार नहीं करेगा, जो उसके समक्ष फाइल नहीं किए गए हों।

राफेल सौदे के मामले में सुप्रीम कोर्ट 14 दिसंबर को केंद्र सरकार को क्लीन चिट दे चुकी है। राफेल सौदे को लेकर फाइल किए गए रिव्यु पेटिशन पर कोर्ट ने आज से सुनवाई शुरू की। ओपन कोर्ट में सुनवाई करते हुए हुए मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने वकील प्रशांत भूषण को फटकारा। सुप्रीम कोर्ट ने प्रशांत भूषण द्वारा किसी भी प्रकार की अतिरिक्त एफिडेविड लेने से मना कर दिया। कोर्ट ने कहा कि वह ऐसे किसी भी प्रकार की अतिरिक्त एफिडेविड या डॉक्यूमेंट को को स्वीकार नहीं करेगा, जो उसके समक्ष फाइल नहीं किए गए हों।

वहीं केंद्र सरकार ने वकील प्रशांत भूषण की प्रारंभिक याचिकाओं पर आपत्ति जताई। केंद्र सरकार की तरफ से पेश वरिष्ठ अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि प्रशांत भूषण व उनके पक्ष के अन्य वकीलों ने जिन डाक्यूमेंट्स का सहारा लिया, वो चोरी के हैं। उन्होंने कहा कि इन डाक्यूमेंट्स को मंत्रालय के वर्तमान या पूर्व अधिकारियों द्वारा धोखे से चोरी कर लिया गया था। जब अदालत ने पूछा कि सरकार इसको लेकर क्या कर रही है, तो वेणुगोपाल ने बताया कि इस मामले की जाँच बिठाई गई है।

सुनवाई के बीच में ही लंच का समय हो जाने के कारण 2 बजे दोपहर तक सुनवाई स्थगित कर दी गई। इसके बाद वेणुगोपाल कोर्ट को बताएँगे कि इस मामले में सरकार ने क्या स्टेप्स लिए हैं। वेणुगोपाल ने कहा कि समाचारपत्रों में प्रकाशित और रिव्यु पेटिशन के साथ जोड़े गए रिपोर्ट्स विशेषाधिकृत हैं और इस पर नोट नहीं लिया जा सकता। उन्होंने याद दिलाया कि यह मामला रक्षा सौदे से जुड़ा है और इसमें देश की सुरक्षा शामिल है। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि ‘द हिन्दू’ द्वारा प्रकाशित किए गए राफेल सम्बंधित काग़ज़ात ‘ऑफिसियल सीक्रेट ऐक्ट’ के तहत आते हैं।

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अटॉर्नी जनरल ने दिलाया कि हालिया घटनाओं से हमें इस बात का एहसास हो गया है कि यह कितना महत्वपूर्ण और संवेदनशील सौदा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की स्क्रूटनी भविष्य में होने वाले सौदों पर भी प्रभाव डालेगी। कोई भी देश भारत के साथ इस तरह के सौदों में शामिल होने से हिचकिचाएगा। उन्हें ऐसा लगेगा कि भारत को इस प्रकार के सौदों को पूरा करने के लिए टीवी चैनल्स, संसद और फिर अदालत से होकर गुजरना ज़रूरी है। उन्होंने कहा कि उन दोनों पेपर और पेटिशन के साथ उनकी रिपोर्ट्स जोड़ने वाले वकीलों के ख़िलाफ़ अभियोजन चलाया जाएगा।

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