HomeराजनीतिCM केजरीवाल की तुलना नपुंसक से! चुनाव से एक महीने पहले शशि थरूर ने...

CM केजरीवाल की तुलना नपुंसक से! चुनाव से एक महीने पहले शशि थरूर ने क्यों की ऐसी बात?

थरूर ने 'बगैर जिम्मेदारी की सत्ता' के लिए तो माफी माँगी लेकिन नपुंसक शब्द के लिए माफी नहीं माँगी। लोग कयास लगा रहे हैं कि राहुल गाँधी पर भी 'बिना जिम्मेदारी के सत्ता का सुख भोगने' का आरोप लगाया जाता रहा है, इसलिए...

राजधानी दिल्ली में 8 फरवरी को मतदान होने वाला है। इसको लेकर सियासी माहौल गर्माया हुआ है। इस बीच कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल पर तीखे हमले करते हुए कहा कि वो ‘बगैर जिम्मेदारी का सत्ता’ (power without responsibility) चाहते हैं।

उन्होंने यह बात एक इंटरव्यू के दौरान कही। उनसे जब दिल्ली चुनाव और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर अरविंद केजरीवाल के रवैये को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने अरविंद केजरीवाल पर संशोधित नागरिकता अधिनियम के खिलाफ मजबूत रुख नहीं अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री कानून के समर्थक और विरोधियों दोनों को अपने पक्ष में करना चाहते थे। 

थरूर ने कहा कि केजरीवाल शायद नागरिकता संशोधन कानून के समर्थक और विरोधी दोनों लोगों को अपनी तरफ चाहते हैं, इसलिए उन्होंने इस पर कोई कड़ा रुख नहीं अपनाया। वो दोनों लोगों को अपनी तरफ करके वोट पाना चाहते हैं। आगे थरूर ने कहा कि केजरीवाल ने CAA और NRC को हटाने वाले बयान दिए हैं लेकिन उन्होंने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। 

उन्होंने केजरीवाल पर तीखे हमले करते हुए कहा, “केजरीवाल ने अपने राज्य में हुई हिंसा के पीड़ितों के साथ वो सहानुभूति भी नहीं दिखाई, जो कि लोग एक मुख्यमंत्री से अपेक्षा रखते हैं। अगर किसी राज्य में छात्रों के साथ इस तरह की हिंसा होती तो मुख्यमंत्री जरूर उनसे मिलने जाते और सहानुभूति जताते। असल में केजरीवाल ‘जिम्मेदारी के बिना सत्ता’ चाहते हैं, जैसा कि नपुंसक हमेशा से चाहते हैं।”

थरूर के इस बयान पर उनकी काफी फजीहत हुई। जिसके बाद उन्होंने बिना ‘जिम्मेदारी के सत्ता’ का इस्तेमाल करने के लिए माफी माँगी है। उन्होंने इसे ब्रटिश पॉलिटिक्स का पुराना लाइन बताते हुए कहा कि हाल ही में इसका इस्तेमाल टॉम स्टॉपर्ड ने किया था। थरूर ने कहा कि इसका इस्तेमाल अनुचित था और वो अपने इस बयान को वापस लेते हैं।  

आश्चर्य की बात यह है कि थरूर ने अपने ‘बगैर जिम्मेदारी की सत्ता’ के लिए तो माफी माँगी लेकिन नपुंसक शब्द के लिए माफी नहीं माँगी। लोग कयास यह लगा रहे हैं कि शायद ‘बगैर जिम्मेदारी की सत्ता’ पर थरूर ने इसलिए माफी माँग ली होगी, क्योंकि कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर भी ‘बिना जिम्मेदारी के सत्ता का सुख भोगने’ का आरोप लगाया जाता रहा है। अब कॉन्ग्रेस नेता से नपुंसक शब्द के लिए भी माफी माँगने की माँग की जा रही है।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘यहाँ मस्जिद थी, है और रहेगी’: संभल दंगे की न्यायिक जाँच आयोग रिपोर्ट में सपा सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का जिक्र 100+ बार, 199 साक्षियों...

संभल दंगों की न्यायिक जाँच आयोग की रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क का 100 बार से भी अधिक बार जिक्र। वो भी सबूतों के साथ।

100 नाराज़ ≠ 100 वोट: भारतीय राजनीति में सिर्फ़ ‘नाराज़गी’ का फ़ैक्टर कभी निर्णायक क्यों नहीं रहा

SC/ST Act, आरक्षण, Caste census, सरकारी नौकरियों में हिस्सेदारी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की राजनीति जैसे मुद्दे निश्चित रूप से सवर्णों में असंतोष पैदा कर सकते हैं। इन प्रश्नों को खारिज करना भी राजनीतिक मूर्खता होगी।
- विज्ञापन -