Homeदेश-समाजपटाखे फोड़ना है गैर-इस्लामिक, पटाखों का व्यवसाय करना है हराम: देवबंद से फतवा जारी

पटाखे फोड़ना है गैर-इस्लामिक, पटाखों का व्यवसाय करना है हराम: देवबंद से फतवा जारी

"दूसरे क्या कर रहे हैं, ये हमारी चिंता नहीं हैं, लेकिन मुस्लिमों के लिए ये हराम हैं। पटाखे फोड़ने का उल्लेख किसी भी धार्मिक किताब में नहीं हैं। इनमें आग लगाना ऐसा है जैसे अपने पैसों में आग लगाई जा रही हो।"

उत्तर प्रदेश के देवबंद में दिवाली से कुछ दिन पहले अब्दुल वकील कासमी नामक एक मौलाना ने फतवा जारी कर पटाखे फोड़ना गैर इस्लामिक बताया है और साथ ही पटाखों का व्यवसाय करके मिलने वाले लाभ को हराम करार दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ये मौलाना अब्दुल वकील कासमी इत्तेहाद उलेमा-उल-हिंद के राज्य सचिव हैं। इनका कहना है, “दूसरे क्या कर रहे हैं, ये हमारी चिंता नहीं हैं, लेकिन मुस्लिमों के लिए ये हराम हैं। पटाखे फोड़ने का उल्लेख किसी भी धार्मिक किताब में नहीं हैं। इनमें आग लगाना ऐसा है जैसे अपने पैसों में आग लगाई जा रही हो। ये पैसा शिक्षा जैसी बेहतर चीजों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।”

खास बात ये है कि ये फतवा दिवाली से कुछ दिन पहले ही आया है। ताकि मुस्लिम हिन्दू त्यौहारों में शिरकत करने से दूर रहें। लेकिन ये जानने वाली बात है कि पटाखे शब-ए-बारात में भी बहुत स्तर पर इस्तेमाल होते हैं।

शब-ए-बारात वो दिन होता है, जब मुस्लिम साल में एक बार अपने खुदा से गुनाहों के लिए माफी माँगते हैं और पूरी रात मिठाई बाँटी जाती है और पटाखे जलाए जाते हैं।

गौरतलब है कि इत्तहाद-अल-हिंद का फतवा जारी करने का अलग ही इतिहास रहा है। अभी हाल ही में इसी संस्थान के उपाध्यक्ष ने नुसरत जहां पर निशाना साधा था, जब उन्होंने हिंदू परिवार में शादी की थी और हिंदू त्यौहारों को भी मनाया था।

नुसरत पर मौलाना का कहना था कि दुर्गा पूजा आदि करना गैर-इस्लामिक है। अगर नुसरत को ये सब करना है तो उन्हें अपना नाम और धर्म बदल लेना चाहिए क्योंकि बतौर मुसलमान वो दुर्गा पूजा आदि में शामिल नहीं हो सकतीं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -