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अफगानिस्तान पर हथियारों के बल पर ‘कब्ज़ा’ और शरिया शासन वाला तालिबान, अब दे रहा है रूस-यूक्रेन संघर्ष में संयम बरतने का ज्ञान

इसी तालिबान ने अफगानिस्तान में पिछले साल अगस्त में एक के बाद एक हमले कर न केवल सैकड़ों हत्याएँ की थीं। तालिबान से पहले की सरकारों में सैनिक और पुलिसकर्मियों को चुन-चुनकर तालिबान ने हत्या की थी।

रूस और यूक्रेन (Russia-Ukraine War) के बीच जारी जंग के बीच अब वो संगठन भी ‘शांति की वकालत’ कर रहा है, जिसने जिहाद (Jihad) और हथियारों के दम पर अफगानिस्तान (Afghanistan) में भारी खून-खराबा कर उस पर कब्जा किया है। तालिबान (Taliban) ने यूक्रेन में रूसी हमलों के कारण आम नागरिकों के मारे जाने पर चिंता जाहिर करते हुए शांति की अपील की है। तालिबान ने दोनों देशों से विवादित मुद्दों को शांतिपूर्ण तरीके से हल करने की अपील की है।

ऐसे वक्त में जब दुनिया भर के तमाम देश रूस पर प्रतिबंधों की बौछार कर रहे हैं और पुतिन की आलोचना कर रहे हैं, तब तालिबान ने यूक्रेन संकट पर यह बयान दिया है। तालिबान ने कहा है कि सभी पक्षों को उन कदमों को उठाने से बचने की जरूरत है, जिनसे हिंसा के हालात बनें। इसके साथ ही तालिबान ने रूस और यूक्रेन से परस्पर संवाद करने की अपील भी की है।

उल्लेखनीय है कि रूस और यूक्रेन के बीच हो रहे युद्ध का आज दूसरा दिन है। रूस ने यूक्रेन के नेवल बेस, एयर डिफेंस सिस्टम और सैकड़ों सैनिकों को खत्म कर दिया है। रूसी सेना कीव पहुँच चुकी है। उधर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन लगातार यूक्रेन को सरेंडर करने के लिए कह रहे हैं। वहीं नाटो और अमेरिका रूस को कार्रवाई की चेतावनी तो दे रहे हैं, लेकिन पुतिन के खिलाफ जंग में उतरने की हिम्मत नहीं दिखा रहे हैं। नाटो और अमेरिका स्पष्ट कर चुके हैं कि वो यूक्रेन में अपनी सेना नहीं भेजेंगे। हालाँकि, दुनिया भर के कई देश रूस पर आर्थिक प्रतिबंध जरूर थोप रहे हैं।

अफगानिस्तान में लोकतान्त्रिक तरीके से चुनी गई सरकार को हथियारों के दम पर हटाकर सत्ता पर कब्जा करने वाला तालिबान आज भले ही शांति की बात कर रहा है, लेकिन इसी ने अफगानिस्तान में पिछले साल अगस्त में एक के बाद एक हमले कर न केवल सैकड़ों हत्याएँ की थीं। तालिबान से पहले की सरकारों में सैनिक और पुलिसकर्मियों को चुन-चुनकर तालिबान ने हत्या की थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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