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‘भूल गए… SI संतोष को हमने ही जलाया था’: बांग्लादेश में कट्टरपंथी पुलिस के सामने फख्र से कबूल रहे हिंदुओं को मारने की बात, क्या डेढ़ साल में यही बदलाव लाई है युनूस सरकार?

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा कोई नई बात नहीं है। बीते कई वर्षों से ऐसी घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं। कभी मंदिर तोड़े जाते हैं, कभी हिंदुओं के घर जलाए जाते हैं और कभी भीड़ उन्हें पीट-पीटकर मार डालती है।

बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा एक बार फिर अपने सबसे भयावह और शर्मनाक चेहरे के साथ सामने आई है और इस बार वह चेहरा कैमरे के सामने है, बेखौफ है और बेशर्मी से भरा हुआ है।

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, यह कोई अफवाह या आरोप नहीं बल्कि खुद अपराधी का खुला इकरार है। एक युवक, बिना किसी डर या पछतावे के यह दावा करता है कि उसने एक हिंदू पुलिस अधिकारी को जिंदा जला दिया। और यह सब वह कहाँ बैठकर कह रहा है? एक पुलिस थाने के भीतर। उसकी आँखों में न डर है, न पछतावा सिर्फ घमंड है। सत्ता का घमंड और सिस्टम की सड़ांध से मिला हुआ संरक्षण।

इस वीडियो के सामने आने के बाद सिर्फ गुस्सा नहीं बल्कि कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जब कोई व्यक्ति पुलिस स्टेशन के अंदर बैठकर हत्या का ऐलान कर सकता है, तो यह सवाल लाजमी है क्या बांग्लादेश में कानून है या युनूस के संरक्षण में कट्टरपंथियों ने हिंदुओं की तरह उसे भी जला दिया है।

वायरल वीडियो में क्या कहा गया है?

वीडियो में दिख रहा युवक खुद को बांग्लादेश के हबीगंज जिले का छात्र नेता बताता है। वह पुलिस अधिकारियों को सीधे धमकी देता हुआ नजर आता है। वह कहता है कि जरूरत पड़ी तो पुलिस स्टेशन को दोबारा जला दिया जाएगा।

सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आती है जब वह यह कहता है कि जुलाई 2024 के आंदोलन के दौरान उन्होंने पुलिस स्टेशन में आग लगा दी थी और एक हिंदू सब-इंस्पेक्टर को जिंदा जला दिया था। वह यह बात ऐसे कहता है, जैसे किसी बहादुरी के काम का जिक्र कर रहा हो।

यह बयान बताता है कि कुछ कट्टरपंथी तत्वों में कानून का कोई डर नहीं बचा है और बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा को वे गर्व की बात मानते हैं।

सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू की दर्दनाक हत्या

वीडियो में जिस पुलिस अधिकारी का जिक्र किया गया है, वे थे सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू। अगस्त 2024 में उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। उस समय बांग्लादेश में राजनीतिक हालात बेहद तनावपूर्ण थे और पूरे देश में अशांति फैली हुई थी।

हबीगंज जिले के बनियाचोंग थाना क्षेत्र में पहले एक हिंसक भीड़ ने पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया। हालात बिगड़ने पर पुलिस को आत्मरक्षा में गोली चलानी पड़ी, जिसमें कुछ लोगों की मौत हो गई। इसके बाद माहौल और ज्यादा खराब हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रात के समय भीड़ फिर से पुलिस स्टेशन पहुँची। बताया जाता है कि जब फौज मौके पर आई, तो भीड़ ने एक खौफनाक शर्त रखी। उन्होंने कहा कि बाकी सभी पुलिसकर्मियों को छोड़ दिया जाएगा लेकिन संतोष भाभू को उनके हवाले किया जाए।

करीब ढाई बजे रात में संतोष भाभू को भीड़ के सामने कर दिया गया और उन्हें पीट-पीटकर मार डाला गया। उनकी मौत के बाद भी उनका शव लंबे समय तक सड़क पर पड़ा रहा। यह घटना पूरे देश के लिए शर्मनाक थी।

हबीगंज जिला और वहाँ के हिंदू

हबीगंज जिला बांग्लादेश का मुस्लिम बहुल इलाका है। यहाँ लगभग 84 प्रतिशत लोग मुस्लिम हैं जबकि हिंदू आबादी करीब 16 प्रतिशत है। संख्या में कम होने के कारण हिंदू अक्सर खुद को असुरक्षित महसूस करता है।

इस जिले में हिंदू कई पीढ़ियों से रहते आ रहे हैं लेकिन हर बार जब राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो सबसे पहले हिंसा का शिकार वही बनते हैं। मंदिरों पर हमले, घर जलाना और लोगों को पीटना जैसी घटनाएँ यहाँ पहले भी सामने आती रही हैं।

बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले की बात नई नहीं

बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा कोई नई बात नहीं है। बीते कई वर्षों से ऐसी घटनाएँ लगातार सामने आती रही हैं। कभी मंदिर तोड़े जाते हैं, कभी हिंदुओं के घर जलाए जाते हैं और कभी भीड़ उन्हें पीट-पीटकर मार डालती है।

कई बार मामूली से बहाने बनाकर हिंसा भड़का दी जाती है। कभी किसी सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर, कभी चुनाव के समय और कभी धार्मिक पहचान के कारण हिंदुओं को निशाना बनाया जाता है। हर बार जाँच के आदेश दिए जाते हैं लेकिन हालात ज्यादा नहीं बदलते।

गौरतलब है कि इससे पहले ऑपइंडिया ने ऐसे 9 निर्दोष हिंदुओं की हत्या के मामलों की रिपोर्ट प्रस्तुत कर बताया था कि सिर्फ एक महीने में किस तरह बांग्लादेश में कुल 9 हिंदुओं को निशाना बनाया गया। कभी दीपू दास तो कभी शांतो दास और जोगेश चंद्र रॉय जैसे लोगों को कट्टरपंथी निशाना बनाते रहे हैं।

इस्लामी भीड़ इन निर्दोष हिंदुओं की हत्या कर नारे लगाती है और पेट्रोल डाल कर जलाते हुए अपनी क्रूरता का जश्न मनाती है। इनके पास ऐसी हिंसा का कोई कारण ना भी हो तो ये ईशनिंदा जैसे झूठे आरोप लगाकर अपनी कट्टरता साबित करने उतर जाते हैं।

मानवाधिकार संगठनों की चिंता

इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद मानवाधिकार संगठनों ने गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि जब कोई व्यक्ति खुलेआम हत्या की बात करता है और उसे कोई डर नहीं होता, तो यह देश की कानून-व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

सोशल मीडिया पर लोग माँग कर रहे हैं कि वीडियो में दिख रहे युवक के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। लोग यह भी कह रहे हैं कि अगर अब भी ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो बांग्लादेश में हिंदुओं की हालत और खराब हो सकती है।

सब-इंस्पेक्टर संतोष भाभू की हत्या और उस पर गर्व करता वायरल वीडियो यह दिखाता है कि बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक कितनी कठिन स्थिति में हैं। यह सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस डर और असुरक्षा की तस्वीर है, जिसमें वहाँ का हिंदू जी रहा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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