Sunday, June 4, 2023
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रक्षा विशेषज्ञ के तिब्बत पर दिए सुझाव से बौखलाया चीन: सिक्किम और कश्मीर के मुद्दे पर दी भारत को ‘गीदड़भभकी’

"भारत और चीन पड़ोसी मुल्क हैं और भारत की अपनी कमजोरी है। अमेरिका सिर्फ चीन को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है, तिब्बत को चीन से अलग नहीं किया जा सकता है। अगर अमेरिका ऐसा नहीं कर पाया तो भारत यह कैसे कर सकता है।"

भारत के मशहूर रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्मा चलानी ने तिब्बत पर भारत सरकार को सुझाव दिया था। चीन उस सुझाव से बौखलाया हुआ नज़र आ रहा है, चीनी सरकार के मुखपत्र ग्लोबल टाइम्स में भारत को कश्मीर और सिक्किम को लेकर धमकी दी गई है। ग्लोबल टाइम्स में चीनी विशेषज्ञ का हवाला देते हुए ऐसा कहा गया है कि अगर भारत ने तिब्बत को लेकर अपनी यथास्थिति में बदलाव किया, तो चीन सिक्किम को भारत का हिस्सा मानने से इंकार कर देगा। इसके अलावा चीन कश्मीर के मुद्दे पर भी अपना कथित तटस्थ रवैया बरकरार नहीं रखेगा। 

दरअसल टाइम्स ऑफ़ इंडिया में रक्षा मामलों के जानकार ब्रह्मा चेलानी का एक लेख प्रकाशित हुआ था। इस लेख के भीतर ब्रह्मा चेलानी ने भारत को सुझाव दिया था, जिसके मुताबिक़ अमेरिका ने तिब्बत को लेकर क़ानून बनाया था। भारत को इस क़ानून का चीन के खिलाफ़ उपयोग करना चाहिए जिसे भारत ने पहले खो दिया था। ‘तिब्बत’ चीन का संवेदनशील पहलू है, अगर भारत चीन के इस असंवेदनशील रवैये का लाभ नहीं लेना चाहता है तो कम से कम तिब्बत को लेकर चीन की नीतियों का समर्थन करना बंद कर ही सकता है। 

यह सुझाव चीन की सरकार को गुस्से की आग में झोंकने के लिए पर्याप्त था। ग्लोबल टाइम्स ने अपनी ख़बर में चीनी विशेषज्ञ लांग शिंगचुन के हवाले से बताया कि चेलानी शुरुआत से ही ‘चीन विरोधी’ रहे हैं और हमें इस बात पर शक है कि वो अमेरिका के गैरआधिकारिक प्रवक्ता हैं।

चेलानी अमेरिका के हितों को ध्यान में रखते हुए दावे कर रहे हैं और भारत के राजनियक नीतियों को अमेरिकी नीतियों की तर्ज पर आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। कुल मिला कर चेलानी द्वारा लिखा गया लेख भारत के हितों को नहीं लेकिन अमेरिका के हित में ज़रूर मददगार साबित होगा। 

चीनी विशेषज्ञ शिंगचुन का कहना था कि इस तरह के सुझावों से सिर्फ भारत और चीन के रिश्तों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। इससे किसी भी सूरत में भारत का हित सुनिश्चित नहीं होता है। अमेरिकी क़ानून का ज़िक्र करते हुए आगे कहा गया कि अमेरिका चीन के हितों को प्रभावित करने का लगातार प्रयास कर रहा है।

भारत तिब्बत के मुद्दे पर अमेरिकी क़ानून में शामिल नीतियों का पालन नहीं करेगा। भारत और चीन पड़ोसी मुल्क हैं और भारत की अपनी कमजोरी है। अमेरिका सिर्फ चीन को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है, तिब्बत को चीन से अलग नहीं किया जा सकता है। अगर अमेरिका ऐसा नहीं कर पाया तो भारत यह कैसे कर सकता है।      

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ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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