Wednesday, January 27, 2021
Home रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय चीन को झटका, तिब्बतियों ने पूरी दुनिया में किया मतदान: Sikyong चुनाव के लिए...

चीन को झटका, तिब्बतियों ने पूरी दुनिया में किया मतदान: Sikyong चुनाव के लिए भारत के साथ ट्रंप का भी सख्त फैसला

“यह बीजिंग को साफ संदेश है कि कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह तिब्बतियों को जितना भी दबा लें, लोकतंत्र तिब्बत में अनिवार्य रहेगा। भारत समेत कई देशों में रहने वाले सैंकड़ों तिब्बतियों ने...”

चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की नई तिब्बती नीति और समर्थन कानून के पास होने के बाद रविवार (जनवरी 3, 2021) को विश्व्यापी स्तर पर निर्वासित तिब्बती संसद के लिए मतदान आरंभ हुआ। भारत समेत कई देशों में रहने वाले सैंकड़ों तिब्बतियों ने इस मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लिया। 

निर्वासित तिब्बती नेता लोबसांग सांगेय (Lobsang Sangay) ने व्यापक स्तर पर हुए मतदान के मद्देनजर कहा कि ये चीन के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि तिब्बत में लोकतंत्र कितना अटल है। तिब्बती नेता लोबसांग ने कहा, “यह बीजिंग को साफ संदेश है कि कोई फर्क नहीं पड़ता कि वह तिब्बतियों को जितना भी दबा लें, लोकतंत्र तिब्बत में अनिवार्य रहेगा।” 

उन्होंने भारत में बने Tibetan Government-in-Exile (निर्वासन में तिब्बती सरकार) के अध्यक्ष होने के नाते जिसे सेंट्रल तिब्बती प्रशासन भी कहा जाता है, इस मतदान को लेकर बोला कि इससे तिब्बतियों को आशा का संदेश दिया गया है।

लोबसांग सांगेय ने रविवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में अपना मतदान दिया। यहीं TGIE (Tibetan Government-in-Exile) का हेडक्वार्टर भी है। इन चुनावों में 2 उम्मीदवार हैं। यूएस समेत कई देशों में रहने वाले निर्वासित तिब्बती इनमें से जिसे ज्यादा वोट देंगे, उसके हाथ अगले 5 साल यानी 2026 तक के लिए पद की कमान चली जाएगी।

सांगेय ने कहा, “परम पावन दलाई लामा ने हमें उपहार के रूप में लोकतंत्र दिया है। पुरानी पीढ़ी ने इसे संरक्षित रखा और युवा पीढ़ी इसके लिए अभ्यस्त है। ये आगे भी ऐसे ही सशक्त होगी और तिब्बत के आजादी अभियान को मजबूत करेगी।”

बता दें कि लोबसांग को साल 2011 में इस शीर्ष पद के लिए निर्वाचित किया गया था। इसके बाद उन्होंने 2016 में भी इस पद पर अपनी जगह को बनाए रखा। लेकिन अब, वह अध्यक्ष पद के लिए नए चेहरे की उम्मीद कर रहे हैं। उनकी भाषा में कहें तो अगले Sikyong की। हालाँकि, बीजिंग इन चुनावों में महत्व नहीं देता है और कई बार दिल्ली में संदेश देकर ऐसे मतदान रुकवाने की गुहार लगा चुका है।

तिब्बतियों के अधिकार के लिए अमेरिका लेकर आया नया कानून

उल्लेखनीय है कि इस वर्ष तिब्बती संसद के 17वें चुनाव अधिक महत्वपूर्ण इसलिए भी हो जाते हैं क्योंकि अभी हाल में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता से हटने से पहले तिब्बत की धार्मिक आज़ादी को समर्थन देते हुए एक नया कानून पास किया था, जिसका चीन ने विरोध भी किया। नए कानून को बनाने से पहले यूएसआईडी पहले ही फंड शुरू कर चुका था। ट्रंप काल में लाए गए इस नए कानून का नाम- Tibetan Policy and Support Act of 2020 है। इसे चीन के ख़िलाफ़ अमेरिका की विदेश नीति की नई शुरुआत की तरह देखा जा रहा है। 

इस कानून में कई बड़ी बातें कही गई हैं लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सिर्फ तिब्बत के लोगों को ही अपना अगला दलाई लामा चुनने का अधिकार है और इस प्रक्रिया में चीन किसी तरह का कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। इसके अलावा इसमें ये भी कहा गया है कि तिब्बत के लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए अमेरिका एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बना सकता है। बावजूद अगर चीन की सरकार ने अगला दलाई लामा चुनने की कोशिश की, तो अमेरिका उस पर आर्थिक प्रतिबंध भी लगा सकता है।

तिब्बत की निर्वासित सरकार 

तिब्बत की निर्वासित सरकार और संसद को आमतौर पर केंद्रीय तिब्बती प्रशासन कहते हैं, जो भारत से ही अपना काम कर रही है। इसके पीछे का इतिहास लंबा है। दरअसल, तिब्बत में चीन के कब्जे के बाद वहाँ के तिब्बती चीन के अधीन रहने को मजबूर हैं। ये कब्जा चीन ने साल 1959 में किया था।

इसके कुछ ही हफ्ते बाद वहाँ के नेता और धर्म गुरु दलाई लामा भाग कर भारत आ गए थे। उनके साथ ही यहाँ आई थी तिब्ब्तियों की एक बड़ी आबादी। जो अब हिमाचल के धर्मशाला से लेकर देश के कई हिस्सों में बस चुकी है। यहीं रहते हुए दलाई लामा ने चीन के खिलाफ आजादी की जंग छेड़ी हुई है, जिससे चीन अक्सर भौखलाया रहता है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

 

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

प्रचलित ख़बरें

दिल्ली में ‘किसानों’ ने किया कश्मीर वाला हाल: तलवार ले पुलिस को खदेड़ा, जगह-जगह तोड़फोड़, पुलिस वैन पर पथराव

दिल्ली में प्रदर्शनकारी पुलिस के वज्र वाहन पर चढ़ गए और वहाँ जम कर तोड़-फोड़ मचाई। 'किसानों' द्वारा तलवारें भी भाँजी गईं।

महिला पुलिस कॉन्स्टेबल को जबरन घेर कर कोने में ले गए ‘अन्नदाता’, किया दुर्व्यवहार: एक अन्य जवान हुआ बेहोश

महिला पुलिस को किसान प्रदर्शनकारी चारों ओर से घेरे हुए थे। कोने में ले जाकर महिला कॉन्स्टेबल के साथ दुर्व्यवहार किया गया।

तेज रफ्तार ट्रैक्टर से मरा ‘किसान’, राजदीप ने कहा- पुलिस की गोली से हुई मौत, फिर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने तिरंगे में लिपटी मृतक की लाश की तस्वीर अपने ट्विटर अकाउंट से शेयर करते हुए लिखा कि इसकी मौत पुलिस की गोली से हुई है।

दलित लड़की की हत्या, गुप्तांग पर प्रहार, नग्न लाश… माँ-बाप-भाई ने ही मुआवजा के लिए रची साजिश: UP पुलिस ने खोली पोल

बाराबंकी में दलित युवती की मौत के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया। पुलिस ने बताया कि पिता, माँ और भाई ने ही मिल कर युवती की हत्या कर दी।

हिंदुओं को धमकी देने वाले के अब्बा, मोदी को 420 कहने वाले मौलाना और कॉन्ग्रेस नेता: ‘लोकतंत्र की हत्या’ गैंग के मुँह पर 3...

पद्म पुरस्कारों में 3 नाम ऐसे हैं, जो ध्यान खींच रहे- मौलाना वहीदुद्दीन खान (पद्म विभूषण), तरुण गोगोई (पद्म भूषण) और कल्बे सादिक (पद्म भूषण)।

रस्सी से लाल किला का गेट तोड़ा, जहाँ से देश के PM देते हैं भाषण, वहाँ से लहरा रहे पीला-काला झंडा

किसान लाल किले तक घुस चुके हैं और उन्होंने वहाँ झंडा भी फहरा दिया है। प्रदर्शनकारी किसानों ने लाल किले के फाटक पर रस्सियाँ बाँधकर इसे गिराने की कोशिश भी कीं।
- विज्ञापन -

 

लालकिला में देर तक सहमें छिपे रहे 250 बच्चे, हिंसा के दौरान 109 पुलिसकर्मी घायल; 55 LNJP अस्पताल में भर्ती

दिल्ली में किसान ट्रैक्टर रैली का सबसे बुरा प्रभाव पुलिसकर्मियों पर पड़ा है। किसानों द्वारा की गई इस हिंसा में 109 पुलिसकर्मी घायल हो गए हैं, जिनमें से 1 की हालात गंभीर बताई जा रही है।

Video: किसानों के हमले में दीवार से एक-एक कर गिरते रहे पुलिसकर्मी, 109 घायल

वीडियो में देखा जा सकता है कि भीड़ द्वारा किए गए हमले से पुलिसकर्मी एक-एक कर लाल किले की दीवार से नीचे गिरते जा रहे हैं।

बिहारी-गुजराती-तमिल-कश्मीरी किसान हो तो डूब मरो… क्योंकि किसान सिर्फ पंजाबी-खालिस्तानी होते हैं, वही अन्नदाता हैं

वास्तविकता ये है कि आप इतने दिनों से एक ऐसी भीड़ के जमावड़े को किसान का आंदोलन कहते रहे। जिसकी परिभाषा वामपंथी मीडिया गिरोह और विपक्षियों ने गढ़ी और जिसका पूरा ड्राफ्ट एक साल पहले हुए शाहीन बाग मॉडल के आधार पर तैयार हुआ।

जर्मनी, आयरलैंड, स्पेन आदि में भी हो चुकी हैं ट्रैक्टर रैलियाँ, लेकिन दिल्ली वाला दंगा कहीं नहीं हुआ

दिल्ली में जो आज हुआ, स्पेन, आयरलैंड, और जर्मनी के किसानों ने वो नहीं किया, हालाँकि वो भी अन्नदाता ही थे और वो भी सरकार के खिलाफ अपनी माँग रख रहे थे।

किसानों के आंदोलन में खालिस्तानी कड़े और नारे का क्या काम?

सवाल उठता है कि जो लोग इसे पवित्र निशान साहिब बोल रहे हैं, वो ये बताएँ कि ये नारा और कड़ा किसका है? यह भी बताएँ कि एक किसान आंदोलन में मजहबी झंडा कहाँ से आया? उसे कैसे डिफेंड किया जाए कि तिरंगा फेंक कर मजहबी झंडा लगा दिया गया?

‘RSS नक्सलियों से भी ज्यादा खतरनाक, संघ समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं’: कॉन्ग्रेसी सांसद और CM भूपेश बघेल का ज्ञान

कॉन्ग्रेस के सीएम भूपेश ने कहा कि आरएसएस के समर्थक पैर छूकर गोली मार देते हैं। महात्मा गाँधी की हत्या कैसे किया गया था? पहले पैर छुए फिर उनके सीने में गोली मारी।

कैपिटल हिल के लिए छाती पीटने वाले दिल्ली के ‘दंगाइयों’ के लिए पीट रहे ताली: ट्रम्प की आलोचना करने वाले करेंगे राहुल-प्रियंका की निंदा?

कैपिटल हिल वाले अगर दंगाई थे तो दिल्ली के उपद्रवी संत कैसे हुए? ट्रम्प की आलोचना हो रही थी तो राहुल-प्रियंका की निंदा क्यों नहीं? ये दोहरा रवैया अपनाने वाले आज भी फेक न्यूज़ फैलाने में लगे हैं।

‘लाल किले पर लहरा रहा खालिस्तान का झंडा- ऐतिहासिक पल’: ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने मनाया ‘ब्लैक डे’

गणतंत्र दिवस पर लाल किले पर 'खालिस्तानी झंडा' फहराने को लेकर ऑल पाकिस्तान मुस्लिम लीग (APML) काफी खुश है। पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ द्वारा स्थापित पाकिस्तानी राजनीतिक पार्टी ने इसे 'ऐतिहासिक क्षण' बताया है।

वीडियो: जब दंगाई को किसी ने लाल किला पर तिरंगा लगाने दिया, और उसने फेंक दिया!

लाल किले पर एक आदमी सिखों का झंडा चढ़ाने खम्बे पर चढ़ा। जब एक आदमी ने उसकी ओर तिरंगा बढ़ाया तो उसने बेहद अपमानजनक तरीके से तिरंगे को दूर फेंक दिया।

देशी-विदेशी शराब से लदी मिली प्रदर्शनकारी किसानों की ट्रैक्टर: दिल्ली पुलिस ने किया सीज, देखें तस्वीरें

पुलिस ने शराब से भरे एक ट्रैक्टर को सीज किया है। सामने आए फोटो में देखा जा सकता है कि पूरा ट्रैक्टर शराब से भरा हुआ है। यानी कि शराब के नशे में ट्रैक्टरों को चलाया जा रहा है।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
386,000SubscribersSubscribe