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छोटे और नहीं दिखने वाले गुप्तांग से लेकर लड़कियों तक का खतना… 5 देशों के मुस्लिम एक मंच पर करेंगे 12 घंटों तक चर्चा

खतना की शिकार मुस्लिम महिलाओं को जीवन भर भयानक और दर्दनाक यातना से गुजरना पड़ता है। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इसको लेकर कहा था, ''यौन अंगों को काटना महिलाओं की गरिमा और सम्मान के खिलाफ है।'' बता दें कि भारत सहित कई देशों में महिला खतना प्रतिबंधित है।

मलेशियन इंटरनेशनल सर्कुमसीजन कॉन्फ्रेंस का आयोजन 25 और 26 फरवरी 2023 को आयोजित किया जाएगा। इसमें बच्चों एवं बच्चियों के खतना को लेकर चर्चा की जाएगी। इस कॉन्फ्रेंस में पाँच देशों के लोग हिस्सा लेंगे। इसमें छोटे और नहीं दिखने वाले शिश्न के हिस्से की चर्चा प्रमुखता से की जाएगी।

मलेशिया के पुत्राजय शहर के एक होटल में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में पाँच देश हिस्सा लेंगे। कॉन्फ्रेंस की बेवसाइट के अनुसार, सर्कुमसीजन यानी मुस्लिमों में प्रचलित खतना से संबंधित इस कॉन्फ्रेंस में म्यांमार, मलेशिया, जापान, कनाडा, इंडोनेशिया के लोगों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है।

बेवसाइट के अनुसार, यह कॉनफ्रेंस खतना को लेकर हुई खोज के बारे में चर्चा करना मुख्य मुद्दा है। इस पर महिला खतना पर चर्चा की जाएगी। इस पर चर्चा के लिए डॉक्टर हफातीन फैरोस बिंती तमादुन मलेशिया में महिला खतना को लेकर चर्चा करेंगी।

बता दें कि पुरूषों की अपेक्षा महिला खतना बेहद क्रूर माना जाता है। इसमें योनि के अगले हिस्से के चमड़े को काटकर निकाल दिया जाता है, ताकि मुस्लिम महिलाओं को यौन आनंद की अनुभूति ना हो। भारत में बोहरा समुदाय सहित इस्लामी देशों में यह प्रथा आज भी जारी है, जिसको लेकर दुनिया भर में इसकी आलोचना होती रहती है।

खतना की शिकार मुस्लिम महिलाओं को जीवन भर भयानक और दर्दनाक यातना से गुजरना पड़ता है। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने इसको लेकर कहा था, ”यौन अंगों को काटना महिलाओं की गरिमा और सम्मान के खिलाफ है।” बता दें कि भारत सहित कई देशों में महिला खतना प्रतिबंधित है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें खतना के महत्व पर चर्चा की जाएगी। छोटे और नहीं दिखने वाले पुरुष गुप्तांगों को खतना के जरिए उभारने पर चर्चा की जाएगी। Buried Penis एक प्रकार का डिस्फंक्शन है, जिसके कारण यौन आकांक्षा में कमी या असमर्थता हो जाती है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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