Thursday, July 25, 2024
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सेक्स पार्टी के लिए पादरियों को बच्चों की सप्लाई करती थीं नन, रेप के बदले देते थे पैसे: पीड़ित ने जर्मनी की कोर्ट में खोली पोल

पीड़ित ने बताया कि अगर उनमें से कोई भी लड़का चर्च के आदेशों की अवहेलना करता, तो उन्हें लाठी से पीटा जाता या उनके सिर को दीवार पर पटक दिया जाता। उन्होंने कहा कि एक ही समय में तीन पादरियों द्वारा उनके साथ बलात्कार किया गया था।

जर्मनी के एक ‘चिल्ड्रेन्स होम’ में काम करने वाली ईसाई नन पर ईसाई पादरियों, राजनेताओं और व्यापारियों को सेक्स पार्टी में बलात्कार करने के लिए बच्चे सप्लाई करने का आरोप लगा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जर्मनी के डार्मस्टैड में एक सोशल वेलफेयर कोर्ट (Social Welfare Court, Darmstadt) ने 63 साल के एक व्यक्ति को इस मामले में मुआवजा दिया है। उस व्यक्ति ने ही खुलासा किया कि किस तरह से ईसाई नन द्वारा उन्हें पार्टियों में पादरी और प्रभावशाली लोगों द्वारा यौन दुर्व्यवहार का शिकार बनाया गया। तब उनकी उम्र मात्र पाँच साल थी। पीड़ित ने बताया कि युवा लड़कों के साथ सेक्स करने की अनुमति देने के लिए इन प्रभावशाली पादरियों द्वारा ननों का भुगतान किया जाता था।

पीड़ित ने अपनी पहचान छिपाते हुए ने कहा कि 1960 और 70 के दशक में घर में अन्य लड़कों के साथ रहने के दौरान उसके साथ लगभग 1,000 बार बलात्कार किया गया था।

स्पीयर (Speyer) के बिशप, कार्ल-हेंज वीसमन (Karl-Heinz Wiesemann) ने भी सार्वजनिक रूप से बिशप रुडोल्फ मोत्ज़ेनबैकर (Bishop Rudolf Motzenbäcker), जिनकी 1998 में मृत्यु हो गई, का नाम लेते हुए उन्हें भी ऐसे जघन्य अपराध में शामिल बताया था। बिशप ने कहा कि इसके बाद से तीन और पीड़ित आगे आ चुके हैं।

पादरियों के लिए युवा लड़कों की ‘सेक्स पार्टी’ में दलाली करती थी नन्स

पीड़िता का शोषण पाँच साल की उम्र में तब किया गया, जब वह मार्च, 1963 में जर्मन शहर स्पीयर में ‘ऑर्डर ऑफ़ सिस्टर्स’ द्वारा चलाए जा रहे ‘द डिवाइन सेवियर’होम में शामिल हुए थे। पीड़ित ने कहा कि वह ननों द्वारा बिशप मोत्ज़ेनबैकर के अपार्टमेंट में यौन शोषण के लिए भेजे गए थे और इसका विरोध करने पर ईसाई पादरी उसे पीटते थे।

पीड़ित, जो स्पीयर कैथेड्रल में एक पादरी के सहायक थे, ने कहा कि उसे कंफ़ेसर के रूप में प्रीस्ट की भूमिका सौंपी गई। पीड़ित ने कहा कि चर्च में नन ‘दलाल’ की तरह काम करती थीं और और 07 से 14 साल के युवाओं को पादरी, स्थानीय राजनेताओं और व्यवसायियों के पास भेजा करते थे।

पीड़ित ने अपनी गवाही में अदालत से कहा, “एक कमरा था, जहाँ नन पुरुषों को ड्रिंक और खाना देती थीं और दूसरे कोने में बच्चों के साथ बलात्कार किया जाता था।” उन्होंने कहा कि ननों ने पैसा कमाया क्योंकि वहाँ मौजूद पुरुषों ने जमकर पैसा लुटाया।

पीड़ित ने अदालत के समक्ष कहा कि घरों पर बच्चों के साथ दुर्व्यवहार में नन्स की महत्वपूर्ण भूमिका थी, यहाँ तक ​​कि ‘सिस्टर्स’ खुद भी छोटे बच्चों का यौन शोषण करती थीं। वर्ष 2000 में ‘चिल्ड्रेन्स होम’ बंद कर दिया गया।

‘चर्च के आदेशों की अवहेलना करने पर होता था कई बार बलात्कार’

पीड़ित के अनुसार, अगर उनमें से कोई भी लड़का चर्च के आदेशों की अवहेलना करता, तो उन्हें लाठी से पीटा जाता या उनके सिर को दीवार पर पटक दिया जाता। उन्होंने कहा कि एक ही समय में तीन पादरियों द्वारा उनके साथ बलात्कार किया गया था।

पादरी के सहायक रहे पीड़ित ने अपनी व्यथा सुनते हुए कहा, “कभी-कभी मैं खून से सने कपड़ों में घर वापस चला जाता था, खून मेरे पैरों से टपक रहा होता था। सितंबर, 1972 में मेरे जाने से पहले, मेरे साथ एक हजार बार यौन दुर्व्यवहार किया गया था।”

कैथोलिक चर्च ने पीड़ित को 15,000 यूरो मुआवजे के साथ 10,000 यूरो थैरेपी का मूल्य पीड़ितों की पेंशन के रूप में भुगतान किया। डार्मस्टैड सामाजिक न्यायालय (Darmstadt Social Court) के न्यायाधीश एंड्रिया हेरमैन ने कहा, “दुर्व्यवहार के शिकार लोगों के लिए, कानूनी कार्रवाई करना काफी मनोवैज्ञानिक तनाव से जुड़ा हुआ है।”

हालाँकि, पीड़ित ने सवाल किया कि इस तरह के पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और अवसाद से पीड़ित होने के बाद इस पैसे का क्या उपयोग है। उन्होंने पूछा, “मेरी शादी टूट गई है और मेरी हड्डियाँ, यकृत और गुर्दे भी।”

2010 के बाद से, कैथोलिक चर्च में यौन शोषण के कई मामले सामने आए हैं। वर्ष 2018 में यौन दुर्व्यवहारों की आंतरिक जाँच में 1946 और 2014 के बीच 1,670 पादरियों और 3,677 पीड़ितों के साथ दुर्व्यवहार का खुलासा हुआ था।

दुनिया भर के चर्चों में बलात्कार और अन्य अपमानजनक घटनाओं के बार-बार होने वाले मामलों की एक खतरनाक प्रवृत्ति रही है। दुर्भाग्य से, भारत में इस ‘महामारी’ को लेकर कोई समाधान नहीं मिल सका है। ईसाई पादरी और चर्च, दुनिया भर के अधिकांश मामलों की तरह, गरीबों को निशाना बना रहे हैं, लेकिन मामले किसी का ध्यान नहीं जाते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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