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K9 Vajra, जोरावर टैंक और न्यूक्लियर जेनरेटर… PM मोदी ने किया हजीरा के डिफेंस प्लांट का दौरा: जानें ये जगह भारत के लिए क्यों है महत्वपूर्ण

प्रधानमंत्री मोदी के हजीरा दौरे में चर्चा का केंद्र बना 700 मेगावाट न्यूक्लियर स्टीम जनरेटर, जो भारत की परमाणु ऊर्जा और आत्मनिर्भरता की बड़ी ताकत माना जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार (5 जून 2026) को गुजरात के हजीरा स्थित लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के  मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने देश की रक्षा और रणनीतिक विनिर्माण क्षमता को मजबूत करने में भारतीय उद्योगों की बढ़ती भूमिका के बारे में बताया। यह दौरा उनके गुजरात दौरे का हिस्सा था और लगभग सात साल बाद उनका इस प्लांट का पहला दौरा था।

दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने हजीरा परिसर में विकसित की जा रही कई स्वदेशी तकनीकों और रक्षा प्लेटफॉर्मों का निरीक्षण किया। यह प्लांट आज भारत के सबसे महत्वपूर्ण भारी इंजीनियरिंग, रक्षा उत्पादन और रणनीतिक औद्योगिक निर्माण केंद्रों में शामिल हो चुका है।

प्रधानमंत्री ने कई घंटे प्लांट में बिताए और अधिकारियों से बातचीत करते हुए वहाँ तैयार हो रहे अत्याधुनिक उपकरणों और प्रणालियों को करीब से देखा।

PM मोदी ने शेयर की तस्वीरें

दौरे के कुछ ही समय बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तस्वीरें और जानकारी साझा की। उन्होंने भारत को आत्मनिर्भर बनाने में L&T की भूमिका की सराहना की।

प्रधानमंत्री ने लिखा, “आज दोपहर मैं हजीरा स्थित L&T परिसर गया। वहाँ विभिन्न क्षेत्रों में विकसित की जा रही कई नई और महत्वपूर्ण तकनीकों को देखा। रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को आगे बढ़ाने में L&T की भूमिका सराहनीय है।”

प्रधानमंत्री द्वारा साझा की गई तस्वीरों में एक तस्वीर ने सोशल मीडिया पर खास ध्यान खींचा। इस तस्वीर में वह हजीरा प्लांट में बने एक विशाल न्यूक्लियर स्टीम जनरेटर के पास खड़े दिखाई दे रहे थे।

यह तस्वीर इसलिए चर्चा में आई क्योंकि ऐसे स्टीम जनरेटर भारतीय उद्योग द्वारा बनाए जाने वाले सबसे जटिल और उन्नत उपकरणों में गिने जाते हैं और देश के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।

क्या होता है 700 मेगावाट का न्यूक्लियर स्टीम जनरेटर?

प्रधानमंत्री द्वारा साझा की गई तस्वीर में दिखा स्टीम जनरेटर भारत की परमाणु विनिर्माण यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जाता है। L&T ने वर्ष 2022 में हजीरा प्लांट में पहला स्वदेशी 700 मेगावाट न्यूक्लियर स्टीम जनरेटर तैयार किया था।

न्यूक्लियर स्टीम जनरेटर एक विशाल हीट एक्सचेंजर होता है, जिसका इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा प्लांट्स में किया जाता है। इसका मुख्य काम परमाणु रिएक्टर में पैदा होने वाली गर्मी को भाप में बदलना होता है, जिससे बिजली बनाई जाती है।

रिएक्टर के कोर में अत्यधिक गर्मी पैदा होती है। इस गर्मी को कूलेंट सिस्टम के जरिए स्टीम जनरेटर तक पहुँचाया जाता है। यहाँ यह गर्मी दूसरे सर्किट के पानी को दी जाती है, जिससे वह उच्च दबाव वाली भाप में बदल जाता है।

यही भाप बड़े टरबाइनों को चलाती है और टरबाइन जनरेटर के माध्यम से बिजली पैदा करती है। यदि स्टीम जनरेटर न हो तो परमाणु रिएक्टर में उत्पन्न गर्मी को प्रभावी तरीके से बिजली में नहीं बदला जा सकता।

हजीरा में तैयार किए जा रहे ये स्टीम जनरेटर भारत के स्वदेशी 700 मेगावाट प्रेसराइज्ड हेवी वाटर रिएक्टर (PHWR) के लिए बनाए गए हैं। भविष्य में भारत के परमाणु ऊर्जा विस्तार की योजनाओं में इन रिएक्टरों की अहम भूमिका होगी।

भारत के लिए यह निर्माण क्षमता क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत में ही इतने बड़े और मुश्किल परमाणु उपकरण बनाने की क्षमता कई कारणों से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानी जाती है।

पहला, इससे आत्मनिर्भर भारत की दिशा में सरकार की पहल को मजबूती मिलती है और महत्वपूर्ण परमाणु उपकरणों के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होती है।

दूसरा, इससे भारत नए परमाणु ऊर्जा संयंत्रों का निर्माण तेजी से कर सकता है और आयात या वैश्विक सप्लाई चेन में आने वाली बाधाओं से बच सकता है।

तीसरा, ऐसे उपकरणों का देश में निर्माण होने से उन्नत इंजीनियरिंग विशेषज्ञता विकसित होती है और हजारों कुशल रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।

भारत ने आने वाले दशकों में अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। बढ़ती बिजली माँग को पूरा करने और कार्बन उत्सर्जन कम करने की रणनीति में परमाणु ऊर्जा को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।

फिलहाल न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (NPCIL) देश के कई हिस्सों में स्वदेशी डिजाइन वाले 700 मेगावाट रिएक्टरों का निर्माण कर रहा है। इन परियोजनाओं के लिए L&T और BHEL जैसी कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे स्टीम जनरेटर बेहद महत्वपूर्ण हैं।

L&T की हेवी इंजीनियरिंग इकाई पहले ही NPCIL की कई परियोजनाओं के लिए निर्धारित समय से पहले कई 700 मेगावाट स्टीम जनरेटर भेज चुकी है। कंपनी इनका निर्माण हजीरा और वडोदरा स्थित अपने आधुनिक संयंत्रों में करती है।

भारत के परमाणु विस्तार को मिल रहा समर्थन

प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान चर्चा में आया यह स्टीम जनरेटर भारत की दीर्घकालिक परमाणु ऊर्जा योजनाओं का हिस्सा है। NPCIL के अनुसार, इन उपकरणों का सफल निर्माण और समय पर आपूर्ति भारत को वर्ष 2047 तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन में बड़ा विस्तार करने के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे अत्याधुनिक परमाणु उपकरणों का स्वदेशी निर्माण भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में खड़ा करता है जिनके पास उन्नत परमाणु विनिर्माण क्षमता मौजूद है।

दौरे में रक्षा उपकरणों ने भी खींचा ध्यान

हालाँकि न्यूक्लियर स्टीम जनरेटर सबसे ज्यादा चर्चा में रहा लेकिन प्रधानमंत्री ने इसके अलावा भी कई महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों का निरीक्षण किया। हजीरा प्लांट  भारत में निजी क्षेत्र द्वारा चलाया जा रहा ट्रैक्ड आर्मर्ड वाहनों का सबसे बड़ा निर्माण केंद्र माना जाता है।

भारतीय सेना के लिए K-9 वज्र स्वचालित तोप प्रणाली के निर्माण में इसकी बड़ी भूमिका रही है। L&T अब तक भारतीय सेना को 100 K-9 वज्र तोपें सौंप चुकी है। इनमें से कई तोपें पूर्वी लद्दाख में लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) के पास तैनात हैं। सरकार ने 100 अतिरिक्त K-9 वज्र तोपों की खरीद को भी मंजूरी दे दी है।

हजीरा प्लांट तब भी राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आया था जब यहाँ स्वदेशी जोरावर लाइट टैंक को पहली बार पेश किया गया था। केवल 19 महीनों में विकसित इस टैंक को विशेष रूप से हिमालयी क्षेत्रों में ऊँचाई वाले इलाकों में युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है और वर्तमान में इसका परीक्षण चल रहा है।

इसके अलावा, भारतीय सेना की फ्यूचरिस्टिक इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (FICV) परियोजना में भी L&T की महत्वपूर्ण भागीदारी है। इस परियोजना का उद्देश्य सेना के पुराने BMP-2 वाहनों की जगह नए आधुनिक वाहन लाना है।

प्रधानमंत्री मोदी का हजीरा दौरा इस बात का संकेत है कि भारत का औद्योगिक ढाँचा अब देश की रक्षा जरूरतों और महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा रहा है।

उन्नत तोप प्रणालियों, स्वदेशी टैंकों और अत्याधुनिक न्यूक्लियर स्टीम जनरेटर जैसे उपकरणों का निर्माण करने वाला हजीरा प्लांट उन क्षेत्रों में भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुका है, जहाँ कभी देश को बड़े पैमाने पर विदेशी तकनीक और आयात पर निर्भर रहना पड़ता था।

(मूल रूप से ये रिपोर्ट अंग्रेजी में प्रकाशित है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।)

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Shriti Sagar
Shriti Sagar
Journalist

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