Wednesday, May 18, 2022
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अफगान राष्ट्रपति आवास में लोग पढ़ रहे थे नमाज, पास में ही गिरे रॉकेट

अफगानिस्तान में जब से अमेरिकी फौजों की वापसी शुरू हुई है, वहाँ पर तालिबान ने बड़े हमले करने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में तालिबान ने दावा किया था कि उसने देश के 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर लिया है।

अफगानिस्तान की राजधानी काबुल स्थित राष्ट्रपति भवन के करीब आज (मंगलवार,20 जुलाई 2021) सुबह 8 बजे रॉकेट से हमला किए जाने की खबर सामने आई है। अधिकारियों ने बताया है कि हमला बकरीद की नमाज के दौरान किया गया। हालाँकि, इसके पीछे किस संगठन का हाथ है यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है।

काबुल के बाग-ए-अली मरदा, चमन ए हुजुरी और जिला पुलिस एरिया में यह हमला किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों मिसाइलों को कार के जरिए दागा गया था। अफगान गृह मंत्रालय के प्रवक्ता मीरवाइज स्टेनकजई ने इन हमलों की पुष्टि की और कहा कि पैलेस के बाहर तीन रॉकेट्स के जरिए हमले किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ है। घटना की जाँच की जा रही है।

टोलो न्यूज द्वारा शेयर किए गए वीडियो में देखा जा सकता है कि अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी की उपस्थिति में महल के कंपाउंड में नमाज चल रही थी। इसी दौरान ये रॉकेट ब्लास्ट हुए। रॉकेट हमलों के बावजूद नमाज जारी रखा गया। नमाज खत्म होने के बाद राष्ट्रपति गनी ने एक खुले मंच से भाषण दिया, जिसे स्थानीय मीडिया ने कवर किया।

उन्होंने कहा, “अफगानिस्तान का भविष्य अफगानों द्वारा निर्धारित किया जाता है। अफगानों को अब यह साबित करना चाहिए कि वे एकजुट हैं। अगले तीन से छह महीने के लिए लोगों का कड़ा रुख स्थिति को बदल देगा। क्या तालिबान के पास अफ़गानों, ख़ासकर महिलाओं के प्रति कोई ‘सकारात्मक प्रतिक्रिया’ है?”

गौरतलब है कि अफगानिस्तान में जब से अमेरिकी फौजों की वापसी शुरू हुई है, वहाँ पर तालिबान ने बड़े हमले करने शुरू कर दिए हैं। हाल ही में तालिबान ने दावा किया था कि उसने अफगानिस्तान के 85 फीसदी हिस्से पर कब्जा कर लिया है। देश के कई प्रांतों की राजधानी को तालिबान ने घेर रखा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, तालिबान ने पिछले कुछ वर्षों के विपरीत इस साल ईद पर संघर्ष विराम की घोषणा नहीं की है। अफगान सरकार और तालिबान बीच कतर के दोहा में शांति समझौता विफल होने के बाद सोमवार को काबुल में 15 राजनयिक मिशनों और नाटो के प्रतिनिधि ने तालिबान से हमले बंद करने को कहा था। गौरतलब है कि हाल ही रॉयटर्स के फोटो जर्नलिस्ट दानिश सिद्दीकी की हत्या भी अफगानिस्तान में ही हुई थी। वह अफगान बलों और तालिबान के बीच संघर्ष को कवर कर रहे थे।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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