रूस ने यूक्रेन पर ओरेश्निक (Oreshnik) हाइपरसोनिक मिसाइल और ड्रोन से कीव समेत कई शहरों पर भीषण हमले किए हैं। रविवार रात हुए इन भीषण हमलों में रिहायशी इलाकों और नागरिक बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया गया। इस हमले से भारी तबाही मची है और कई लोगों की मौत हो गई है। ओरेश्विक मिसाइल परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम है जो IRBM (Intermediate-Range Ballistic Missile) यानी मध्यम दूरी की बैलेस्टिक मिसाइल है।
भारत की बात करें तो यहाँ अग्नि 4 इस तरह की मिसाइल है, वहीं अग्नि-5 ICBM (Intercontinental Ballistic Missile) यानी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल है, जो लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल है।
रूसी ओरेश्रिक मिसाइल की खासियत
रूस का ओरेश्निक (Oreshnik) हाइपरसोनिक क्षमता वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे रूस ने 2024 में पहली बार सार्वजनिक रूप से इस्तेमाल करने का दावा किया था। यह अपनी तेज गति, कई वारहेड ले जाने की क्षमता यानी एक साथ कई लक्ष्यों को साधना और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में माहिर है। रूसी भाषा में ओरेश्निक शब्द का मतलब होता है- हेजल ट्री यानी जब मिसाइल के कई वॉरहेड रोशनी की लकीरों की तरह गिरते हैं, जो ये पेड़ की तरह दिखते हैं।
रूस का कहना है कि यह मिसाइल ध्वनि की गति से 10 गुणा तेज चल सकती है। लंबी दूरी तक हमला कर सकती है और बीच में जरूरत के मुताबिक रास्ता बदल सकती है, जिससे इसे ट्रैक करना और रोकना काफी मुश्किल होता है। यह दोनों तरह के हथियारों यानी परमाणु हथियारों के साथ-साथ पारंपरिक हथियारों को ले जाने में सक्षम है।
ओरेश्निक एक न्यूक्लियर हथियार भी है। इसका मतलब है कि इसे न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने के लिए डिजाइन किया गया है, इसलिए इसकी मारक क्षमता एक न्यूक्लियर हथियार के बराबर है, भले ही उसमें पारंपरिक वॉरहेड लगा हो।
इसकी रफ्तार करीब 1000–16000 किमी प्रति घंटा (620 से 990 मील) है यानी इतनी तेज रफ्तार की वजह से सामान्य एयर डिफेंस सिस्टम को प्रतिक्रिया का बहुत कम समय मिलता है, इसलिए इसे इंटरसेप्ट करना काफी मुश्किल है।
रूस ने अब तक तीन बार यूक्रेन युद्ध के दौरान इसका इस्तेमाल किया है। पहली बार नवंबर 2024 में निप्रो शहर पर हमला किया गया। दूसरी बार जनवरी 2026 में पॉलेंड के बॉर्डर के नजदीक के पश्चिमी लवीव क्षेत्र में किया गया। तीसरी बार 24 मई 2026 को इसका इस्तेमाल राजधानी कीव में किया गया है।
अमेरिका का मानना है कि ओरेश्निक मिसाइल 2008 में पहली बार डेवलप की गई ‘RS-26 रुबेज’ इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) पर आधारित है। यह शक्तिशाली हथियार जमीन के नीचे तीन, चार या उससे भी ज्यादा मंजिल नीचे बने बंकरों को तबाह करने में सक्षम है। 30 दिसंबर, 2025 को रूस ने बेलारूस में ओरेश्निक सिस्टम तैनात किया था, जिससे यूरोप के किसी भी देश को टारगेट किया जा सकता है।
यूक्रेन पर तीन ओरेश्निक हमले के तीन संदेश
रूस ने इसका इस्तेमाल यूरोप और दुनिया को मैसेज देने के लिए किया है। एक तरह से हाइपरसोनिक मिसाइल से हमला शक्ति प्रदर्शन भी है। पहली बार इस मिसाइल से हमला कर रूस ने अमेरिका को संदेश दिया था, क्योंकि कुछ दिनों पहले ही पूर्व डेमोक्रेटिक राष्ट्रपति जो बाइडेन के नेतृत्व वाली अमेरिकी सरकार ने यूक्रेन को रूस में टारगेट पर हमला करने के लिए आर्मी टैक्टिकल मिसाइल सिस्टम (ATACMS) का इस्तेमाल करने की अनुमति दी। ये अमेरिका ने ही यूक्रेन को दिए थे और इसके इसके इस्तेमाल से पहले अमेरिका की मंजूरी जरूरी है।
दूसरी बार रूस ने यूरोप और नाटो को संदेश देने के लिए हमला किया। यही वजह है कि हमला नाटो के सदस्य पॉलेंड के बॉर्डर के नजदीक के पश्चिमी लवीव क्षेत्र में किया गया। दरअसल नाटो ने यूक्रेन को मदद देने का ऐलान किया था। दरअसल इस युद्ध की शुरुआत ही यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की की नाटो में शामिल होने की जिद की वजह से शुरू हुई थी। रूस किसी भी हाल में अपने पड़ोसी यूक्रेन को नाटो में शामिल होने की अनुमति देने को तैयार नहीं था।
तीसरा हमला दरअसल यूक्रेन की राजधानी पर करके रूस ने साफ कर दिया है कि उसे कोई नहीं रोक सकता। यूक्रेन और पश्चिमी देशों को संदेश भी दिया है कि रूस के पास उन्नत मिसाइल तकनीक अभी भी मौजूद हैं।
भारत के पास है अग्नि-V
रूस के इस कदम के बाद भारत की मारक क्षमता पर भी दुनिया की नजरें टिक गई हैं। भारत ने हाल ही में ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से MIRV तकनीक से लैस एडवांस्ड अग्नि मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। भारत के रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित अग्नि-V एक इंटरकॉन्टिनेंटली बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) है, जिसकी मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर से भी ज्यादा है। यानी पूरा एशिया, चीन और यूरोप का एक बड़ा हिस्सा इसकी जद में आता है।
भारत ने पिछले कुछ समय में ‘मिशन दिव्यास्त्र’ के तहत इसके जो परीक्षण किए हैं, उसने भारत को दुनिया के उन चुनिंदा 6-7 देशों की लीग में खड़ा कर दिया है जिनके पास इतनी लंबी दूरी की मारक क्षमता और MIRV तकनीक है।
अग्नि-5 भारत की सतह से सतह पर मार करने वाली लंबी दूरी की सबसे उन्नत मिसाइलों में शुमार होता है। इसे भारत के एकीकृत निर्देशित मिसाइल विकास कार्यक्रम यानी आईजीएमडीपी के तहत विकसित किया गया है। ये एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक आसानी से वार कर सकते हैं। इन्हें दुनिया की सबसे शक्तिशाली और खतरनाक हथियारों में गिना जाता है। ये हवा से 10 गुणा से ज्यादा तेज गति से पृथ्वी के सब-ऑर्बिटल (sub-orbital) मार्ग से आगे बढ़ता है, जिससे दुश्मन देश तुरंत में भाप नहीं पाते। भारत की अग्नि-5 ऐसी ही मिसाइल है।
क्या अग्नि-V भी हाइपरसोनिक है?
रक्षा क्षेत्र से जुड़े सूत्रों और विशेषज्ञों का कहना है कि अग्नि-V की रफ्तार भी मैक 24 (लगभग 29,400 किमी/घंटा) तक पहुँच सकती है, जो इसे हाइपरसोनिक श्रेणी की मिसाइलों से भी तेज बनाती है। हालाँकि भारत सरकार ने इसकी सटीक टॉप स्पीड और इसकी कुछ अन्य घातक क्षमताओं को लेकर हमेशा चुप्पी साधे रखी है। भारत का यह ‘साइलेंट’ रवैया ही इसे चीन और पाकिस्तान जैसे पड़ोसियों के लिए सबसे रहस्यमयी और घातक हथियार बनाता है।
अग्नि-5 भारत को अमेरिका, रूस, चीन, फ्राँस जैसे चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल में करता है, जिनके पास IRBM तकनीक वाली आधुनिकतम मिसाइल है। इसे किसी भी जगह से यानी जहाजों या पनडुब्बियों से किसी भी लक्ष्य पर हमला करने के लिए भेजा जा सकता है। लक्ष्य जमीन पर हो या समुद्र में। यह जमीन के अंदर तीन या चार मंजिला मकान के अंदर बने बंकर को भी नष्ट कर सकता है।
ओरेश्निक बनाम अग्नि-V, दो सबसे बड़े ब्रह्मास्त्र
यदि हम रूस की ओरेश्निक और भारत की अग्नि-V मिसाइल की आमने-सामने तुलना करें, तो दोनों ही मिसाइलें अपनी-अपनी जगह पर दुनिया को तबाह करने की ताकत रखती हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य और उनकी खूबियाँ अलग हैं। रूस की ओरेश्निक एक इंटरमीडिएट-रेंज (मध्यम दूरी) की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसकी अनुमानित रेंज 3,500 से 5,500 किलोमीटर के बीच है।
वहीं दूसरी ओर भारत की अग्नि-V एक शुद्ध इंटरकॉन्टिनेंटल (अंतरमहाद्वीपीय) बैलिस्टिक मिसाइल है, जो आसानी से 5,000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय कर सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का तो यह भी मानना है कि अग्नि-V की वास्तविक क्षमता 8,000 किलोमीटर तक की हो सकती है, जिसे भारत ने आधिकारिक तौर पर उजागर नहीं किया है।
रफ्तार और मारक क्षमता के मामले में दोनों ही मिसाइलें दुश्मन के पसीने छुड़ाने के लिए काफी हैं। ओरेश्निक जहां मैक 10 की रफ्तार से हमला करती है, वहीं अग्नि-V अपनी उड़ान के आखिरी चरण में मैक 20 से मैक 24 की अविश्वसनीय गति हासिल कर सकती है। हालाँकि, ओरेश्निक को पूरी तरह हाइपरसोनिक क्रूज या ग्लाइड व्हीकल के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन अग्नि-V भी अपनी री-एंट्री (अंतरिक्ष से वापस धरती के वायुमंडल में आते समय) के दौरान इतनी तेज होती है कि दुनिया का कोई भी मिसाइल डिफेंस सिस्टम, चाहे वह अमेरिका का थाड (THAAD) हो या चीन का HQ-19, इसे बीच में नहीं गिरा सकता।
इन दोनों मिसाइलों की सबसे बड़ी समानता इनकी ‘MIRV’ तकनीक है, लेकिन यहाँ भी इनका इस्तेमाल अलग तरीके से देखा गया है। यूक्रेन युद्ध में ओरेश्निक ने एक ही मिसाइल से कई सब-म्यूनिशन्स (छोटे बमों) को एक साथ छोड़कर पूरी दुनिया को हैरान कर दिया था। भारत की अग्नि-V भी इसी तकनीक से लैस है, जो एक ही लॉन्च में अलग-अलग शहरों या सैन्य ठिकानों को एक साथ निशाना बना सकती है।
सबसे बड़ा अंतर यह है कि रूस जहाँ युद्ध के मैदान में अपनी मिसाइल का लाइव टेस्ट करके दुनिया को डरा रहा है, वहीं भारत ने अपनी तकनीक को बेहद गोपनीय और शांत रखा है, ताकि जरूरत पड़ने पर यह दुश्मन के लिए एक ऐसा अप्रत्याशित झटका साबित हो जिसका कोई तोड़ न हो।


