Thursday, July 25, 2024
Homeरिपोर्टअंतरराष्ट्रीय102 बेटे-बेटियाँ और 568 पोते-पोतियों के बाद युगांडा के मूसा ने लिया थमने का...

102 बेटे-बेटियाँ और 568 पोते-पोतियों के बाद युगांडा के मूसा ने लिया थमने का फैसला: 12 बीवियों को दी गर्भ-निरोधक के इस्तेमाल की हिदायत

युगांडा के जिस लुसाका शहर में मूसा रहते हैं, वहाँ कई विवाह करने की इजाजत है। मूसा एक के बाद एक विवाह करते गए। अब उनकी 12 बीवियाँ हैं।

12 बीवियों, 102 बेटे-बेटियों और 568 पोते-पोतियों वाले युगाँडा के किसान मूसा हसाहया ने अब अपने परिवार को और बड़ा नहीं करने का फैसला किया है। मूसा ने अपनी बीवियों को गर्भनिरोध‍क दवाएँ इस्तेमाल करने की हिदायत दी है। मूसा पेशे से किसान हैं और इतने बड़े परिवार के लिए रोजमर्रा का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। बढ़ते परिवार के साथ उनकी आमदनी लगातार कम हो रही है।

युगांडा के जिस लुसाका शहर में मूसा रहते हैं, वहाँ कई विवाह करने की इजाजत है। मूसा एक के बाद एक विवाह करते गए। अब उनकी 12 बीवियाँ हैं। परिवार बढ़ता गया साथ ही बढ़ते गए परिवार के खर्च। द सन की रिपोर्ट के अनुसार 67 वर्षीय मूसा ने अपनी पत्नियों से गर्भनिरोधक दवाओं का इस्‍तेमाल करने के लिए कहा है। मूसा के लिए परिवार के हर सदस्य के लिए पेट भर खाने का जुगाड़ करना भी मुश्किल हो रहा है। मूसा की खराब आर्थिक हालत को देखकर उसकी 2 बीवियाँ उसे छोड़कर जा चुकी हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, जब उनसे कई विवाह के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि एक मर्द कैसे एक ही बीवी से संतुष्ट रह सकता है? मूसा ने कहा कि उसकी सभी बीवियाँ एक ही घर में रहती हैं, ताकि वह उन पर नजर रख सके और उसकी पत्नियाँ दूसरे मर्दों के साथ संबंध नहीं बना सके। जूलैका मूसा की सबसे छोटी पत्‍नी है। जूलैका ने 11 बच्‍चों को जन्म दिया है और अब वह गर्भवती नहीं होना चाहती। इसलिए जूलैका ने गर्भनिरोधक गोली का इस्‍तेमाल करना शुरू कर दिया है।

मूसा की सबसे बड़ी संतान (बेटा) अपनी सबसे छोटी माँ से 21 साल बड़ा है। मूसा के सबसे छोटे बेटे की उम्र 6 साल है। परिवार के खराब आर्थिक हालत की एक वजह यह भी है कि अपने खराब स्वास्थ्य की वजह से मूसा पहले की तरह मेहनत नहीं कर पाते। खराब आर्थिक स्थिति के कारण मूसा अब 700 से ज्यादा सदस्यों वाले इस परिवार को और नहीं बढ़ाना चाहते।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘तुमलोग वापस भारत भागो’: कनाडा में अब सांसद को ही धमकी दे रहा खालिस्तानी पन्नू, हिन्दू मंदिर पर हमले का विरोध करने पर भड़का

आर्य ने कहा है कि हमारे कनाडाई चार्टर ऑफ राइट्स में दी गई स्वतंत्रता का गलत इस्तेमाल करते हुए खालिस्तानी कनाडा की धरती में जहर बोते हुए इसे गंदा कर रहे हैं।

मुजफ्फरनगर में नेम-प्लेट लगाने वाले आदेश के समर्थन में काँवड़िए, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बोले – ‘हमारा तो धर्म भ्रष्ट हो गया...

एक कावँड़िए ने कहा कि अगर नेम-प्लेट होता तो कम से कम ये तो साफ हो जाता कि जो भोजन वो कर रहे हैं, वो शाका हारी है या माँसाहारी।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -