गर्मी में AC (एसी) की खपत काफी बढ़ गई है। इस बीच कई जगहों पर एसी में धमाके की खबरे भी सामने आ रही हैं। इन धमाकों के पीछे कहीं न कही चीन का हाथ हो सकता है। ऐसा इसीलिए क्योंकि अब एसी में चायनीज गैसें भरी जा रही हैं। ये सस्ती होती हैं इसलिए मैकेनिक इसका इस्तेमाल धड़ल्ले से कर रहे हैं। घर के लोगों को पता भी नहीं होता कि उन्होंने एसी में जो गैस भरवाई है, वह उनके विनाश का कारण बन सकता है।
दरअसल आजकल एसी में R-32 गैस का इस्तेमाल किया जा रहा है। पहले R-22, R-410 जैसी गैंसें इस्तेमाल होती थी, जो कम ज्वलनशील (बहुत आसानी से आग पकड़ लेने वाली) थी। हालाँकि R- 32 पर्यावरण के ख्याल से बेहतर माना जाता है, लेकिन ये ज्वलनशील गैस है। ऐसी ही हालत R-152a को लेकर है। इस गैस का आयात बड़ी मात्रा में चीन से हो रहा है। अनुमान के मुताबिक, 2024 में अप्रैल के महीने तक करीब 5000 टन की भारी मात्रा इसका आयात हुआ था। ये सारे गैस मुख्य रूप से चीन से आते हैं। इससे एसी में ओवरहीटिंग की दिक्कत आती है।
सुरक्षित R-22 की बजाय सेकेंडरी रिफिलर R-152a को मिलाकर इस्तेमाल किया जा रहा है। ये काफी ज्वलनशील हैं। इसलिए एसी में इसके किसी भी तरह के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा हुआ है। यानी अकेले या मिश्रण के तौर पर R-152a का इस्तेमाल भारत में नहीं किया जा सकता। इसका इस्तेमाल हेयर स्प्रे और डिओडरेंट में किया जाता है। इतना ही नहीं ये पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी काफी खतरनाक है। क्योंकि इसके जलने से कार्बन मोनोऑक्साइड और हाईड्रोजन फ्लोराइड जैसे गैस निकलते हैं। इसलिए R-152a जैसे रेफ्रिजिरेंट के इस्तेमाल की वजह से एसी में विस्फोट की घटनाएँ बढ़ गई हैं।
दिल्ली, नोएडा समेत कई जगहों पर एसी में हुआ धमाका
मई 2026 में दिल्ली में घटी घटनाओं ने इस ओर लोगों का ध्यान खींचा। दिल्ली के हौज खास में रिटायर IAS अधिकारी धनेन्द्र कुमार के घर में एसी में आग लग गई, जिसमें झुलसकर उनकी मौत हो गई। उनका बेटा भी इसकी वजह से गंभीर रूप से जल गया। ऐसे ही एक मामले में राजधानी के विवेक विहार में हुए एसी ब्लास्ट में एक ही परिवार के 5 लोगों की जान चली गई।
इसी तरह दिल्ली के शाहदरा इलाके में 3 मई 2026 को AC फटने से आग लग गई, जिसमें 9 लोगों की जान चली गई। ग्रेटर नोएडा में भी AC फटने की घटना से घर का पूरा सामान जल गया। अप्रैल में ग्रेटर नोएडा में ही AC फटने की 6 घटनाएँ हो चुकी हैं। इस मामले में अग्निशमन विभाग का कहना है कि एसी के गैस रिसाव के कारण ये हादसा हुआ। हो सकता है कि एसी में नकली रेफ्रिजरेंट गैसों का इस्तेमाल हुआ हो।
कैसे चायनीज गैस बनी संकट, सरकार ने उठाए कदम
इन हादसों ने हमें सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि आखिर किस तरह इससे बचा जाए। सरकार को इस चायनीज गैस R-152a के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने की जरूरत है। वर्तमान में यह गैस सीधे तौर पर प्रतिबंधित नहीं है, लेकिन भारत सरकार के विदेश व्यापार महानिदेशक ने इसके आयात को ‘प्रतिबंधित’ श्रेणी में रखा है। R-152a को आयात करने के लिए डीजीएफटी से वैध लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। सुरक्षा और दुरुपयोग को रोकने के लिए डीजीएफटी और सरकार इस बात पर जोर दे रहे हैं कि आयात केवल ‘वास्तविक औद्योगिक उपयोग’ तक ही सीमित हो, ताकि यह गैस खुले बाजार में न बिके।
विशेषज्ञों और सुरक्षा एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि नकली या मिलावटी गैस बेची गई है, जो अत्यधिक ज्वलनशील कैमिकल (जैसे R40/मिथाइल क्लोराइड) पाए गए। ऐसी गैसें एसी के डिजाइन के अनुरूप नहीं होतीं। यदि सिस्टम में ऐसी गैस भर दी जाए जो मूल डिजाइन से अधिक ज्वलनशील हो, तो लीकेज की स्थिति में स्पार्क मिलने पर आग लग सकती है। इससे विस्फोट और कंप्रेसर फेल होने का खतरा भी बढ़ जाता है।
मिलावटी गैसों के खिलाफ भी कार्रवाई सरकार कर रही है। लोगों को भी इसको लेकर जागरुक करने की जरूरत है। भारत में बिकने वाले अधिकांश एसी और रेफ्रिजरेंट गैसों की सप्लाई चेन में चीन की अहम भूमिका है। चीन से नकली, मिलावटी और गलत लेबल लगी हुई या अवैध तरीके से आई खतरनाक गैस लोगों की जान पर बन आई है।


