Sunday, April 14, 2024
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अर्नब के खिलाफ सैकड़ों FIR की एक जैसी भाषा पर कोर्ट ने सिब्बल से किया सवाल, कॉन्ग्रेस नेता ने माना- अधिकतर फोटोकॉपी

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश शाह ने जब कपिल सिब्बल से पूछा- अर्नब के ख़िलाफ दायर सैकड़ों एफआईआर के शब्द एक जैसे क्यों हैं? तो इसपर कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता सिब्बल को शर्मसार होना पड़ा और उन्हें मानना पड़ा कि अधिकतर एफआईआर फोटोकॉपी हैं।

पालघर मामले में सोनिया गाँधी पर सवाल उठाने के बाद रिपब्लिक टीवी के एंकर अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ अलग-अलग राज्यों में दर्ज हुई सैकड़ों FIR को रद्द करने की याचिका पर कल (मई 11, 2020) कोर्ट में सुनवाई हुई।

अर्नब गोस्वामी द्वारा दायर इस याचिका में माँग की गई कि कॉन्ग्रेस ने उनके ख़िलाफ़ जो कई सारी एफआईआर करवाई हैं उन्हें रद्द किया जाए। इस बीच सुप्रीम कोर्ट की नजर सभी एफआईआर पर गई और कोर्ट ने हैरानी से सवाल पूछा कि आखिर गोस्वामी के ख़िलाफ़ दर्ज सभी एफआईआर की भाषा एक जैसी क्यों है?

सुनवाई के दौरान न्यायाधीश शाह ने जब कपिल सिब्बल से पूछा- अर्नब के ख़िलाफ दायर सैकड़ों एफआईआर के शब्द एक जैसे क्यों हैं? तो इसपर कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता सिब्बल को शर्मसार होना पड़ा और उन्हें मानना पड़ा कि अधिकतर एफआईआर फोटोकॉपी हैं।

इस बीच सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने मुंबई पुलिस पर निशाना साधा। उन्होंने अपनी राय रखते हुए कहा, “ये एक ऐसा मामला है जहाँ पुलिस का व्यवहार अनापेक्षित रहा और अगर पहली नजर में ये साबित होता है तो इस मामले में किसी स्वतंत्र जाँच एजेंसी से जाँच कराने की आवश्यकता है।”

तुषार मेहता ने इस मामले में आगे अपनी बात रखते हुए कहा कि अगर ये मामला स्वतंत्र एजेंसी द्वारा संभाला जाता है तो एजेंसी को खुद पर यकीन दिलाने की जरूरत नहीं पड़ेगी और आरोपित भी नहीं कह पाएगा कि उसका शोषण किया गया।

अर्नब के ख़िलाफ़ ‘जाँच’ नहीं ‘प्रतिशोध’ चाहती हैं कॉन्ग्रेस

इस सुनवाई में अर्नब गोस्वामी के वकील हरीश साल्वे ने दावा किया कि ये एक ऐसा मामला है जहाँ कोई राजनैतिक पार्टी एक पत्रकार पर निशाना साध रही है। उन्होंने शिकायतों पर गौर कराते हुए कहा कि हर एफआईआर उसी पार्टी के सदस्यों ने दर्ज करवाई है, जिसे केंद्र सरकार से परेशानी है और जो पत्रकार को सबक सिखाना चाहते थे।

उन्होंने सुनवाई में बेंच के आगे अपना पक्ष रखते हुए कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया कि इन केसों के जरिए कॉन्ग्रेस पार्टी केवल एक अप्रिय आवाज को दबाना चाहती है। इस बात में कोई संदेह नहीं है कि यह मामला केवल अर्नब को लेकर है। जिसका उद्देश्य जाँच के दौरान बचकाने सवाल पूछकर अर्नब को सबक सिखाना है। ये सब केवल अर्नब और उनके प्रोफेशन को एक पाठ सिखाने के लिए है कि हम जो कर रहे हैं, वह उनके अनुसार गलत है।

सबसे हैरानी की बात इस सुनवाई में ये निकलकर सामने आई कि कपिल सिब्बल ने कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाए जाने को ‘साम्प्रदायिकता’ बताया और जब हरीश सालवे ने कहा कि उन्हें मामले में जाँच करवाने में कोई आपत्ति नहीं है अगर मामला सीबीआई को दिया जाए। तो उन्होंने आपत्ति जताते हुए जवाब में ये कहा कि सीबीआई के हाथ में मामला जाने का मतलब है तुम्हारे हाथ में मामला जाना।

इस अजीबोगरीब रिप्लाई को सुनने के बाद हरीश साल्वे ने दो टूक कहा कि कपिल सिब्बल का बयान साबित करता है कि ये पूरा मामला पॉलिटिकली मोटिवेटिड है और वे चाहते हैं सिर्फ इस मामले में वही जाँच करें।

गौरतलब है कि पिछले दिनों अर्नब पर दायर कई प्राथमिकियों के मद्देनजर मुंबई पुलिस ने उनसे 12 घंटे पूछताछ की थी। बाद में मालूम चला कि जिस पुलिस अधिकारी ने उनसे पूछताछ की वो कोरोना पॉजिटिव पाया गया। इस संबंध में हरीश साल्वे ने कोर्ट को सूचित भी किया

वहीं अर्नब गोस्वामी ने इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग करते हुए कोर्ट को कहा ये मामला केंद्र और राज्य की समस्या है और मुझे इसका हिस्सा बना दिया गया है।”अर्नब ने कहा, “बेशक मैं मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट जा सकता हूँ, मेरा अनुरोध ये है कि सीबीआई मामले में जाँच करें और रिपोर्ट फाइल करे।”

बता दें, हाल ही में रजा अकादमी द्वारा दायर एफआईआर में गोस्वामी को बांद्रा में मस्जिद के पास इकट्ठा प्रवासियों की भीड़ के मामले में साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने का आरोपित बनाया गया है और कपिल सिब्बल रजा अकादमी की ओर से उनके वकील हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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