Wednesday, April 24, 2024
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अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ ईसाई संगठन ने भी दर्ज कराई FIR: ‘मोमबत्ती गैंग’ और ‘पादरी’ जैसे शब्दों पर आपत्ति

अर्नब गोस्वामी पर हमले के आरोप में गिरफ़्तार दोनों आरोपितों ने बताया है कि वो लगभग एक दशक से भी ज्यादा से 'यूथ कॉन्ग्रेस' से जुड़े हुए हैं। अरुण बोराडे और प्रतीक मिश्रा को गणपतराव कदम मार्ग से गिरफ़्तार किया गया था। दोनों को गोस्वामी के सिक्योरिटी गार्ड्स ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया था।

पंजाब के लुधियाना में ‘क्रिश्चियन यूनाइटेड फेडरेशन’ ने अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई है। उसने कहा है कि अर्नब ने ईसाइयों की भावनाओं को ठेस पहुँचाया। फेडरेशन ने आरोप लगाया है कि अर्नब ने ‘मोमबत्ती गैंग’ और ‘पादरी’ जैसे शब्दों का प्रयोग किया। इससे ईसाइयों की भावनाओं को ठेस पहुँची है।

फेडरेशन के अध्यक्ष अल्बर्ट दुआ ने इन बयानों के लिए अर्नब की निंदा की। सोनिया गाँधी मामले में अर्नब पहले ही घिरे हुए हैं।

FIR दर्ज कराने से बाज नहीं आ रही कॉन्ग्रेस

रिपब्लिक टीवी के संस्थापक-संपादक अर्नब गोस्वामी को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बावजूद उनके ख़िलाफ़ कई और एफआईआर दर्ज किए गए हैं। कॉन्ग्रेस नेताओं ने अलग-अलग जगहों पर सोनिया गाँधी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के आरोप में ये एफआईआर दर्ज कराए हैं।

उधर, अर्नब गोस्वामी पर हमले के आरोप में गिरफ़्तार दोनों आरोपितों ने बताया है कि वो लगभग एक दशक से भी ज्यादा से ‘यूथ कॉन्ग्रेस’ से जुड़े हुए हैं। अरुण बोराडे और प्रतीक मिश्रा को गणपतराव कदम मार्ग से गिरफ़्तार किया गया था। दोनों को गोस्वामी के सिक्योरिटी गार्ड्स ने पकड़कर पुलिस के हवाले किया था।

महाराष्ट्र, दिल्ली, छत्तीसगढ़, दिल्ली और पंजाब में अर्नब गोस्वामी के ख़िलाफ़ केस दर्ज कराया गया है। इन सभी में भड़काऊ बयान देने और आपत्तिजनक टिप्प्णी करने का आरोप लगाया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने सभी एफआईआर पर कार्रवाई करने से 3 हफ्ते की रोक लगा दी थी, लेकिन उसके बाद भी कॉन्ग्रेस के लोग विभिन्न इलाक़ों में लगातार एफआईआर दर्ज करा रहे हैं।

हमलावरों की कॉन्ग्रेस में सक्रियता

अर्नब पर हमले का आरोपित 26 वर्षीय बोराडे खुद को दलित कार्यकर्ता भी कहता है। वह 2010 से ही यूथ कॉन्ग्रेस से जुड़ा हुआ है। वह मुंबई यूथ कॉन्ग्रेस के मुखिया गणेश यादव का सबसे क़रीबी सिपहसालार है। बोराडे को 2016 सिओन कोलीवाड़ा में यूथ कॉन्ग्रेस का वार्ड अध्यक्ष बनाया गया था।

हालिया विधानसभा चुनावों तक बोराडे यूथ कॉन्ग्रेस का उपाध्यक्ष था, जबकि मिश्रा सदस्य था। बोराडे अपनी बीकॉम की पढ़ाई पूरी कर एलएलबी कर रहा है। मिश्रा ने 12वीं से आगे पढ़ाई ही नहीं की है। दोनों ही अपने क्षत्रों में राजननीतिक कार्यक्रमों में ख़ासे सक्रिय रहते थे।

दोनों कॉन्ग्रेस पार्टी के विभिन्न कार्यक्रम का आयोजन करते थे और ब्लड डोनेशन कैम्प भी लगाते थे। लॉकडाउन के बाद उन दोनों ने कॉन्ग्रेस की तरफ से कुछेक समाजिक कार्य भी किए थे। दोनों बार-बार यही कह रहे हैं कि इस हमले की साज़िश और अंजाम देने में उन दोनों के अलावा और कोई भी व्यक्ति शामिल नहीं है।

बोराडे ने बताया है कि उसने अपने घर से स्याही लाई थी। उन्होंने अपने एक दोस्त की बाइक माँग कर इस घटना को अंजाम दिया था। इस मामले में विभिन्न धाराओं में केस दर्ज किया गया है।

पहले इसे इंस्पेक्टर लेवल पर हैंडल किया जा रहा था लेकिन अब इसकी जाँच वर्ली असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर द्वारा की जा रही है। डिफेन्स के वकील ने दावा किया कि राजनैतिक दबाव के कारण केस रजिस्टर किया गया है और जो धाराएँ लगाई गई हैं, उनके तहत 3 साल से ज्यादा की सज़ा नहीं हो सकती। उन्होंने दावा किया कि सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पुलिस को पहले आरोपितों को नोटिस देना चाहिए था। उन्होंने सीधे गिरफ़्तार किए जाने को ग़लत बताया। कॉन्ग्रेस का कहना है कि इन नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से हमला किया, इसमें पार्टी का कोई रोल नहीं है।

अर्नब गोस्वामी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था?

दोनों पक्ष के मत सुनकर, SC ने माना था कि अर्नब गोस्वामी के खिलाफ एक ही मामले में कई राज्यों में मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। लिहाजा सभी एफआईआऱ को एक साथ जोड़ा जाए। अदालत ने अर्नब को जाँच में सहयोग करने को कहा था। अब इस मामले पर सुनवाई 8 हफ्तों के बाद होने की बात कही गई थी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता अर्नब को भी याचिका में संशोधन करने को कहा था। अदालत ने कहा था कि याचिकाकर्ता कोर्ट से सभी याचिकाओं को एक साथ जोड़े जाने का आग्रह करें। अर्नब के ख़िलाफ़ कपिल सिब्बल ने पैरवी की थी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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