Homeरिपोर्टमीडियाइंडिया टुडे से लेकर द वायर तक, सबके झूठ का ED ने किया पर्दाफाश,...

इंडिया टुडे से लेकर द वायर तक, सबके झूठ का ED ने किया पर्दाफाश, कहा- PFI और भीम आर्मी के लिंक की हो रही पड़ताल

न्यूज 18 की रिपोर्ट, जिसे अब डिलीट किया जा चुका है, में दावा किया गया था, "प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा है कि चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली भीम आर्मी और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के बीच कोई संबंध नहीं है।"

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब मीडिया के गढ़े झूठों का भी पर्दाफाश करना शुरू कर दिया है। हाल में न्यूज 18 ने एक खबर चलाई थी कि केंद्रीय जाँच एजेंसी ने दावा किया है कि कट्टरपंथी समूह पीएफआई और भीम आर्मी के बीच कोई लिंक नहीं है। अब इसी खबर को शेयर करते हुए ईडी ने साफ किया है कि यह खबर सरासर झूठ है।

ईडी ने अपने ट्विटर पर खबर के संबंध में लिखा, “ये खबर गलत है। वास्तविकता में ईडी, पीएफआई अधिकारियों से बरामद विश्वनीय सबूतों के आधार पीएफआई और भीम आर्मी के फाइनेंशिल लिंक्स की पड़ताल कर कर रही है।”

न्यूज 18 की रिपोर्ट, जिसे अब डिलीट किया जा चुका है, में दावा किया गया था, “प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को कहा है कि चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व वाली भीम आर्मी और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के बीच कोई संबंध नहीं है। एजेंसी ने उन दावों को भी खारिज किया जिसमें कहा जा रहा था कि हाथरस मामले के जरिए हिंसा भड़काने के लिए कथित विदेशी फंडिंग के 100 करोड़ रुपए बरामद किए गए।”

गौरतलब है कि केवल न्यूज 18 ने ही नहीं बल्कि कई मीडिया चैनल ने यह झूठा दावा अपनी रिपोर्ट्स में किया था। इस सूची में एक नाम इंडिया टुडे का भी है। इंडिया टुडे ने अपनी 9 अक्टूबर की रिपोर्ट में कहा था कि प्रवर्तन निदेशायलय को भीम आर्मी और पीएफआई के बीच लिंक नहीं मिले हैं, जिन्हें सीएए विरोधी आंदोलनों में हिंसा भड़काने वाला कहा जा रहा था।

इस रिपोर्ट में भी यह लिखा था कि ईडी ने 100 करोड़ बरामद होने वाले दावों को झूठा कहा है। उनका यह बयान यूपी डीजीपी ब्रिज लाल के दावों के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि भीम आर्मी समेत कई बाहरी हाथरस मृतका के परिवार को बरगलाना चाहते हैं।

इसके बाद प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर ने भी इस मामले में जमकर झूठ फैलाया। उन्होंने भी पीएफआई और भीम आर्मी के लिंक को खारिज किया।

बता दें कि इस संबंध में रिपोर्ट्स अक्टूबर माह की शुरुआत में आई थी और कई संस्थानों ने इसे कवर किया था, लेकिन ईडी के खुलासे के बाद भी हमारे खबर लिखने तक सिर्फ न्यूज 18 ने इसे डिलीट किया है।

हाथरस केस

पिछले दिनों यूपी के हाथरस में 14 सितंबर को 19 साल की युवती के साथ हुई बर्बरता के कारण उसने 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपना दम तोड़ा था। मृतका के घरवालों ने उसके साथ बलात्कार का आरोप लगाया था। हालाँकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में इस एंगल को खारिज किया गया था। वहीं इस पूरे मामले को राजनीतिक दृष्टि से भी खूब भुनाया गया था।

मामले में जाँच के दौरान पीएफआई और नक्सल कनेक्शन सामने आए थे। पुलिस ने जाँच में पाया था कि जो महिला लड़की की भाभी बनकर मीडिया से बात कर रही थी, उसे वास्तविकता में कैमरे में बोलने के लिए पहले से तैयार किया गया था। इसके बाद इस मामले में सीबीआई जाँच की माँग उठी थी और राज्य सरकार के अनुरोध पर सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे केस को सीबीआई को सौंप दिया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -