Sunday, April 14, 2024
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महाराष्ट्र के गृह मंत्रालय ने बनाई थी अर्णब की गिरफ्तारी के लिए 40 पुलिसकर्मियों की टीम, नाम दिया- ऑपरेशन अर्णब

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के लिए पूरी तैयारी की गई थी। NCP नेता अनिल देशमुख की अगुवाई वाले महाराष्ट्र के गृह विभाग ने कोंकण रेंज के आईजी संजय मोहिते के अगुवाई में 40 सदस्यों की उच्च स्तरीय टीम का गठन किया था।

अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के मामले में एक हैरान करने वाली बात सामने आई है। महाराष्ट्र सरकार के गृहमंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख की अगुवाई में 2018 के एक आत्महत्या के लिए उकसाने वाले मामले में अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी के लिए 40 सदस्यों की उच्च स्तरीय टीम का गठन किया था और इस टीम की अगुवाई कोकण रेंज के इंस्पेक्टर जनरल संजय मोहिते को सौंपी गई। 

रायगढ़ पुलिस ने साल 2018 में आर्किटेक्ट अन्वय नाइक की आत्महत्या के मामले की फ़ाइल को दोबारा खोलने की अनुमति दी। इसके कुछ ही दिन बाद ‘ऑपरेशन अर्णब’ की शुरुआत हुई। इस ऑपरेशन के लिए रायगढ़ और मुंबई पुलिस के लगभग 40 पुलिसकर्मी शामिल किए गए थे। संजय मोहिते ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने की योजना बनाई और वहीं इसे क्रियान्वित करने की ज़िम्मेदारी एनकाउंटर विशेषज्ञ सचिन वाज़ को सौंपी गई थी। ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया‘ से बात करते हुए महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट मंत्री ने इस प्रकरण में विस्तार से जानकारी दी। 

उन्होंने कहा, “संजय मोहिते की अगुवाई वाली टीम के लिए अर्णब जैसे ताकतवर व्यक्ति को गिरफ्तार करना चुनौतीपूर्ण था। फिर भी हमने पूरी सावधानी के साथ एक एक कदम उठाया, टीम के हर सदस्य ने तमाम प्रकार की विपरीत प्रतिक्रिया झेलने के बावजूद धैर्य और संयम से काम लिया। इन बातों की वजह से ही हम इस पूरे ऑपरेशन को सही से अंजाम देने में सफल हो पाए।” 

खुफ़िया ऑपरेशन, गिरफ्तारी के पहले पुलिसकर्मियों ने लगाए घर के चक्कर

महाराष्ट्र सरकार में कैबिनेट सदस्य ने यह भी कहा कि प्राथमिक जाँच के बाद एक बात स्पष्ट हो चुकी थी कि अर्णब पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप तय है। उन्होंने कहा, “टीम के लोगों ने उस इमारत के कई चक्कर लगाए जहाँ अर्णब का घर है, यह एक खुफ़िया ऑपरेशन था। हमें शुरुआत से ही इस बात का डर था कि कहीं कोई जानकारी बाहर न आ जाए। वह पूरे मामले में एक बड़ी चूक साबित होती।” 

महाराष्ट्र कैबिनेट के एक वरिष्ठ सदस्य ने इस ऑपरेशन की जानकारी ऐसे दी जैसे यह किसी बड़े अपराधी को पकड़ने की योजना हो। उन्होंने कहा कि अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तारी बुधवार (4 नवंबर 2020) को सुबह हुई थी, पुलिसकर्मियों ने यह समय इसलिए चुना जिससे अर्णब घर पर मौजूद हो। इसकी जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि यह एक सुनियोजित ऑपरेशन था, हर कदम पूरी सावधानी के साथ उठाया गया था। यह तक पहले से तय किया गया था कि कौन दरवाजे पर आहट करेगा और कौन अर्नब और उनके परिवार वालों से बात करेगा। 

इसके अलावा, अगर कार्रवाई के दौरान विपरीत हालात पैदा होते हैं तो मौके पर क्या कदम उठाया जाएगा यह भी तय किया गया। ऐसा हुआ भी, अर्णब ने मौके पर प्रतिक्रिया दी जिसके बाद सचिन वाज़ ने उन्हें जाँच में सहयोग ना करने के हालात में न्यायिक प्रक्रिया से अवगत कराया। गृहमंत्री अनिल देशमुख ने कहा, “देवेंद्र फडणवीस की सरकार में इस मामले को पूरी तरह दबाने का प्रयास किया गया था। जैसे ही मैंने मृतक की पत्नी और उनकी बेटी का पक्ष सुना मुझे बहुत ज़्यादा हैरानी हुई। मुझे भरोसा नहीं हुआ कि महाराष्ट्र में ऐसा भी हो सकता है, हम इस मामले को इसके सुचारू अंत तक लेकर जाएँगे।”

अपने ही पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया मुंबई पुलिस ने

सबसे ज़्यादा हैरानी की बात है कि मुंबई पुलिस ने 2018 आत्महत्या मामले की फाइल बंद करने के लिए अपने ही विभाग के एक अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अर्णब गोस्वामी की गिरफ्तार के ठीक एक दिन बाद उस पुलिस अधिकारी को गिरफ्तार कर लिया जिसने कोई सबूत नहीं उपलब्ध होने की सूरत में मामले की फाइल बंद कर दी थी। यह पुलिस अधिकारी 2018 में हुई अन्वय नाइक आत्महत्या मामले की जाँच कर रहा था। 

मई, 2018 में अर्णब गोस्वामी पर इंटीरियर डिज़ाइनर अन्वय नाइक को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया था। अन्वय नाइक द्वारा अलीबाग स्थित बंगले में आत्महत्या करने के बाद अर्नब के विरुद्ध एफ़आईआर दर्ज की गई थी। अपने सुसाइड नोट में अन्वय नाइक ने अर्णब और 2 अन्य लोगों पर आरोप लगाया था कि अर्णब ने स्टूडियो का काम कराने के बाद उन्हें 83 लाख रुपए का भुगतान नहीं किया था। 

इस मामले में जाँच हुई थी, जाँच के बाद पुलिस ने अंतरिम रिपोर्ट भी दायर की थी जिसके बाद अदालत ने इसे बंद करने का आदेश दिया था। इस मुद्दे पर रिपब्लिक टीवी ने पहले ही सफाई पेश की थी कि 90 फ़ीसदी भुगतान पहले ही किया जा चुका था जितना बचा था वह बचा हुआ काम पूरा होने के बाद होना था जो कि कभी पूरा हुआ ही नहीं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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