Thursday, August 13, 2020
Home रिपोर्ट मीडिया कारसेवकों का नरसंहार कब, कितने मरे, किसने मरवाया? देश के मीडिया संस्थानों के लेख...

कारसेवकों का नरसंहार कब, कितने मरे, किसने मरवाया? देश के मीडिया संस्थानों के लेख से सब कुछ गायब

बिज़नेस स्टैण्डर्ड, द हिन्दू, द प्रिंट, एनडीटीवी, फर्स्ट पोस्ट, बीबीसी... इन सबके स्क्रीनशॉट अंदर लगाए गए हैं। राम मंदिर पर इनके लेखों (जिसमें सिलसिलेवार हर घटना का जिक्र है) से कारसेवकों का नरसंहार गायब है, बाकी सब कुछ है।

देश की सबसे बड़ी अदालत का आदेश आने के बाद आगामी 5 अगस्त की तारीख को राम मंदिर का भूमि पूजन होना है। साल 2019 में 500 सालों तक चले इस संघर्ष का अंत हो गया। अब मंदिर बनने जा रहा है लेकिन मंदिर निर्माण के पीछे हज़ारों लोगों का बलिदान है। न जाने कितनी पीढ़ियाँ इस दिन के लिए ख़त्म हो गईं। लेकिन बात केवल इतनी नहीं है। इस मामले से जुड़ी ऐसी न जाने कितनी घटनाएँ हैं, जिनमें हिंदुओं पर हुए अत्याचार को छुपाया और दबाया गया। 

इस तरह की एक घटना साल 1990 में हुई थी, जब मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे। अयोध्या में कारसेवक इकट्ठा हुए थे, तभी समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मौके पर ओपन फ़ायर का आदेश दे दिया। रिपब्लिक टीवी द्वारा किए गए पड़ताल में यह बात सामने आई थी कि मुलायम सिंह की सरकार ने असल मौतों का आँकड़ा छिपाया था। सरकार के मुताबिक़ वहाँ पर 16 लोगों की मौत हुई थी जबकि असल में संख्या काफी ज़्यादा थी। 

सरकार ने मरने वालों की असल संख्या छिपाने के लिए हिंदुओं की लाशों का अंतिम संस्कार करने की जगह उन्हें दफ़न करवा दिया था। साल 2016 में मुलायम सिंह ने खुद इस बात को स्वीकार किया था कि उन्हें कारसेवकों पर गोली चलवाने का पछतावा है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मुस्लिम समुदाय के लोगों की भावनाओं का ध्यान रखना था। इस नरसंहार के दौरान ही कोठारी बंधुओं ने अपनी जान गँवाई थी।

मुख्य धारा मीडिया ने 2 नवंबर 1990 के दिन हिंदुओं पर हुए भयावह अत्याचार को सामने न लाने का कोई मौक़ा नहीं छोड़ा। हैरानी की बात यह है कि वह अब तक इस तरह के षड्यंत्रों में शामिल हैं। तमाम मीडिया संस्थानों ने श्रीराम जन्मभूमि आन्दोलन के बारे में ख़बरें प्रकाशित की हैं। लेकिन इस विवाद के दौरान तत्कालीन उत्तर प्रदेश द्वारा हिंदुओं पर किए गए अत्याचार का कोई ज़िक्र ही नहीं है।

- विज्ञापन -

वह मुग़ल शासन से लेकर अभी तक तमाम घटनाओं का उल्लेख सिलसिलेवार तरीके से करते हैं। लेकिन साल 1990 के दौरान अयोध्या में कारसेवकों पर चलाई गई गोली की घटना का कोई ज़िक्र ही नहीं करते हैं। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने अपनी रिपोर्ट में सितंबर 1990 में लाल कृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी का ज़िक्र किया है। इसके बाद सीधे 2 दिसंबर 1992 के दिन हुई विवादित ढाँचे की घटना का ज़िक्र किया है। 

साभार – बिज़नेस स्टैण्डर्ड

यानी देश के प्रतिष्ठित मीडिया संस्थान इतनी गंभीर घटना को सिरे से नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। ठीक इसी तरह द हिंदू ने भी बिज़नेस स्टैंडर्ड जैसा रवैया ही अपनाया है। इन्होंने भी अपनी रिपोर्ट में सितंबर 1990 में हुई लाल कृष्ण आडवाणी की गिरफ्तारी के बारे में बताया। लेकिन कारसेवकों पर चली गोली की घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। 

साभार – द हिन्दू

ठीक इसी तरह शेखर गुप्ता के द प्रिंट ने भी किया है। उन्होंने भी मुलायम सरकार में कारसेवकों के नरसंहार की घटना का कोई उल्लेख ही नहीं किया है। इन्होंने 25 सितंबर 1990 के दौरान गुजरात के सोमनाथ में लाल कृष्ण आडवाणी की रथयात्रा के बारे में बताया। इसके बाद सीधे पर कल्याण सिंह की सरकार के उस फैसले का ज़िक्र किया, जिसमें उन्होंने राम जन्मभूमि के पास 2.77 एकड़ की ज़मीन पर अधिग्रहण किया था। 

साभार – द प्रिंट

वहीं एनडीटीवी ने इन सभी से एक कदम आगे बढ़ कर घटना के बारे में बताया। उन्होंने लिखा कि 1990 के दौरान के विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद का ढाँचा गिराया। लेकिन दूसरी तरफ कारसेवकों पर चलाई गई गोली की घटना के बारे में एक शब्द भी नहीं लिखा। बेशक यह घटना इतिहास की सबसे निर्दयी घटनाओं में एक है। लेकिन अफ़सोस मुख्य धारा मीडिया की निगाह में नहीं। 

साभार – एनडीटीवी

वहीं फर्स्टपोस्ट ने तो 1990 का पूरा घटनाक्रम ही छोड़ दिया। उन्होंने 1989 की घटनाओं पर संक्षेप में जानकारी दी। इसके बाद वह सीधे 1992 की घटना पर आ गए, कुल मिला कर उन्होंने यह दिखाने का प्रयास किया कि 1990 के दौरान कुछ हुआ ही नहीं था। 

साभार – फर्स्ट पोस्ट

जब भारतीय मीडिया संस्थानों ने कारसेवकों के साथ हुए अत्याचार के बारे में कुछ नहीं लिखा। ऐसे में विदेशी मीडिया संस्थाओं से इस बारे में आशा करना बेकार ही है कि वह इस घटना का ज़िक्र करेंगे। बीबीसी जो हमेशा से ही हिंदू विरोधी एजेंडे पर चलती रही है, उसने भी कुछ ऐसा ही किया है। 

साभार – बीबीसी

जब भी इतिहास से जुड़ी किसी घटना का ज़िक्र किया जाता है, तब इस बात का ख़ास ख़याल रखा जाता है कि उसमें छोटी से छोटी बात भी शामिल की जाए। भले घटनाक्रम निर्धारित किए गए प्रारूप से कितना ही बड़ा क्यों न हो जाए। राम जन्मभूमि आन्दोलन के बारे में भी ठीक ऐसा ही होना चाहिए था। पढ़ने वाला हर व्यक्ति यह उम्मीद करता होगा कि उसे पूरी घटना सिलसिलेवार तरीके से बताई जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं।

पाठकों के सामने हर घटना का उल्लेख नहीं किया गया। लगभग आधी जानकारी ही दबा दी गई। इसका एक मतलब यह भी है कि मुख्यधारा मीडिया के लिए हिंदुओं की जान का कोई मूल्य ही नहीं है। मुलायम सिंह की सरकार में हिंदुओं के साथ हुई वह घटना बेहद भयावह और निर्दयी थी। मुख्यधारा मीडिया ने इसे पूरी तरह दरकिनार कर दिया। इस मामले में मीडिया की कोशिश यही रही है कि आम लोगों के सामने कारसेवकों के साथ हुआ अत्याचार सामने न आ पाए। 

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

टैक्स रिफॉर्म्स के लिए ‘विवाद से विश्वास’: खुलासा करने पर 70% तक की छूट, आयकर में पारदर्शिता

आयकर विभाग के काम में दक्षता और पारदर्शिता लाने के लिए केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड की ओर से कई पहल की गई है। विभाग की ओर से...

मणिपुर का शेर बीर टिकेंद्रजीत सिंह: अंग्रेजों ने जिन्हें कहा था ‘खतरनाक बाघ’, दी थी खुली जगह पर फाँसी

बीर टिकेंद्रजीत सिंह को 13 अगस्त 1891 को आम जनता के सामने एक खुली जगह पर फाँसी लगाई ताकि लोगों में डर पैदा किया जा सके।

ट्रांसपैरेंट टैक्सेशन – ऑनरिंग द ऑनेस्ट: PM मोदी ने लॉन्च किया प्लेटफॉर्म, ईमानदार टैक्सपेयर्स को प्रोत्साहन

PM मोदी ने ईमानदारी से कर चुकाने वालों के लिए 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन- ऑनरिंग द ऑनेस्ट' नामक एक प्लेटफॉर्म का शुभारंभ करके...

इंदिरा गाँधी बाबर की कब्र पर गईं, सिर झुकाया और बोलीं – ‘मैंने इतिहास को महसूस किया…’

वो बाबर के मकबरे की ओर चल दिए। वे मकबरे के सामने खड़ी हुईं और हल्का सा सिर झुकाया। बाद में वे बोलीं - "मैं इतिहास को महसूस कर रही थी।"

उतावले राजदीप ने चलाई प्रणब मुखर्जी की मौत की ‘ब्रेकिंग’ खबर, फिर फेक न्यूज बता कर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने आदतन उतावलेपन में प्रणब मुखर्जी की मौत की फेक न्यूज़ को 'ब्रेकिंग' बताते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर कर डाली।

…जब पुलिस वालों ने रोते हुए सीनियर ऑफिसर से माँगी गोली चलाने की इजाजत: बेंगलुरु दंगे का सच

वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ती है। हालात भयावह हो जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने...

प्रचलित ख़बरें

पैगम्बर मुहम्मद पर FB पोस्ट, दलित कॉन्ग्रेस MLA के घर पर हमला: 1000+ मुस्लिम भीड़, बेंगलुरु में दंगे व आगजनी

बेंगलुरु में 1000 से भी अधिक की मुस्लिम भीड़ ने स्थानीय विधायक अखंड श्रीनिवास मूर्ति के घर को घेर लिया और तोड़फोड़ शुरू कर दी।

गोधरा पर मुस्लिम भीड़ को क्लिन चिट, घुटनों को सेक्स में समेट वाजपेयी का मजाक: एक राहत इंदौरी यह भी

"रंग चेहरे का ज़र्द कैसा है, आईना गर्द-गर्द कैसा है, काम घुटनों से जब लिया ही नहीं...फिर ये घुटनों में दर्द कैसा है" - राहत इंदौरी ने यह...

पैगंबर मुहम्मद पर खबर, भड़के दंगे और 17 लोगों की मौत: घटना भारत की, जब दो मीडिया हाउस पर किया गया अटैक

वो 5 मौके, जब पैगंबर मुहम्मद के नाम पर इस्लामी कट्टरता का भयावह चेहरा देखने को मिला। मीडिया हाउस पर हमला भारत में हुआ था, लोग भूल गए होंगे!

दंगाइयों के संपत्ति से की जाएगी नुकसान की भरपाई: कर्नाटक के गृहमंत्री का ऐलान, तेजस्वी सूर्या ने योगी सरकार की तर्ज पर की थी...

बसवराज बोम्मई ने एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि सार्वजनिक संपत्ति और वाहनों को नुकसान की भरपाई क्षति पहुँचाने वाले दंगाइयों को करना होगा।

महेश भट्ट की ‘सड़क-2’ में किया जाएगा हिन्दुओं को बदनाम: आश्रम के साधु के ‘असली चेहरे’ को एक्सपोज करेगी आलिया

21 साल बाद निर्देशन में लौट रहे महेश भट्ट की फिल्म सड़क-2 में एक साधु को बुरा दिखाया जाएगा, आलिया द्वारा उसके 'काले कृत्यों' का खुलासा...

‘जल्दी अपलोड कर’ – बेंगलुरु में मुस्लिमों के मंदिर बचाने का ड्रामा अंत के 5 सेकंड में फुस्स, नए वीडियो से खुली पोल

राजदीप सरदेसाई ने भी मुसलमानों को 'मानव श्रृंखला' कहा। आगजनी करने वालों का कोई धर्म नहीं, मगर मंदिर के लिए मानव श्रृंखला बनाने वाले...

संबित पात्रा पर टूट पड़े लिबरल्स: कॉन्ग्रेस प्रवक्ता राजीव त्यागी की टीवी चैनल पर बहस के बाद हुई मौत को बनाया हथियार

कॉन्ग्रेस समर्थकों और लिबरल्स ने राजीव त्यागी की मृत्यु को हथियार बना कर संबित पात्रा के खिलाफ़ ज़हर उगलना शुरू कर दिया।

टैक्स रिफॉर्म्स के लिए ‘विवाद से विश्वास’: खुलासा करने पर 70% तक की छूट, आयकर में पारदर्शिता

आयकर विभाग के काम में दक्षता और पारदर्शिता लाने के लिए केंद्रीय प्रत्‍यक्ष कर बोर्ड की ओर से कई पहल की गई है। विभाग की ओर से...

मणिपुर का शेर बीर टिकेंद्रजीत सिंह: अंग्रेजों ने जिन्हें कहा था ‘खतरनाक बाघ’, दी थी खुली जगह पर फाँसी

बीर टिकेंद्रजीत सिंह को 13 अगस्त 1891 को आम जनता के सामने एक खुली जगह पर फाँसी लगाई ताकि लोगों में डर पैदा किया जा सके।

बेंगलुरु दंगों पर कर्नाटक सरकार सख्त: न्यायिक जाँच का आदेश, पहले किया दंगाइयों से नुकसान वसूलने का ऐलान

बंगलुरु दंगों की न्यायिक जाँच होगी। CM बीएस येदुराप्पा, गृहमंत्री बसवराज बोम्मई और पुलिस अधिकारियों की बैठक में इस मामले से संबंधित...

ट्रांसपैरेंट टैक्सेशन – ऑनरिंग द ऑनेस्ट: PM मोदी ने लॉन्च किया प्लेटफॉर्म, ईमानदार टैक्सपेयर्स को प्रोत्साहन

PM मोदी ने ईमानदारी से कर चुकाने वालों के लिए 'ट्रांसपेरेंट टैक्सेशन- ऑनरिंग द ऑनेस्ट' नामक एक प्लेटफॉर्म का शुभारंभ करके...

इंदिरा गाँधी बाबर की कब्र पर गईं, सिर झुकाया और बोलीं – ‘मैंने इतिहास को महसूस किया…’

वो बाबर के मकबरे की ओर चल दिए। वे मकबरे के सामने खड़ी हुईं और हल्का सा सिर झुकाया। बाद में वे बोलीं - "मैं इतिहास को महसूस कर रही थी।"

उतावले राजदीप ने चलाई प्रणब मुखर्जी की मौत की ‘ब्रेकिंग’ खबर, फिर फेक न्यूज बता कर ट्वीट किया डिलीट

राजदीप सरदेसाई ने आदतन उतावलेपन में प्रणब मुखर्जी की मौत की फेक न्यूज़ को 'ब्रेकिंग' बताते हुए अपने ट्विटर अकाउंट पर शेयर कर डाली।

…जब पुलिस वालों ने रोते हुए सीनियर ऑफिसर से माँगी गोली चलाने की इजाजत: बेंगलुरु दंगे का सच

वीडियो में साफ सुना जा सकता है कि इस्लामी कट्टरपंथी भीड़ पुलिस वालों पर टूट पड़ती है। हालात भयावह हो जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने...

CCTV कैमरों और स्ट्रीटलाइट्स को तोड़ा, फिर धारदार हथियार से थाने पर हमला: बेंगलुरु दंगे की पूरी प्लानिंग

70+ पुलिसकर्मियों को चोटें आईं। भीड़ ने उन पर धारदार हथियार भी फेंके। इनमें, 40 घायल पुलिस डीजे हल्ली पुलिस स्टेशन के थे जबकि अन्य...

क्या सुशांत सिंह को मारने के लिए किया गया स्टन गन का प्रयोग? सुब्रमण्यम स्वामी ने की NIA जाँच की माँग

सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर पर लिखा है, "क्या यह गन अरब सागर के जरिए भारत में आई है? एनआईए को इस मामले की जाँच के साथ जुड़ना चाहिए ताकि सच सबके सामने आ सके।"

हमसे जुड़ें

246,500FansLike
64,745FollowersFollow
298,000SubscribersSubscribe
Advertisements