इसके बावजूद देश विरोधी ताकतें लगातार भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही हैं कि भारत में तेल-गैस का भंडार कम है। कोई कह रहा है कि 5 दिनों का रणनीतिक भंडार बचा है, तो कोई 9 दिनों का रणनीतिक भंडार होने का दावा कर रहा है। बीबीसी की हेडलाइन भारत विरोधी प्रोपेगेंडा को साफ जाहिर करता है।
बीबीसी फैला रहा झूठ
बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत के पास मात्र 5 दिनों का तेल भंडार है। रिपोर्ट में कैग के हवाले से बताया गया है कि भारत की कुल भंडारण क्षमता करीब 74 दिनों की है, लेकिन सीएजी की 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, इन भंडारण सुविधाओं का सालों से पूरा इस्तेमाल नहीं है।

दरअसल रिपोर्ट में ये बताया गया है कि सरकार ने 74 दिनों के स्टॉक की बात कही है और लोगों को पैनिक नहीं होने के लिए कहा है। लेकिन लेख का शीर्षक ऐसे लिखा गया है, जैसे 5 दिनों के बाद भारत में तेल-गैस का हाहाकार मच जाएगा। ऐसी खबरें लोगों को गुमराह करती हैं।
Meet Jasmin Nihlani of BBC who is trying to spread panic in India by selective and incomplete reporting.
— India First Post (@ifpost47) March 28, 2026
These people want to see some Indians dead so that get a pat on the back from their white masters. https://t.co/xYyaRebyvj pic.twitter.com/p5YK1KTpZC
खबर के अंदर बताया गया है कि सरकार ने पिछले साल राज्यसभा को बताया था कि तेल विपणन कंपनियों के पास 64.5 दिन की माँग के बराबर स्टॉक है। आईएसपीआरएल की कुल 9.5 दिनों की क्षमता को जोड़ने के बाद ये 74 दिनों का हो जाता है। ये बताने के बावजूद लोगों को भ्रम में डालने के लिए हेडलाइन में सिर्फ 5 दिनों के स्टॉक की बात कही गई है।
यह सनसनी पैदा कर के गुमराह करने वाली हैडलाइन है ऐसी खबरों से पेट्रोल पंप्स पर लाइन लगती है और अराजकता फैलती है।
— प्रियंक कानूनगो Priyank Kanoongo (@KanoongoPriyank) March 28, 2026
इस आर्टिकल में ही लिखा है कि भारत के पास 74 दिन का तेल भंडार है फिर हेडलाइन के माध्यम से संशय उत्पन्न करना वर्तमान परिस्थितियों में अफ़वाह फैलाने जैसा है ।
यह… https://t.co/5m79gkVchQ pic.twitter.com/5o2WdkoLCU
ऐसी स्थिति में जब दुनिया के ज्यादातर देशों में पेट्रोल-गैस के दाम बढ़ चुके हैं। कई देशों में पेट्रोल पंप खाली पड़े हैं। भारत की रणनीति ही है, जिससे हमारे पास 74 दिनों का स्टॉक होने के बावजूद सरकार लगातार कई देशों से ऑयल मँगा रही है। पहले भारत जहाँ 27 देशों से ऑयल मँगाती थी, वहीं अब 40 देशों से ऑयल मँगाया जा रहा है।
ईरान हमले और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल टैंकरों के आने में बाधा होने के बावजूद ये सरकार की रणनीति की वजह से ही संभव हो पाया है कि हमारे तेल- गैस टैंकर एक के बाद एक सुरक्षित होर्मुज को पार कर देश पहुँच रहे हैं। भारत में रूस से भी तेल आ रहा है और अमेरिका से भी। इतना ही नहीं ईरान से भी एलपीजी से भरा टैंकर भारत आया है।
गैस-तेल का कोई संकट नहीं
एलपीजी की बात करें तो देश में रिफाइनरी उत्पादन में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। दैनिक एलपीजी उत्पादन 50 टीएमटी तक पहुँच गया है, जबकि कुछ दैनिक जरूरत 80 टीएमटी है। यानी कुल 30 टीएमटी दैनिक एलपीजी की कमी है इसे पूरा करने के लिए लगातार आयात किया जा रहा है। कहने का मतलब है कि देश में एलपीजी का उत्पादन अभी भी आयात से ज्यादा है।
🚨सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि भारत के पास केवल “9 दिनों का तेल भंडार” बचा है#PIBFactCheck:
— पीआईबी हिंदी (@PIBHindi) March 27, 2026
❌ यह दावा #भ्रामक है!
✅ भारत की कुल भंडारण क्षमता 74 दिनों की है, जबकि वर्तमान में लगभग 60 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है। इसमें कच्चा तेल, पेट्रोलियम उत्पाद और… https://t.co/sMzETu642z
घर में पाइप से आने वाले गैस यानी पीएनजी के लिए दूसरों पर निर्भरता यूँ भी काफी कम है। भारत पहले से ही 191 प्रतिदिन मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर की दैनिक आवश्यकता में से 92 प्रतिदिन मिलियन मीट्रिक मानक घन मीटर प्राकृतिक गैस का घरेलू उत्पादन करता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति के बावजूद, भारत को आज दुनिया भर के अपने 41 से अधिक आपूर्तिकर्ता देशों से पहले की तुलना में अधिक कच्चा तेल मिल रहा है। भारत की सभी रिफाइनरियाँ 100 प्रतिशत से अधिक क्षमता पर चल रही हैं। इंडियन ऑयल कंपनियों ने अगले 60 दिनों के लिए कच्चे तेल की आपूर्ति पहले ही सुनिश्चित कर ली है। आपूर्ति में कोई कमी नहीं है।
भारत में कई बार तेल-गैस के पर्याप्त भंडार हैं, ये बातें कही गई है। दरअसल लोगों के पैनिक होने पर रेग्युलर सप्लाई के बावजूद कई जगहों पर लाइन इस वजह से लगी है कि आम दिनों से ज्यादा पेट्रोल लेने की कोशिश की जा रही है। इससे दिक्कत आई है। लेकिन यह उतना बड़ा मामला नहीं है। लोगों को पेट्रोल- डीजल और गैस नियमित तौर पर मिल रही हैं, इसे कोई नहीं झुठला सकता।
इसके बावजूद गलत तरीके से खबरों को पेश कर लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। न तो पीएम मोदी के आश्वासन पर भरोसा है और न ही पेट्रोलियम मंत्रालय पर। यहाँ तक कि संसद में ही पीएम मोदी ने कहा कि भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडारण है. उन्होंने कहा कि भारत ने कच्चे तेल के आयात को विविध बनाया है और संकट से निपटने के लिए भंडारण को प्राथमिकता दी है। देश में तेल और गैस की कमी नहीं है। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर भी झूठ फैलाया जा रहा है। इसको लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय ने नाराजगी जाहिर करते हुए भ्रम फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित भ्रामक वीडियो और पोस्टों पर चिंता जताते हुए कहा कि दूसरे देशों में तेल गैस की आपूर्ति की कमी के फुटेज को भारत का बता कर प्रसारित किया गया और भारत में लॉकडाउन की झूठी खबर फैलाई गई। मंत्रालय ने फर्जी और मनगढ़ंत दावों को लेकर एक्शन लेने की बात भी कही है।
मंत्रालय ने साफ कहा है कि कुछ पोस्टों में जानबूझकर सरकारी आदेशों को संकट का संकेत बताते हुए प्रचारित किया गया है।
यही वजह है कि मंत्रालय ने साफ कहा है कि ईंधन और गैस की उपलब्धता संबंधी जानकारी के लिए केवल सरकारी सूचनाओं पर ही भरोसा करें। आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता के संबंध में गलत जानकारी फैलाना मौजूदा कानूनों के तहत अपराध है, लेकिन भ्रम फैलाने से देश विरोधी ताकतें बाज नहीं आ रही हैं। बीबीसी का लेख की हेडलाइन भी लोगों को बरगलाने वाली है। अंदर लेख में साफ बताया जा रहा है कि भारत में पर्याप्त भंडार है लेकिन हेडलाइन ऐसी, जिससे लोगों में भ्रम पैदा हो, ये पत्रकारिता की छवि को धुमिल करने वाली है।


