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ट्विटर पर जलाकर मारे गए कारसेवकों की बात करना मना है: गोधरा नरसंहार से जुड़े पोस्ट डिलीट करने को कर रहा मजबूर

"क्या आप ऐतिहासिक घटनाओं को बदलना चाहते हैं? क्या साबरमती नरसंहार कभी नहीं हुआ? आप मेरी पोस्ट हटा सकते हैं, लेकिन हकीकत नहीं बदल सकते!"

हाल में ट्विटर का पक्षपाती सेंसरशिप एक गंभीर चिंता का मसला बनकर उभरा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उन राजनीतिक आवाजों के साथ पक्षपात करने के आरोप हैं जिनसे वह सहमत नहीं होता। इस तरह की स्थिति यूजर्स ने प्लेटफॉर्म पर गोधरा में जलाकर मारे गए कार सेवकों को लेकर बात करने वाले ​पोस्ट्स को जानबूझकर ब्लॉक करने का आरोप लगाया है।

एक यूजर ने बताया है कि उसने ‘कभी न भूलना (Never Forget)’ कैप्शन के साथ गोधरा नरसंहार की तस्वीर पोस्ट की थी। इसके बाद उसका अकाउंट एक खास समय के लिए लॉक कर दिया गया। ट्विटर ने दोबारा अकाउंट बहाल करने के लिए ट्विटर से पोस्टर डिलीट करने या फिर उसे इस कार्रवाई के खिलाफ अपील करने को कहा।

हालाँकि यूजर ने पाया कि उसका ट्वीट उसकी अपील पर गौर करने से पहले ही हटाया जा चुका है। आखिरकार, उसने अपने ट्वीट को डिलीट करने का फैसला किया, क्योंकि इसे पहले ही हटाया जा चुका था। ट्विटर पर कमेंट करते हुए यूजर ने कहा, “क्या आप ऐतिहासिक घटनाओं को बदलना चाहते हैं? क्या साबरमती नरसंहार कभी नहीं हुआ? आप मेरी पोस्ट हटा सकते हैं, लेकिन हकीकत नहीं बदल सकते!”

एक अन्य यूजर ने दिल्ली दंगों के दौरान आईबी कॉन्स्टेबल अंकित शर्मा की बेरहम हत्या से जुड़ी तस्वीरें पोस्ट की। इसे ‘सेंसेटिव इन्फोर्मेशन’ के तौर पर लेबल कर दिया गया।

सेंसरशिप को लेकर ट्विटर का वामपंथी पूर्वाग्रह पिछले कुछ समय से चिंता का प्रमुख विषय रहा है। एक तरफ वे ट्वीट जो गोधरा नरसंहार के हिंदू पी​ड़ितों की बात करते हैं उन्हें डिलीट करने के लिए यूजर्स को मजबूर किया जा रहा, दूसरी तरफ प्लेटफॉर्म ने उन अकाउंट्स को ब्लॉक करने से इनकार कर दिया था जो किसान आंदोलन की आड़ में फेक न्यूज फैलाकर देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगाड़ना चाहते हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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