Friday, July 19, 2024
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8 पन्ने, 2 आतंकी, विदेशी फंडिंग: जिसे बताते थे ‘मार्शल आर्ट’ की ट्रेनिंग, वो निकली भारत को 2047 तक ‘इस्लामी मुल्क’ बनाने की प्लानिंग

पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि इन लोगों के संगठन को पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की जैसे इस्लामी देश करोड़ों की फंडिंग दे रहे थे। इसलिए अब इस मामले की छानबीन ईडी भी करेगी।

भारत को इस्लामी राष्ट्र बनाने के लिए बिहार में चल रही आतंक की फैक्ट्री का खुलासा होने के बाद खबर है कि पुलिस ने 1 और संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया है। इससे पहले रिटायर्ड दरोगा मोहम्मद जलालुद्दीन और पीएफआई का सदस्य अतहर रियाज, फुलवारी शरीफ से अरेस्ट किए गए थे। इन्हें पुलिस अब जेल भेज चुकी है। आगे सुरक्षा एजेंसियों को इनकी रिमांड दी जाएगी।

बिहार पुलिस ने अपनी कार्रवाई के बाद बताया कि उन्हें संदिग्धों की गिरफ्तारी के दौरान मिशन-2047 नाम से एक 8 पन्नों का दस्तावेज मिला है जिसमें भारत में इस्लामी शासन लाने की बात साफ है। इसमें कहा गया है कि अगर पीएफआई के संग आबादी के 10 फीसद मुस्लिम हो जाएँ तो ये लोग हिंदुओं को दोबारा घुटने पर लाकर इस्लाम कबूल करवा देंगे।

पुलिस की जाँच बताती है कि अतहर बम ब्लास्ट के आरोप में जेल में बंद मंजर परवेज का भाई है और वो खुद भी लंबे समय से आतंकी संगठन सिमी का सदस्य था। हालाँकि अब पीएफआई-एसडीपीआई से जुड़कर देश विरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। उसने पटना में जलालुद्दीन के साथ मिलकर एनजीओ के नाम पर 16 हजार रुपए में किराए पर फ्लैट लिया था, जिसे 2 माह पहले इन्होंने पीएफआई का कार्यालय बना दिया था और अंदर मार्शल आर्ट्स सिखाने के नाम पर कट्टरपंथियों को तैयार करने का काम करते रहे।

बिहार पुलिस जलालुद्दीन और अतहर परवेज
बिहार पुलिस ने गिरफ्तार किए दो आतंकी (तस्वीर साभार: दैनिक जागरण)

अतहर-जलालुद्दीन देश के कई राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के लड़कों को प्रशिक्षण के लिए बुलाते थे। लेकिन उन सबकी टिकट बुकिंग व होटल किसी अन्य नाम से किए जाते थे। इन्हें कार्यालय के भीतर मजहबी उन्माद करने के लिए उकसाया जाता था। आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भड़काया जाता था और किसी भी स्थिति से निपटने के लिए इन्हें चाकू-तलवार चलाने की ट्रेनिंग भी दी जाती थी।

पुलिस की छानबीन में सामने आया है कि इन लोगों के संगठन को पाकिस्तान, बांग्लादेश और तुर्की जैसे इस्लामी देश करोड़ों की फंडिंग दे रहे थे, इसलिए अब इस मामले की छानबीन ईडी भी करेगी। पुलिस का कहना है कि उन्होंने पुख्ता सबूतों के अब अपनी कार्रवाई की है। उनके पास गवाह भी हैं और सबूत के तौर पर सीसीटीवी फुटेज भी है।

इसमें कोई संदेह नहीं है कि ये लोग खतरनाक मंसूबों के साथ फुलवारी शरीफ में संगठन चला रहे थे। इसका मकसद आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने का ही था। पुलिस ने बताया कि लंबे समय से ये लोग दोनों सिमी के आतंकियों की जमानत कराते रहे थे। पुलिस को इनके बारे में 6-7 जुलाई को पता चला था। इसके बाद पुलिस ने इन पर शिकंजा कसा और हाल में जाकर उन्हें पकड़ लिया। इनके फ्लैट पर संदिग्ध दस्तावेज और साथ ही पीएफआई के झंडे मिले हैं।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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