Sunday, September 26, 2021
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भारत-नेपाल सीमा पर विवाद भड़काने के लिए कई संगठनों को पैसा दे रहा है चीन

बताया जा रहा है कि काठमांडू स्थित चीन की एंबेसी नेपाल को भारत विरोधी अभियानों के लिए उकसा रही है। ज्ञात हो कि भारत-नेपाल सीमा 1,700 किमी तक फैली हुई है।

एक ओर भारत और चीन की सेनाएँ पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में कुछ महीनों से आमने-सामने हैं और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव का माहौल लगातार बना हुआ है। वहीं, दूसरी ओर खुफिया एजेंसियों ने दावा किया है कि चीन इस बीच भारत-नेपाल सीमा पर भारत-विरोधी विरोध प्रदर्शनों की फंडिंग कर रहा है। चीन अक्सर नेपाल का इस्तेमाल अपनी वर्चस्ववादी नीतियों की संतुष्टि के लिए बफर जोन के रूप में मोहरे की तरह करता आया है।

ख़ुफ़िया एजेंसियों ने कहा कि चीन ने भारत-नेपाल सीमा पर भारत के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने के लिए नेपाल के कई संगठनों को 2.5 करोड़ रुपए तक का भुगतान किया है। बताया जा रहा है कि काठमांडू स्थित चीन की एंबेसी नेपाल को भारत विरोधी अभियानों के लिए उकसा रही है। ज्ञात हो कि भारत-नेपाल सीमा 1,700 किमी तक फैली हुई है।

सूत्रों से प्राप्त जानकारी के हवाले से समाचार पोर्टल ‘टाइम्स नाउ’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, “नेपाल में चीनी दूतावास ने भारत-नेपाल सीमा क्षेत्रों में भारत विरोधी प्रदर्शनों के आयोजन के लिए 2.5 करोड़ रुपए (NPR) की वित्तीय सहायता प्रदान की है, जिससे कि नेपाल के आंतरिक और राजनीतिक मामलों में भारत के हालिया सीमा विवादों और हस्तक्षेपों का भी खुलासा होता है।”

मई 08, 2020 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह द्वारा उत्तराखंड स्थित धारचूला से जुड़े लिपुलेख दर्रे को जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबी सामरिक उद्देश्यों से बनी सड़क का उद्घाटन करने के बाद भारत-नेपाल संबंधों में खटास देखी गई थी। ऐसे में ख़ुफ़िया एजेंसियों द्वारा किया गया यह खुलासा कई कड़ियों को जोड़ता नजर आता है। हाल ही में नेपाल ने बिहार से लगे बॉर्डर पर भारतीयों पर गोलीबारी भी की है।

नेपाली सरकार ने इस सड़क के उद्घाटन के खिलाफ अपने अधिकार की आवाज उठाई थी और नए नक्शे के साथ लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को अपने इलाके के रूप में दिखाया। वहीं, पड़ोसी देश नेपाल के उच्च सदन ने जून में सर्वसम्मति से तीन भारतीय क्षेत्रों को शामिल करते हुए देश के नक्शे को अपडेट करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक भी पारित किया।

नेपाल द्वारा जारी किया गया यह नया नक्शा विवाद का विषय बना था जिस पर भारत सरकार ने अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा था कि यह नक्शा ऐतिहासिक तथ्यों के खिलाफ है। गौर करने की बात है कि नेपाल सरकार द्वारा यह सभी विवाद ठीक उसी दौरान उठाए गए, जब भारत और चीन के बीच सीमा गतिरोध को लेकर कई प्रकार की तनातनी और बैठकें आयोजित की जा रहीं थीं।

उल्लेखनीय है कि चीन और भारत के सैनिक 29-30 अगस्त को चीनी सैनिकों द्वारा की गई घुसपैठ की कोशिश के बाद एक बार फिर आमने-सामने हैं। बताया जा रहा है कि इस झड़प के दौरान भारतीय सेना ने चीन के करीब 500 सैनिकों को घेर लिया। इसके बाद भारतीय सैनिक 4 किलोमीटर अंदर घुस गए जहाँ पहले चीन का कब्जा हुआ करता था। चीन अब लगातार भारतीय सेना से इस इलाके से हटने की माँग कर रहा है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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