Tuesday, August 9, 2022
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PFI का खतरनाक एजेंडा ‘इंडिया विजन 2047’: इस्लामी सरकार बनाना, ‘कायर हिंदुओं’ की हत्या के लिए हथियार प्रशिक्षण, न्यायपालिका में घुसपैठ- एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “सरकार के साथ पूर्ण रूप से शक्ति प्रदर्शन की स्थित में अपने प्रशिक्षित PE कैडरों पर भरोसा करने के अलावा हमें मित्र इस्लामिक देशों से मदद की आवश्यकता होगी। पिछले कुछ वर्षों में PFI ने इस्लाम के ध्वजवाहक तुर्की के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित किए हैं। कुछ अन्य इस्लामी मुल्कों के साथ विश्वसनीय दोस्ती बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।”

बिहार पुलिस ने आज गुरुवार (14 जुलाई 2022) को 8 पन्नों वाले पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के दस्तावेज को लेकर चौंकाने वाले खुलासे किए, जो भारत के ‘कायर हिंदुओं’ को सबक सिखाने की बात करता है। यह दस्तावेज आने वाले वर्षों के लिए पीएफआई के लक्ष्य के बारे में बताता है।

‘इंडिया विज़न 2047’ नाम के दस्तावेज़ को पीएफआई ने अपने कैडर के बीच आंतरिक रूप से प्रसारित किया है। उसका लक्ष्य ‘कायर हिंदुओं’ पर पूरी तरह से हावी होना और उन्हें अपने अधीन करना है। यह लक्ष्य तब ही प्राप्त किया जा सकता है, जब पीएफआई के पीछे 10 प्रतिशत मुस्लिम एकजुट हों।

इसमें यह भी उल्लेख किया गया है कि PFI अपने प्रशिक्षित कैडरों और तुर्की जैसे इस्लामी देशों की मदद से भारत के खिलाफ एक पूर्ण सशस्त्र विद्रोह शुरू करने की योजना बना रहा है। इस कट्टरपंथी इस्लामी संगठन ने अन्य इस्लामी देशों से भी भारत सरकार और बहुसंख्यक हिंदुओं को ‘घुटनों पर’ लाने में मदद करने की अपील की है। पुलिस ने कहा कि सिमी (SIMI) के पूर्व आतंकवादी परवेज और पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए जलालुद्दीन नाम के पूर्व पुलिस अधिकारी ने इसके लिए लाखों रुपए जुटाए हैं।

ऑपइंडिया ने पूरे 8 पृष्ठ के दस्तावेज़ तक पहुँच प्राप्त कर ली है, जिसकी सामग्री पुलिस के अब तक के खुलासे से कहीं अधिक खतरनाक और चौंकाने वाली है। ‘इंडिया विजन 2047’ दस्तावेज़ में एक टैगलाइन है जो पीएफआई के लक्ष्य को रेखांकित करती है – “भारत में इस्लामी शासन की ओर”।

इस खतरनाक दस्तावेज़ में ‘भारत में मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’, ‘हर घर में पीएफआई’ तक की रणनीति, भारत 2047 योजना और भारत में मुस्लिम समुदाय के लिए कार्रवाई योग्य बिंदुओं की बारे में वर्णन डराने वाली है।

इस्लाम का शासन स्थापित करने और ‘कायर हिंदुओं’ को वश में करने के लिए आने वाले वर्षों में मुस्लिम आबादी क्या करना चाहती है, इसका बिंदु-दर-बिंदु विवरण निम्नलिखित है।

भारत में ‘मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’ के बारे में क्या कहता है दस्तावेज़

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के इस ‘विजन डॉक्युमेंट’ का पहला उपशीर्षक भारत में ‘मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति’ है। दस्तावेज़ के इस खंड में मुस्लिमों के पीड़ित होने की उसी कहानी को आगे बढ़ाया गया है, जिसका उपयोग इस्लामवादियों ने अपने मजहबी साथियों को हथियार उठाने के लिए प्रेरित करने के लिए वर्षों से किया है।

  • PFI इस बात पर अफसोस जताता है कि भारत का शासक समुदाय मुस्लिम अब दोयम दर्जे का नागरिक बनकर रह गया है। इसमें कहा गया है कि देश में 9 जिले ऐसे हैं, जहाँ मुस्लिमों की आबादी 75% से ऊपर है।
  • पीएफआई का कहना है कि मुस्लिमों की वर्तमान स्थिति अंग्रेजों के समय से शुरू हुई थी। उसका दावा है कि अंग्रेजों ने मुस्लिमों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नीतियाँ अपनाईं और हिंदुओं का ‘पक्ष’ लिया। दस्तावेज में कहा गया है, “संपत्ति के अधिकार आदि के मामले में पहले मुस्लिमों को प्राप्त विशेषाधिकारों को वापस ले लिया गया था, सरकारी नौकरियों से वंचित कर दिया गया था और व्यापार सुविधाओं को प्रतिबंधित कर दिया गया था। स्वतंत्रता की शुरुआत के बाद से उच्च जाति के हिंदुओं के प्रभुत्व वाली भारत सरकार ने मुस्लिमों के खिलाफ भेदभावपूर्ण कदम उठाए।”
  • दस्तावेज़ में कहा गया है कि मुस्लिम बच्चे दलित बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं और ‘सांप्रदायिक हिंदुत्ववादी ताकतों के उदय ने मुस्लिमों की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थितियों को और गंभीर कर दिया है। मुस्लिमों का राजनीतिक अस्तित्व इतना नीचे आ गया है कि भारत सरकार शरीयत से संबंधित मामलों पर भी मुस्लिमों से सलाह लेने की जहमत नहीं उठाती’।
  • इसमें कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय ‘मूर्खतापूर्ण मतभेदों’ से विभाजित है और इसलिए ‘हिंदुत्व ताकतों’ से लड़ना मुश्किल है। इसमें आगे कहा कि मुस्लिमों को दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा समुदाय (भारतीय आबादी के मामले में) होने के नाते ‘दुनिया को एक मॉडल’ देने की जरूरत है कि कैसे समुदाय को ‘मुस्लिम विरोधी ताकतों’ से लड़ने की जरूरत है।
  • इस्लामी संगठन ने मुस्लिम समुदाय में अपनी भूमिका के बारे में भी बताया है। लिखा है, “दुनिया भारतीय मुस्लिमों को एक मॉडल के रूप में देखती है और भारतीय मुस्लिम समुदाय असहाय होकर किसी चमत्कार का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। अभी या बाद में नेतृत्व को समुदाय के भीतर से उभरना होगा, ताकि खुद को तत्कालिक खतरों से बचाया जा सके और स्वतंत्रता, सच्चाई और समानता के आधार पर समाज के वंचित वर्गों के लिए एक वास्तविक विकास मॉडल प्रदान किया जा सके। यह वह भूमिका है, जिसमें पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया खुद को देखता है।

PFI का विजन 2047

  • दस्तावेज़ में PFI का कहना है कि उसने भारत में इस्लामी शासक स्थापित करने के लिए खुद को वर्ष 2047 की तारीख दी है।
  • दस्तावेज़ में कहा गया है, “हम उस 2047 का सपना देखते हैं, जिसमें राजनीतिक सत्ता मुस्लिम समुदाय के पास लौटकर आती है, जिसे ब्रिटिश राज ने अन्यायपूर्ण तरीके से छीन लिया था।”
  • ध्यान देने वाली बात यह है कि कि PFI के दस्तावेज में कहा गया है कि मुस्लिम समुदाय हमेशा से अल्पसंख्यक रहा है और जीतने के लिए उसे बहुमत की जरूरत नहीं है। दस्तावेज में कहा गया है, “अगर हम इस्लाम के इतिहास में देखें तो मुस्लिम हमेशा अल्पसंख्यक थे और जीत के लिए हमें बहुमत की आवश्यकता नहीं है। पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) को विश्वास है कि अगर कुल मुस्लिम आबादी का 10% उसके साथ आता है तो भी PFI कायर बहुसंख्यक समुदाय को उसके घुटनों पर ला देगा और भारत में इस्लाम के वैभव को वापस ला देगा।”
  • दस्तावेज़ स्पष्ट रूप से कहता है कि PFI कैडर और नेता भारत में एक इस्लामी सरकार की स्थापना की दिशा में काम कर रहे हैं। दस्तावेज में कहा गया है, “पीएफआई कैडरों और मुस्लिम युवाओं को बार-बार बताया जाना चाहिए कि वे सभी दीन (इस्लाम) के लिए काम कर रहे हैं। अल्लाह ने दुनिया/कायनात की रचना की थी और मुस्लिम दो वजहों से बने थे। पहला, अल्लाह का कानून स्थापित करने के लिए और दूसरा, मुस्लिम धरती पर दाई है। यह हमेशा ध्यान में रखा जाना चाहिए कि इस्लाम का शासन स्थापित करना है।”

PFI के दस्तावेजों के अनुसार, इस्लामी शासन के चरण

पीएफआई ने अपने दस्तावेज़ में भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने की दिशा में प्रगति को चरणों में विभाजित किया है। पीएफआई ने इसके लिए 4 चरण निर्धारित किए हैं।

चरण-1

भारत में इस्लामी शासन स्थापित करने के लेकर पहले चरण में PFI का कहना है कि हर क्षेत्र में और हर वर्ग के मुस्लिमों को पीएफआई के बैनर तले एकजुट होने की जरूरत है। वह और अधिक लोगों की भर्ती करेगा और उन्हें हथियारों का प्रशिक्षण देगा, जिनमें छड़, तलवार और अन्य हथियारों का उपयोग शामिल है। इस प्रशिक्षण में आक्रमण करने और खुद को बचाने की तकनीक भी शामिल होगी।

दस्तावेज में कहा गया है, “इसके लिए मुस्लिम समुदाय को उनके कष्टों को बार-बार याद दिलाने और जहाँ कोई शिकायत निवारण तंत्र (जहाँ मुस्लिमों की समस्याओं के लिए उनकी मदद की जा सके) नहीं है, वहाँ उसे स्थापित करने की जरूरत है। पार्टी सहित हमारे सभी फ्रंटल संगठनों को नए सदस्यों के विस्तार और भर्ती पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। साथ ही हमें भारतीय होने की अवधारणा से परे सभी के बीच एक इस्लामी पहचान स्थापित करनी होगी। हम अपने PE विभाग में सदस्यों की भर्ती और प्रशिक्षण शुरू करेंगे, जिसमें उन्हें तलवारों, छड़ों और अन्य हथियारों के हमलावर और रक्षात्मक तकनीकों का प्रशिक्षण दिए जाएँगे।”

चरण-2

अपने चरण-2 में PFI खुले तौर पर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा करने की अपील करता है। इसमें कहा गया है कि मुस्लिमों की कष्टों को बार-बार दोहराया और उन्हें याद दिलाया जाना चाहिए। इसके साथ ही हिंसा का इस्तेमाल ‘चुनिंदा विरोधियों’ (हिंदुओं) को आतंकित करने और उनकी सामूहिक ताकत को देखने के लिए किया जाना चाहिए। वे आगे बड़े पैमाने पर लामबंदी और ‘सुरक्षा बलों के लिए प्रशिक्षित कैडर के एक्सपोजर’ को सीमित करने की बात करता है।

चरण 2 तब बताता है कि वह ‘अम्बेडकर’, ‘संविधान’ आदि जैसी पंच लाइनों का उपयोग करके अपनी नापाक गतिविधियों को कैसे आगे बढ़ाता है।

दस्तावेज कहता है, “उन सभी कैडरों से जिन्हें PE दिया जा रहा है, प्रतिभावान लोगों को देखा जाएगा और उन्हें हथियारों और विस्फोटकों का एडवांस प्रशिक्षण देने के लिए भर्ती किया जाएगा। इस बीच पार्टी को ‘राष्ट्रीय ध्वज’, ‘संविधान’ और ‘अंबेडकर’ जैसी अवधारणाओं का उपयोग इस्लामी शासन स्थापित करने के वास्तविक इरादे को ढालने के रूप में और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/ओबीसी तक पहुँचने के लिए करना चाहिए। हम कार्यपालिका और न्यायपालिका के हर स्तर पर घुसपैठ करेंगे और सूचनाओं को एकत्र करने उसे अपने हित में इस्तेमाल कर अनुकूल परिणाम प्राप्त करने का प्रयास करेंगे। इसके अलावा, फंडिंग और अन्य मदद के लिए विदेशी इस्लामी देशों के साथ संपर्क स्थापित करना है।”

चरण-3

हथियार का प्रशिक्षण देने, कार्यपालिका एवं न्यायपालिका में घुसपैठ करने और विदेशी इस्लामी राष्ट्रों के साथ संपर्क करने की अपनी रणनीति की रूपरेखा तैयार करने के बाद आतंकवादी संगठन PFI अपने तीसरे चरण की बात करता है। इसमें वह कहता है-

  • इस चरण में पीएफआई का कहना है कि पार्टी (PFI) को एससी/एसटी/ओबीसी समुदाय के साथ घनिष्ठ गठबंधन बनाना चाहिए और चुनाव में कम-से-कम कुछ सीटें जीतनी चाहिए। PFI जो गठबंधन बनाना चाहता है, उसमें 50% मुस्लिमों की हिस्सेदारी और 10% एससी/एसटी/ओबीसी की हिस्सेदारी होगी।
  • पीएफआई आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच विभाजन पैदा करने की बात करता है। दस्तावेज़ में कहा गया है, “हमें यह दिखाकर आरएसएस और एससी/एसटी/ओबीसी के बीच एक विभाजन पैदा करने की जरूरत है कि आरएसएस केवल उच्च जाति के हिंदुओं के हित की बात करने वाला संगठन है।”
  • पीएफआई एक विशुद्ध मुस्लिम पार्टी की आवश्यकता को आगे बढ़ाने के लिए सभी ‘धर्मनिरपेक्ष’ दलों को बदनाम करने की बात करता है। इससे मुस्लिमों और एससी/एसटी/ओबीसी की जरूरतें पूरा होंगी।
  • पीएफआई ने अपने कैडरों से इस स्तर पर हथियार जमा करने के लिए कहा है।
  • डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “PE विभाग को अपने सदस्यों के अनुशासन, यूनीफॉर्म में मार्च और जहाँ कहीं भी आवश्यक हो समुदाय की रक्षा के लिए हमला करके अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहिए। इस चरण में हथियारों और विस्फोटकों का भंडारण किया जाना चाहिए।”

चरण-4

  • इस चरण में पीएफआई का कहना है कि वह अन्य सभी मुस्लिम और धर्मनिरपेक्ष संगठनों को दरकिनार करते हुए सभी मुस्लिमों का निर्विवाद नेता बनेगा।
  • इसे 50% एससी/एसटी/ओबीसी का विश्वास भी हासिल करना चाहिए और उनके प्रतिनिधि के रूप में भी उभरना चाहिए।
  • पीएफआई का कहना है कि अगर वह इस समर्थन को हासिल कर लेती है तो उसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर सत्ता हथियाना काफी आसान होगा।
  • डॉक्युमेंट कहता है, “एक बार सत्ता में आने के बाद कार्यपालिका और न्यायपालिका के साथ-साथ पुलिस और सेना में सभी महत्वपूर्ण पदों को वफादार कार्यकर्ताओं से भरा जाएगा। सेना और पुलिस सहित सभी सरकारी विभागों के दरवाजे वफादार मुस्लिमों और एससी/एसटी/ओबीसी को भरने के लिए खोले जाएँगे, ताकि पिछली भर्ती में उनके साथ हुए अन्याय और असंतुलन को ठीक किया जा सके।”
  • दस्तावेज में आगे कहा गया है, “जिन लोगों को हथियारों का प्रशिक्षण दिया जा रहा था, वे इस बिंदु पर और अधिक ‘खुलकर’ सामने आ जाएँगे और ‘जो उनके (मुस्लिमों के) हितों के विरुद्ध होंगे उन्हें रास्ते से हटा (मार) देंगे’। हमारे PE विभाग की कार्रवाई अधिक स्पष्ट हो जाएगी और इस स्तर पर कैडरों की संख्या में तेजी से वृद्धि होगी। जो हमारे हित के खिलाफ हैं उन्हें खत्म किया जाएगा। ये PE कैडर हमारे विरोधियों द्वारा सुरक्षा बलों पर प्रभाव के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में भी काम करेंगे।”
  • अंतिम चरण में हथियारों के भंडार और सशस्त्र कैडरों को प्रशिक्षित करने के बाद एक इस्लामी संविधान की स्थापना करने और इसके रास्ते में बनने वाले लोगों (खासकर हिंदू) को खत्म करना होगा। डॉक्युमेंट कहता है, “जब हमारे पास पर्याप्त प्रशिक्षित कैडर और हथियारों का भंडार हो जाएगा तो हम इस्लामी सिद्धांतों पर आधारित एक नए संविधान की घोषणा करेंगे। इस समय बाहरी ताकतें भी हमारी मदद के लिए आ जाएँगी। हमारे विरोधियों का व्यवस्थित और व्यापक रूप से सफाया होगा और इस्लामी गौरव की वापसी होगी।”

PFI द्वारा उल्लेखित वर्तमान में कार्रवाई योग्य बिंदु

मुस्लिमों के लिए शिकायत निवारण तंत्र की स्थापना: पीएफआई दस्तावेज़ कहता है कि बढ़ते हिंदुत्व की विचारधारा और आरएसएस समर्थित सरकार ने मुस्लिमों को यह विश्वास दिलाने के लिए पर्याप्त कारण दिए हैं कि यह सरकार इस्लाम के हित के खिलाफ काम कर रही है और सरकार एवं मुस्लिम समुदाय के बीच विश्वास की कमी है। इसके लिए पीएफआई के प्रयास बधाई के पात्र हैं।

दस्तावेज में कहा गया है, “मुस्लिम समुदाय को हमेशा बाबरी मस्जिद के विध्वंस, सांप्रदायिक दंगों और मुस्लिमों की लिंचिंग के दौरान उन पर किए गए अत्याचारों के बारे में याद दिलाया जाना चाहिए। सभी राज्य इकाइयों द्वारा मुस्लिमों को यह विश्वास दिलाने के लिए ठोस प्रयास किए जाने चाहिए कि आरएसएस के नेतृत्व वाली सरकार भारत को हिंदू राष्ट्र घोषित करने और मुस्लिमों को देश से बाहर निकालने की योजना बना रही है।”

सामूहिक लामबंदी: पीएफआई ने ‘इस्लाम की खोई हुई महिमा’ को वापस पाने के लिए सामूहिक लामबंदी को ‘प्राथमिकता वाले क्षेत्र’ के रूप में घोषित किया है। दस्तावेज़ के अनुसार, इसके 3 पहलू हैं – समावेशी, पहुँच और जुड़ाव।

दस्तावेज के अनुसार, “एक समावेशी संगठन होने का मतलब है कि पॉपुलर फ्रंट में उस समुदाय के सभी लोगों के लिए जगह होनी चाहिए, जो हमारे कारण में योगदान देना चाहते हैं। पहुँच का अर्थ है, समुदाय को मुद्दों के बारे में शिक्षित करके और उसकी प्राथमिकताएँ निर्धारित करके समुदाय से संपर्क करना। जुड़ाव का मतलब न केवल हमारी पहुँच को एकतरफा शिक्षा तक सीमित करना है, बल्कि हमारे एजेंडे में भाग लेने के लिए जनता को भी शामिल करना है। लोगों को उनके अधिकारों के लिए आगे लाना सामूहिक लामबंदी का होगा और इसके अपेक्षित परिणाम मिलेंगे। जनता को जोड़ने के लिए संगठन के भीतर के सभी मौजूदा प्लेटफार्मों का उपयोग किया जाना चाहिए और मौजूदा सामुदायिक प्लेटफार्मों को भी प्रभावित किया जाना चाहिए।”

हर घर में PFI: पीएफआई का उद्देश्य हर मुस्लिम घर से हर सदस्य की भर्ती करना है। हालाँकि, यदि यह संभव नहीं है तो 1) प्रत्येक मुस्लिम घर से कम से कम एक सदस्य की भर्ती करें, यदि नहीं, तो 2) एक व्यक्ति को पार्टी में भर्ती करें। यदि नहीं, तो 3) उनमें से किसी को हमारे किसी भी फ्रंटल संगठन में भर्ती करें, यदि नहीं, तो 4) उन्हें हमारी पत्रिकाओं/लेखों का पाठक बनाएँ या कम से कम उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट करें।

मुस्लिमों की भर्ती और उनका प्रशिक्षण: चौंकाने वाली बात यह है कि इस समय PFI हिंदुओं के खिलाफ बेलगाम हिंसा करने की बात करता जा रहा है। वह कहता है कि वास्तव में वह भी नहीं जानता कि लोगों के बीच उसके कितने सशस्त्र जमीनी कैडर हैं और वह यह भी नहीं जानता है कि वे हिंदुओं में कितना भय पैदा करते हैं। इसलिए इसका परीक्षण करने की आवश्यकता है।

पीएफआई के दस्तावेज में कहा गया है कि योग कक्षाओं और ‘स्वस्थ लोग स्वस्थ राष्ट्र’ अभियान की आड़ में उसके PE कैडर को हथियारों की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। दस्तावेज में कहा गया है, “हमारे अच्छी तरह से प्रशिक्षित PE प्रशिक्षकों को कैडरों को हथियारों और विस्फोटकों का प्रशिक्षण देने के लिए राज्य-दर-राज्य भेजा जा रहा है। हमारे पास प्रशिक्षकों की कमी है और संभावित प्रशिक्षुओं की संख्या बहुत बड़ी है। इसके लिए साधन संपन्न उम्मीदवारों की पहचान की जानी चाहिए और उन्हें बेसिक PE कोर्स इंस्ट्रक्टर, सेकेंडरी PE कोर्स इंस्ट्रक्टर और PE मास्टर्स बनने के लिए प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।”

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “हमारे पास एडवांस PE पाठ्यक्रम संचालित करने के लिए अभी तक उचित एवं एकांत प्रशिक्षण केंद्र/स्थान नहीं हैं। चुनौती का सामना करने के लिए राज्य इकाइयों को मुस्लिम बहुल इलाकों या दूरदराज के स्थानों में भूखंडों का अधिग्रहण करना चाहिए, ताकि हथियारों और विस्फोटकों के भंडार के लिए उचित प्रशिक्षण सुविधाएँ और डिपो स्थापित किए जा सकें। इन केंद्रों के बारे में केवल चुनिंदा लोगों को जानकारी होना चाहिए। हमारे पास सभी पीएफआई कैडरों और हमसे सहानुभूति रखने वालों को बुनियादी PE में प्रशिक्षित करने के साथ-साथ प्रशिक्षित PE कैडरों की अपनी समर्पित सेना बनाने के लिए एक लंबा रास्ता तय करना है।”

हिंदुओं और उनके नेताओं के बारे में जानकारी जुटाना तथा विदेशों से मदद माँगना

इस ‘कार्रवाई योग्य बिंदु’ में पीएफआई यह कहता है कि उसे ‘अंतिम शक्ति प्रदर्शन’ से पहले हिंदुओं और हिंदू नेताओं के बारे में विवरण रखना चाहिए। इसका मतलब है कि वह इन हिंदुओं और हिंदू नेताओं की हत्या के लिए जानकारी अपने साथ तैयार रखना चाहता है।

पुलिस द्वारा बरामद PFI के डॉक्यूमेंट में कहा गया है, “अंतिम प्रदर्शन के चरण से पहले हिंदू/आरएसएस नेताओं और उनके कार्यालयों के स्थानों के व्यक्तिगत विवरण के बारे में विस्तृत जानकारी एकत्र करना और तैयार रखना अनिवार्य है। विभिन्न स्तरों पर सूचना विंगों को अपने डेटा-बेस का फॉलोअप और अपडेट करते रहना चाहिए। उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने से हमें उनके खिलाफ कार्रवाई करने में भी मदद मिलेगी। हमारे अंतिम लक्ष्य के रोडमैप में सूचना विंग के महत्व को ध्यान में रखते हुए सभी स्तरों पर विंग के कामकाज को मजबूत और तेज करने की जरूरत है।”

पीएफआई अपने ‘विज़न डॉक्यूमेंट’ को यह कहकर समाप्त करता है कि भारतीय राज्य के साथ पूर्ण रूप से टकराव की स्थिति में उसे तुर्की जैसे ‘दोस्ताना इस्लामी राष्ट्रों’ से मदद की आवश्यकता होगी। PFI कहता है कि उसने तुर्की के साथ घनिष्ठ संबंध विकसित किए हैं, जबकि अन्य इस्लामी राष्ट्रों तक भी पहुँचने की आवश्यकता है।

दस्तावेज में आगे कहा गया है, “सरकार के साथ पूर्ण शक्ति प्रदर्शन की स्थित में अपने प्रशिक्षित PE कैडरों पर भरोसा करने के अलावा हमें मित्र इस्लामिक देशों से मदद की आवश्यकता होगी। पिछले कुछ वर्षों में PFI ने इस्लाम के ध्वजवाहक तुर्की के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध विकसित किए हैं। कुछ अन्य इस्लामी मुल्कों के साथ विश्वसनीय दोस्ती बढ़ाने के प्रयास जारी हैं।”

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Nupur J Sharma
Nupur J Sharma
Editor, OpIndia.com since October 2017

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