Saturday, April 13, 2024
Homeरिपोर्टराष्ट्रीय सुरक्षाजम्मू-कश्मीर में अब पत्थरबाजाें, देशद्रोहियों को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी और पासपोर्ट: सरकार का...

जम्मू-कश्मीर में अब पत्थरबाजाें, देशद्रोहियों को नहीं मिलेगी सरकारी नौकरी और पासपोर्ट: सरकार का आदेश, सर्कुलर जारी

सर्कुलर में कहा गया है कि पासपोर्ट, सरकारी नौकरी या सरकारी योजनाओं से जुड़े मामलों में किसी व्यक्ति की सिक्योरिटी क्लियरेंस की रिपोर्ट तैयार करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाए। जैसे वो व्यक्ति पत्थरबाजी, कानून-व्यवस्था भंग करने या किसी दूसरे अपराध में शामिल न रहा हो।

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने रविवार (1 अगस्त) को देशद्रोहियों और पत्थरबाजों पर नकेल कसने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने आदेश दिया है कि पत्थरबाजों और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल रहने वाले लोगों को ना तो सरकारी नौकरी दी जाएगी और न ही उनके पासपोर्ट का वेरिफिकेशन किया जाएगा। इससे राज्य और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वाले इन लोगों को विदेश जाने का मौका नहीं मिलेगा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीआईडी की स्पेशल ब्रांच कश्मीर के एसएसपी ने अपने अधीनस्थ सभी अधिकारियों और कर्मियों को इस संबंध में सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर में उन्होंने कहा है कि पासपोर्ट, सरकारी नौकरी या सरकारी योजनाओं से जुड़े मामलों में किसी व्यक्ति की सिक्योरिटी क्लियरेंस की रिपोर्ट तैयार करते समय कुछ विशेष बातों का ध्यान रखा जाए। जैसे वो व्यक्ति पत्थरबाजी, कानून-व्यवस्था भंग करने या किसी दूसरे अपराध में शामिल न रहा हो। यदि वह ऐसी गतिविधियों में संलिप्त पाया जाता है, तो उसे सिक्योरिटी क्लियरेंस न दिया जाए।

सीआईडी की स्पेशल ब्रांच ने जारी किया सर्कुलर

इसके साथ ही सर्कुलर में ये भी कहा गया है कि ऐसे व्यक्तियों की पहचान के लिए संबंधित पुलिस स्टेशन से भी रिपोर्ट ली जा सकती है। सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के पास भी ऐसे लोगों की सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरें, वीडियो, ऑडियो और क्वाडकॉप्टर के जरिए ली गईं तस्वीरें रहती हैं, इसलिए उनकी भी मदद ली जाए।

गौरतलब है कि ​साल 2020 में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित समिति ने सीआईडी द्वारा चरित्र और पूर्ववृत्त के उचित सत्यापन की सिफारिश की थी, जिसके बाद जम्मू और कश्मीर सिविल सेवा (चरित्र और पूर्ववृत्त सत्यापन) नियम, 1997 में एक संशोधन किया गया था। इसके तहत सरकारी नौकरी पाने के लिए सीआईडी रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई थी।

रिपोर्ट्स में बताया गया था कि लोगों को यह खुलासा करना अनिवार्य होगा कि उनके परिवार का कोई सदस्य या करीबी किसी राजनीतिक दल या संगठन से जुड़ा है। या फिर वह विदेशी मिशन, संगठन या जमात-ए-इस्लामी जैसे किसी निर्धारित/प्रतिबंधित संगठन के साथ तो नहीं जुड़ा है।

Special coverage by OpIndia on Ram Mandir in Ayodhya

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘राष्ट्रपति आदिवासी हैं, इसलिए राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा में नहीं बुलाया’: लोकसभा चुनाव 2024 में राहुल गाँधी ने फिर किया झूठा दावा

राष्ट्रपति मुर्मू को राम मंदिर ट्रस्ट का प्रतिनिधित्व करने वाले एक प्रतिनिधिमंडल ने अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल होने के लिए औपचारिक रूप से आमंत्रित किया गया था।

‘शबरी के घर आए राम’: दलित महिला ने ‘टीवी के राम’ अरुण गोविल की उतारी आरती, वाल्मीकि बस्ती में मेरठ के BJP प्रत्याशी का...

भाजपा के मेरठ लोकसभा सीट से उम्मीदवार और अभिनेता अरुण गोविल जब शनिवार को एक दलित के घर पहुँचे तो उनकी आरती उतारी गई।

प्रचलित ख़बरें

- विज्ञापन -

हमसे जुड़ें

295,307FansLike
282,677FollowersFollow
417,000SubscribersSubscribe