Monday, March 8, 2021
Home रिपोर्ट आतंकियों से भी ज्यादा लोगों की जान लेते हैं नक्सली, इसलिए अमित शाह ने...

आतंकियों से भी ज्यादा लोगों की जान लेते हैं नक्सली, इसलिए अमित शाह ने लाल आतंक के खिलाफ खोला मोर्चा

आँकड़ों से साफ है कि बीते पॉंच साल में नक्सली हिंसा में कमी आई है और कई ज़िलों को नक्सलियों से मुक्त कराने में सुरक्षा बल कामयाब रहें हैं। लेकिन, एक चिंताजनक पहलू यह है कि इस दौरान कई नए जिलों में नक्सली गतिविधियॉं शुरू हुई हैं।

छत्तीसगढ़ का दंतेवाड़ा। अप्रैल 2010 में यहॉं नक्सली हमले में 76 सीआरपीएफ जवानों की मौत हो गई थी। जून 2019 झारखंड के सरायकेला खरसांवा जिले में नक्सली हमले में पांच पुलिसकर्मियों की मौत हो गई। 9 साल के इस अंतराल में भले ही नक्सलवाद की जड़ें सिकुड़ी हो और उनके हमलों में कमी आई है, फिर भी लाल आतंकवाद आज भी देश के लिए आतंकवाद से ज्यादा बड़ी चुनौती बना हुआ है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आँकड़ों पर ही गौर करे तो पता चलता है कि 2014 से 2018 के बीच जम्मू-कश्मीर में 1,315 लोग आतंकवाद की भेंट चढ़े। इसी दौरान देश के नक्सल प्रभावित इलाक़ों में लाल हिंसा के शिकार लोगों की संख्या 2056 है।

यही कारण है कि नक्सल समस्या को खत्म करना अब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्राथमिकता है। नक्सल प्रभावित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ सोमवार (अगस्त 26, 2019) की बैठक में उन्होंने इस लड़ाई को जीतने के लिए नक्सलियों के अर्थ तंत्र को चोट पहुॅंचाना जरूरी बताया। जम्मू-कश्मीर में आतंकियों और अलगाववादियों पर नकेल कसने में यह फॉर्मूला कारगर भी साबित हुआ है।

आम लोगों से लेकर सुरक्षा बलों के जवानों की जान लेने वाला नक्सलवाद 1967 में पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी नामक गॉंव से शुरू हुआ था। धीरे-धीरे बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, ओडिशा जैसे कई राज्यों में यह फैल गया।

आईआईएससी बेंगलुरु में असिस्टेंट प्रोफेसर अभिषेक बनर्जी ने ऑपइंडिया को बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बता चुके हैं। मनमोहन सिंह की सरकार ने करीब 30 हजार जवानों के साथ इनसे निपटने के लिए ऑपरेशन ग्रीन हंट शुरू भी किया था। उस समय पी चिदंबरम देश के गृह मंत्री हुआ करते थे। इस वामपंथी हिंसा के कारण झारखंड ने कितनी पीड़ा झेली है इस पर बनर्जी एक किताब ‘ऑपरेशन जोहार’ भी लिख चुके हैं।

यह दूसरी बात है कि ऑपरेशन ग्रीन हंट को लेकर कॉन्ग्रेस नीत यूपीए सरकार ने शुरू में जो प्रतिबद्धता दिखाई थी वह धीरे-धीरे अपने ही नेताओं के विरोध के कारण ढीली पड़ गई। केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद इस दिशा में फिर से ठोस प्रयास शुरू हुए हैं। इसका नतीजा भी दिख रहा है।

इसी साल 25 जून को केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया था कि 2009-13 के मुकाबले 2014-18 के बीच नक्सली घटनाओं में 43 फीसदी से ज्यादा और इसके कारण जान गॅंवाने वालों की संख्या में 60 फीसदी से अधिक की कमी आई है। आँकड़े बताते हैं कि 2009-13 के बीच 8,782 नक्सली घटनाएँ हुईं जिनमें 3,336 आम नागिरकों और सुरक्षा बलों के जवानों की मौत हुई थी। 2014-2019 के बीच 4,969 नक्सली हमलों में 1,321 मौतें हुईं। इसी समय अंतराल के बीच नक्सलियों के मारे जाने में करीब 11 फीसदी का इजाफा हुआ। 2009-2013 के बीच 665 नक्सली मारे गए थे जो 2014-2018 के बीच 735 हो गया। 2008 में 223 जिले नक्सल प्रभावित थे जो आज घटकर 90 हो गई है। ये सभी जिले देश के 11 राज्यों में फैले हैं। इनमें छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा और बिहार सबसे ज्यादा प्रभावित माने जाते हैं।

आँकड़ों से साफ है कि बीते पॉंच साल में नक्सली हिंसा में कमी आई है और कई ज़िलों को नक्सलियों से मुक्त कराने में सुरक्षा बल कामयाब रहें हैं। लेकिन, एक चिंताजनक पहलू यह है कि इस दौरान कई नए जिलों में नक्सली गतिविधियॉं शुरू हुई हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के मुताबिक देश के 8 जिलों में पहली बार नक्सल गतिविधियाँ देखी गई हैं। इनमें से 3 जिले केरल, 2 ओडिशा के और छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश तथा आंध्र प्रदेश के एक-एक जिले हैं। इसका एक बड़ा कारण वामपंथियों और उनके शुभचिंतकों का वो गिरोह है जो शहरों में बैठकर अपनी हिंसा को अंजाम देने के नए-नए इलाकों की तलाश में लगे रहते हैं।

यही कारण है कि प्रभावित इलाकों में सख्ती और विकास कार्यों को तेजी देने के साथ-साथ केंद्र सरकार ने अर्बन नक्सलियों पर शिकंजा कसना शुरू किया है। बीते साल ऐसे लोगों पर शिकंजा कसने के लिए कई शहरों में एक साथ छापेमारी भी की गई थी।

दूसरी ओर, इन इलाकों में विकास के कार्यों पर भी केंद्र सरकार विशेष ध्यान दे रही है। उल्लेखनीय है कि नक्सली अपने इलाकों में विकास की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं कर पाते। वे स्कूलों, अस्पतालों, मोबाइल टॉवरों को निशाना बनाते रहते हैं।

पिछले पॉंच सालों में इन इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर, सड़क, सेलफोन कनेक्टिविटी, पुल, स्कूल जैसे विकास कार्यों पर तेजी से काम हो रहा है। सर्वाधिक नक्सल प्रभावित 30 जिलों में नवोदय विद्यालय और केंद्रीय स्कूल चलाए जा रहे हैं। इन इलाकों में युवाओं की आजीविका के लिए ‘रोशनी’ नामक विशेष पहल की गई है। बीते साल केंद्र सरकार ने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए ‘समाधान’ नामक 8 सूत्री पहल की घोषणा की थी। इसके तहत नक्सलियों से लड़ने के लिए रणनीतियों और कार्ययोजनाओं पर जोर दिया गया है। स्पेशल सेंट्रल असिस्टेंस स्कीम के तहत तीन सालों (2017-2020) के लिए तकरीबन 3,000 करोड़ की राशि आवंटित की गई है। इससे लाभान्वित होने वाले राज्यों में बिहार, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और केरल शमिल हैं।

बीते साल पुणे पुलिस ने कुछ अर्बन नक्सलियों के पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन हिज्बुल मुजाहिदीन और कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से संपर्क का खुलासा भी किया था। ऐसे में देश को भीतर से खा रही इस समस्या को पूरी तरह खत्म करना बेहद जरूरी है। जैसा कि बनर्जी कहते हैं, “लोग लंबे अरसे से वाम हिंसा के शिकार हैं। बहुत हुआ। अब वक्त है आर-पार की लड़ाई का।” उम्मीद की जानी चाहिए नक्सली जल्द ही बीते दिनों की बात होंगे।


  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

राजस्थान: FIR दर्ज कराने गई थी महिला, सब-इंस्पेक्टर ने थाना परिसर में ही 3 दिन तक किया रेप

एक महिला खड़ेली थाना में अपने पति के खिलाफ FIR लिखवाने गई थी। वहाँ तैनात सब-इंस्पेक्टर ने थाना परिसर में ही उसके साथ रेप किया।

सबसे आगे उत्तर प्रदेश: 20 लाख कोरोना वैक्सीन की डोज लगाने वाला पहला राज्य बना

उत्तर प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जहाँ 20 लाख लोगों को कोरोना वैक्सीन का लाभ मिला है।

रेल इंजनों पर देश की महिला वीरांगनाओं के नाम: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर भारतीय रेलवे ने दिया सम्मान

झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, इंदौर की रानी अहिल्याबाई और रामगढ़ की रानी अवंतीबाई इनमें प्रमुख हैं। ऐसे ही दक्षिण भारत में कित्तूर की रानी चिन्नम्मा, शिवगंगा की रानी वेलु नचियार को सम्मान दिया गया।

बुर्का बैन करने के लिए स्विट्जरलैंड तैयार, 51% से अधिक वोटरों का समर्थन: एमनेस्टी और इस्लामी संगठनों ने बताया खतरनाक

स्विट्जरलैंड में हुए रेफेरेंडम में 51% वोटरों ने सार्वजनिक जगहों पर बुर्का और हिजाब पहनने पर प्रतिबंध के पक्ष में वोट दिया है।

BJP पैसे दे तो ले लो… वोट TMC के लिए करो: ‘अकेली महिला ममता बहन’ को मिला शरद पवार का साथ

“मैं आमना-सामना करने के लिए तैयार हूँ। अगर वे (भाजपा) वोट खरीदना चाहते हैं तो पैसे ले लो और वोट टीएमसी के लिए करो।”

‘सबसे बड़ा रक्षक’ नक्सल नेता का दोस्त गौरांग क्यों बना मिथुन? 1.2 करोड़ रुपए के लिए क्यों छोड़ा TMC का साथ?

तब मिथुन नक्सली थे। उनके एकलौते भाई की करंट लगने से मौत हो गई थी। फिर परिवार के पास उन्हें वापस लौटना पड़ा था। लेकिन खतरा था...

प्रचलित ख़बरें

मौलाना पर सवाल तो लगाया कुरान के अपमान का आरोप: मॉब लिंचिंग पर उतारू इस्लामी भीड़ का Video

पुलिस देखती रही और 'नारा-ए-तकबीर' और 'अल्लाहु अकबर' के नारे लगा रही भीड़ पीड़ित को बाहर खींच लाई।

14 साल के किशोर से 23 साल की महिला ने किया रेप, अदालत से कहा- मैं उसके बच्ची की माँ बनने वाली हूँ

अमेरिका में 14 साल के किशोर से रेप के आरोप में गिरफ्तार की गई ब्रिटनी ग्रे ने दावा किया है कि वह पीड़ित के बच्चे की माँ बनने वाली है।

आज मनसुख हिरेन, 12 साल पहले भरत बोर्गे: अंबानी के खिलाफ साजिश में संदिग्ध मौतों का ये कैसा संयोग!

मनसुख हिरेन की मौत के पीछे साजिश की आशंका जताई जा रही है। 2009 में ऐसे ही भरत बोर्गे की भी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी।

‘ठकबाजी गीता’: हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने FIR रद्द की, नहीं माना धार्मिक भावनाओं का अपमान

चीफ जस्टिस अकील कुरैशी ने कहा, "धारा 295 ए धर्म और धार्मिक विश्वासों के अपमान या अपमान की कोशिश के किसी और प्रत्येक कृत्य को दंडित नहीं करता है।"

‘मासूमियत और गरिमा के साथ Kiss करो’: महेश भट्ट ने अपनी बेटी को साइड ले जाकर समझाया – ‘इसे वल्गर मत समझो’

संजय दत्त के साथ किसिंग सीन को करने में पूजा भट्ट असहज थीं। तब निर्देशक महेश भट्ट ने अपनी बेटी की सारी शंकाएँ दूर कीं।

‘सबसे बड़ा रक्षक’ नक्सल नेता का दोस्त गौरांग क्यों बना मिथुन? 1.2 करोड़ रुपए के लिए क्यों छोड़ा TMC का साथ?

तब मिथुन नक्सली थे। उनके एकलौते भाई की करंट लगने से मौत हो गई थी। फिर परिवार के पास उन्हें वापस लौटना पड़ा था। लेकिन खतरा था...
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,301FansLike
81,966FollowersFollow
393,000SubscribersSubscribe