Sunday, September 26, 2021
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दलितों और मुस्लिमों में हिंदुत्व-RSS का डर फैलाने के लिए पाकिस्तान ने बनाया था यह प्लान

इस प्लान में भारत के लिए सबसे खतरनाक रणनीति भारत की ‘फॉल्टलाइंस’ पर वार करने की थी। मसलन जाति और रिलिजन के आधार पर भारत में दंगे भड़काना।

पिछले तीन सालों में मोदी सरकार के दौरान अचानक खड़े हुए दलित, मुस्लिम और क्रिश्चियन आंदोलन या फिर उनपर बढ़ते हमलों को लेकर खूब हाय तौबा मचाई गई। एक छोटी सी घटना को भी देश के लिबरल मीडिया ने तुरंत बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत किया। दरसअल मोदी को हराने के लिए पाकिस्तान ने बहुत सोच समझकर एक मास्टरप्लान बनाया था जिसे अक्टूबर 2016 में पाकिस्तान के उच्च सदन सीनेट की हाई पावर कमेटी ने तैयार किया था।

इस पॉलिसी गाइडलाइंस प्लान को तैयार करने में पाकिस्तान के डिफेंस मिनिस्टर ख्वाजा मोहम्मद आसिफ, डिफेंस सेक्रेटरी, पीएम एडवाइज़र सरताज़ अजीज समेत सीनेट के 13 सदस्य शामिल थे। इस प्लान को पाकिस्तान की ‘कमेटी ऑफ़ द होल’ द्वारा 4 अक्टूबर, 2016 को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया गया था।

इस रिपोर्ट की भाषा से ऐसा प्रतीत होता है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर बलोचिस्तान का नाम लेने भर से पाकिस्तान डर गया था। रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि 1971 के बाद पाकिस्तान पर भारत के किसी प्रधानमंत्री द्वारा इतना दबाव नहीं बनाया गया था जितना नरेंद्र मोदी ने बनाया था।

इस प्लान के तहत पाकिस्तान के खिलाफ नरेंद्र मोदी के रवैये को काउंटर करने लिए 22 सूत्रीय योजना बनाई गयी थी जिसमें अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कश्मीर मुद्दे को लेकर भारत के खिलाफ प्रोपगैंडा शुरू करने से लेकर, सार्क देशों समेत तमाम देशों में कश्मीर में ह्यूमन राइट्स का प्रोपगैंडा फैलाने की योजना तैयार की गयी थी।

लेकिन इस प्लान में भारत के लिए सबसे खतरनाक रणनीति भारत की ‘फॉल्टलाइंस’ पर वार करने की थी। मसलन जाति और रिलिजन के आधार पर भारत में दंगे भड़काना। इस प्लान के तहत भारत में दलित, मुस्लिम, सिख, और क्रिश्चियन समुदाय के लोगों को हिंदुत्व-आरएसएस के नाम पर भड़का कर देश को टुकड़ों में बांटने का प्लान बनाया गया था। इस प्रोपगैंडा को फैलाने के लिए पीएम मोदी के खिलाफ लिखने वाले मीडिया, एनजीओ और ह्यूमन राइट्स संगठनों की भी मदद लेने की बात कही गयी थी।

पाकिस्तान को अपने इस प्लान को भारत में लागू करने में आंशिक तौर पर सफलता भी मिली। जिसका नतीजा ये है कि देश में मोदी सरकार के दौरान दलित, मुस्लिम और क्रिश्चियन समुदाय के लोगों पर हमले और फिर उसके नाम पर देश विरोधी फ़र्ज़ी आंदोलन खड़े किये गए। उन्हें हिंदुत्व और आरएसएस के नाम पर जानबूझकर भड़ाकाया गया।

यह आसानी से समझा जा सकता है कि कैसे भारतीय मीडिया और लिबरल लॉबी एक छोटा से केस की बिना जाँच परख किए, मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनाने लगती है।

अपने प्लान को लागू करवाने के लिए पाकिस्तान ने इंटरनेशनल स्तर पर लॉबिंग करवाने के लिए एजेंसियों को भी हायर किया था। यह भी इसका प्लान का हिस्सा था और उस रिपोर्ट में लिखा है जो पाकिस्तान की सीनेट कमेटी ने तैयार किया था। पाकिस्तान की सीनेट कमेटी की रिपोर्ट आज भी वेबसाइट पर उपलब्ध है।

 

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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