Monday, April 19, 2021
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उत्तर भारतीय कर रहे पंचायती राज को कमजोर: दक्षिण से सांसद बने राहुल गाँधी ने फेंका डिवाइड & रूल का पासा

“यदि आप दक्षिणी राज्यों को देखते हैं, तो वे बेहतर काम कर रहे हैं क्योंकि वे वास्तव में अधिक विकेंद्रीकृत हैं। और उत्तरी राज्य सत्ता का केंद्रीकरण कर रहे हैं, जिसके चलते वे पंचायतों और जमीनी संगठनों से सत्ता छीन रहे हैं।”

पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कहा कि उत्तर भारतीय राज्य अपने लोगों को दक्षिण भारतीय राज्यों के मुकाबले ज्यादा सशक्त नहीं कर रहे हैं। उन्होंने इसके पीछे तर्क दिया कि उत्तर भारतीय राज्य सत्ता के केंद्रीकरण में अधिक विश्वास करते हैं, जबकि दक्षिण भारतीय राज्य पंचायती राज जैसे विचारों में विश्वास करते हैं।

राहुल गाँधी ने यह टिप्पणी भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन के साथ बातचीत के दौरान की। यह बातचीत कोरोनावायरस महामारी के चलते विशेषज्ञों के साथ बातचीत की उनकी नई सीरीज के दौरान हुई। इस सीरीज को राहुल गाँधी की कमिंग ऑफ ऐज के रूप में देखा जा रहा है, जिसके बाद वह विश्व स्तर पर भारत का नेतृत्व करने के लिए तैयार होंगे।

“यदि आप दक्षिणी राज्यों को देखते हैं, तो वे बेहतर काम कर रहे हैं क्योंकि वे वास्तव में अधिक विकेंद्रीकृत हैं। जबकि उत्तरी राज्य सत्ता का केंद्रीकरण कर रहे हैं, जिसके चलते वे पंचायतों और जमीनी संगठनों से सत्ता छीन रहे हैं, ”राहुल गांधी ने अपनी बातचीत के दौरान कहा।

यह टिप्पणी तब की गई, जब राहुल गाँधी ने रघुराम राजन से पूछा कि “केंद्रीकरण का संकट” क्या अब वायरस के खिलाफ लड़ाई में बाधा बन रहा है। इस सवाल पर राजन ने विकेंद्रीकरण की आवश्यकता पर अपनी सहमती जताईृ। उन्होंने राहुल के पिता, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी पंचायती राज वापस लाने का श्रेय दिया, जिससे सत्ता को विकेंद्रीकरण में मदद मिली।

पंचायती राज अधिनियम

पंचायती राज अधिनियम को 1992 में 73वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से लागू किया गया था। तब पीवी नरसिम्हा राव प्रधानमंत्री थे। हालाँकि, राजीव गाँधी को इसके लिए व्यापक रूप से श्रेय दिया जाता है, क्योंकि उन्होंने पहले इस तरह के एक अधिनियम को पारित करने की कोशिश की थी, लेकिन उसमें असफल रहे थे।

कॉन्ग्रेस पार्टी पर पहले भी भारत में उत्तर बनाम दक्षिण की बहस को भड़काने का आरोप लगा है। उत्तर भारत की अधिक आबादी और कथित तौर पर टैक्स में कम योगदान को लेकर इसे दक्षिण भारत पर एक तरह का बोझ बताते आई है कॉन्ग्रेस। 2019 में जब नरेंद्र मोदी की सत्ता में वापसी हुई तब तो कॉन्ग्रेस के एक प्रवक्ता ने उत्तर भारतीयों में शिक्षा की कमी को इसके लिए जिम्मेदार भी ठहरा दिया था।

विकेंद्रीकरण के मुद्दे के अलावा राहुल गाँधी और रघुराम राजन ने आधे घंटे की लंबी चर्चा में कई अन्य विषयों पर भी चर्चा की। इसमें गरीबों, सामाजिक सद्भाव, और चायनीज कोरोना वायरस से लड़ने के आसपास अन्य चुनौतियों से राहत प्रदान करना भी शामिल रहा।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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