शाह फ़ैसल सहित 160 J&K नेताओं की सुरक्षा खत्म: 100 गाड़ी, 1000 से ज्यादा सुरक्षाबल पर करोड़ों की बचत

अब सभी 22 अलगाववादियों की सुरक्षा वापस हो गई है। जिन अलगाववादियों की सुरक्षा वापस ली गई है, उनमे से कुछ के नाम एसएएस गिलानी, अगा सैयद मौसवी, मौलवी अब्बास अंसारी, यासीन मलिक और सलीम गिलानी हैं।

सरकार ने बड़ा निर्णय लेते हुए 18 हुर्रियत नेताओं व 160 से भी अधिक अन्य कश्मीरी नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली है। इस से पहले सरकार ने कड़ा क़दम उठाते हुए 4 प्रमुख हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा वापस ले ली थी। पुलवामा हमले के तुरंत बाद यह निर्णय लिया गया था। बुधवार को हुई ताज़ा कार्रवाई के बाद अब सभी 22 अलगाववादियों की सुरक्षा वापस हो गई है। जिन अलगाववादियों की सुरक्षा वापस ली गई है, उनमे से कुछ के नाम एसएएस गिलानी, अगा सैयद मौसवी, मौलवी अब्बास अंसारी, यासीन मलिक और सलीम गिलानी हैं।

इन अलगाववादियों व अन्य कश्मीरी नेताओं की सुरक्षा में 100 से भी अधिक गाड़ियाँ व हज़ार से अधिक सुरक्षाकर्मी लगे थे। हुर्रियत ने सरकार द्वारा सुरक्षा वापस लेने पर टिप्पणी करते हुए कहा कि उसने कभी सुरक्षा की माँग ही नहीं की थी। जम्मू में गृह विभाग की बैठक में लिए गए इस निर्णय के बाद अब इन अलगाववादियों व कश्मीरी नेताओं की सुरक्षा पर ख़र्च होने वाले करोड़ों रुपयों की बचत होगी।

बैठक की अध्यक्षता राज्यपाल के सलाहकार विजय कुमार ने की। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव, जिला प्रशासन और गृह विभाग के कई अधिकारी उपस्थित रहे। हुर्रियत ने कहा है कि सुरक्षा वापस लेने से ज़मीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं आएगा। साथ ही उन्होंने अपने रुख में बदलाव करने से भी साफ़ इनकार कर दिया। हुर्रियत ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने कई बार स्वयं ही सुरक्षा वापस करने की पेशकश की थी। हुर्रियत ने कहा कि सरकार द्वारा सुरक्षा इसीलिए दी गई थी ताकि हुर्रियत नेताओं की गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके।

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राजनीतिक पार्टियों के जिन नेताओं की सुरक्षा वापस ली गई है, उनमे पूर्व IAS शाह फ़ैसल भी शामिल है। सरकार ने यह भी साफ़ कर दिया है कि अब किसी भी अलगाववादी को भविष्य में सुरक्षा प्रदान नहीं की जाएगी। साथ ही, इन्हें मिल रही अन्य सुविधाएँ भी छीन ली जाएँगी। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह पुलवामा हमले के बाद जब कश्मीर दौरे पर गए थे, तभी उन्होंने अलगाववादियों की सुरक्षा हटाने के संकेत दिए थे। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान और आईएसआई के पैसों से पोषित कुछ लोगों की दी गई सुरक्षा छीन ली जाएगी। उन्होंने बिना नाम लिए इन अलगाववादियों के आईएसआईएस व अन्य आतंकी संगठनों से संपर्क होने की बात भी कही थी।

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