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सालार मसूद की दरगाह पर 10 साल में आए चढ़ावे का नहीं मिला हिसाब, ‘घोटाले’ से जुड़ा सपा के पूर्व मंत्री का भी नाम: जानिए कैसे खुला पूरा मामला और कमेटी ने क्या कहा

बहराइच की सालार मसूद दरगाह के 10 साल के चढ़ावे का कोई हिसाब नहीं मिला है। मामले में बीजेपी नेताओं ने करोड़ों रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाया है, जबकि समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री यासर शाह का नाम भी विवाद में सामने आया है।

उत्तर प्रदेश के बहराइच की सालार मसूद दरगाह एक बार फिर विवादों में है। इस बार मामला दरगाह पर आने वाले चढ़ावे और उसके वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़ा है। आरोप है कि दरगाह में पिछले कई वर्षों में आए चढ़ावे और दान का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं है। जिलाधिकारी की ओर से रिकॉर्ड माँगे जाने के बाद भी कई सालों का वित्तीय ब्योरा नहीं मिल पाया।

इसके बाद दरगाह में बड़े वित्तीय घोटाले की आशंका जताई जा रही है। मामले में भाजपा (बीजेपी) नेताओं ने करोड़ों रुपए की हेराफेरी का आरोप लगाया है, जबकि समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री यासर शाह का नाम भी विवाद में सामने आया है। दूसरी तरफ दरगाह इंतजामिया कमेटी सभी आरोपों को बेबुनियाद बता रही है।

दरगाह के चढ़ावे को लेकर बवाल

बहराइच की सालार मसूद दरगाह को देश की प्रसिद्ध दरगाहों में गिना जाता है। यहाँ हर साल लाखों मुस्लिम पहुँचते हैं और नकद दान के अलावा सोना, चाँदी और अन्य कीमती वस्तुएँ चढ़ाते हैं। हाल के दिनों में दरगाह के चढ़ावे और संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे।

विवाद तब और बढ़ गया जब दरगाह से जुड़े कुछ लोगों और भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया कि दरगाह में आने वाले चढ़ावे का सही हिसाब-किताब नहीं रखा गया। आरोप यह भी है कि वर्षों से जमा हुई धनराशि और अन्य संपत्तियों के उपयोग में गंभीर अनियमितताएँ हुई हैं। इसी बीच कुछ पुश्तैनी खादिमों ने दावा किया कि दरगाह में चढ़ाई गई सोने-चाँदी की कीमती ज्वेलरी अब दिखाई नहीं दे रही है। उनका कहना है कि अगर आभूषण सुरक्षित हैं तो उन्हें सार्वजनिक रूप से दिखाया जाना चाहिए।

भाजपा के आरोप

विवाद को लेकर भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुँवर बासिल अली ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और पूरे मामले की SIT से जाँच कराने की माँग की है।कुँवर बासिल अली का आरोप है कि दरगाह वक्फ नंबर-19 की बेशकीमती संपत्तियों और चढ़ावे के प्रबंधन में बड़े स्तर पर अनियमितताएँ हुई हैं।

बासित अली ने माँग की है कि पिछले लगभग 20 वर्षों के वित्तीय लेनदेन की निष्पक्ष जाँच कराई जाए। उनका आरोप है कि दरगाह में आने वाले दान, चढ़ावे और चंदे की रकम में बड़े पैमाने पर हेराफेरी की गई है। उनका कहना है कि मामले की निष्पक्ष जाँच होने पर करोड़ों रुपए के वित्तीय गड़बड़ी का सच सामने आ सकता है।

मामला बढ़ने के बाद प्रदेश सरकार के प्रभारी मंत्री दिनेश प्रताप सिंह ने भी जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी से विस्तृत रिपोर्ट माँगी है। रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर देने को कहा गया है। इससे साफ है कि प्रशासन भी आरोपों को गंभीरता से देख रहा है।

डीएम ने माँगा ब्योरा, लेकिन रिकॉर्ड नहीं मिला

बहराइच के जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने दरगाह के वित्तीय रिकॉर्ड की जानकारी माँगी तो कई सवाल खड़े हुए। जाँच के दौरान यह बात सामने आई कि पिछले 10 वर्षों के चढ़ावे और आय-व्यय से जुड़े कई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, दरगाह प्रबंधन की ओर से पूरा वित्तीय ब्योरा प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

इसी वजह से बड़े वित्तीय गोलमाल या घोटाले की आशंका जताई जा रही है। जिलाधिकारी ने मामले को गंभीर मानते हुए उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड को पत्र भेजकर जाँच की आवश्यकता बताई है। जाँच में एक कर्मचारी की नियुक्ति पर भी सवाल उठे हैं, जबकि वर्तमान समय में 170 कर्मचारियों के काम करने का दावा कमेटी कर रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर दरगाह में हर साल बड़ी मात्रा में चढ़ावा आता रहा है, तो उसका पूरा लेखा-जोखा कहाँ है और रिकॉर्ड उपलब्ध क्यों नहीं है।

सपा के पूर्व मंत्री की मिलीभगत के आरोप

इस पूरे विवाद में समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री यासर शाह का नाम भी सामने आया है। भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि दरगाह की इंतजामिया कमेटी में शामिल कुछ लोगों के साथ मिलकर वित्तीय अनियमितताओं को संरक्षण दिया गया।

कुँवर बासित अली ने मुख्यमंत्री से की गई शिकायत में यासर शाह की भूमिका की भी जाँच कराने की माँग की है। उनका आरोप है कि दरगाह से जुड़े आर्थिक मामलों में पूर्व मंत्री की भी भूमिका रही है और इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

दरगाह कमेटी ने क्या सफाई दी?

वहीं दरगाह इंतजामिया कमेटी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कमेटी के वरिष्ठ सदस्य एडवोकेट दिलशाद अहमद का कहना है कि भ्रष्टाचार और गबन के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।

कमेटी का दावा है कि दरगाह का हर वित्तीय लेनदेन नियमों के अनुसार होता है और सभी प्रक्रियाएँ वक्फ बोर्ड के नियमों के तहत संचालित की जाती हैं। कमेटी के अनुसार, चढ़ावे की गिनती सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में होती है और पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड की जाती है। इसलिए हेराफेरी की संभावना नहीं है। कमेटी ने यह भी कहा है कि कर्मचारियों की नियुक्तियाँ और अन्य प्रशासनिक कार्य भी पूरी पारदर्शिता के साथ किए जाते हैं।

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पूजा राणा
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