Thursday, May 6, 2021
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J&K में नया भूमि कानून लागू होते ही विपक्षी नेताओं ने शुरू किया ‘विलाप’, किसी ने कहा- ‘अस्वीकार्य’ तो कोई ‘हाईवे डाका’

पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी नए भूमि कानून की आलोचन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने आखिरकार जम्मू-कश्मीर को बेचना शुरू कर दिया। उन्होंने नए कानून को केंद्र सरकार का नापाक मंसूबा करार देते हुए कहा कि इसका मकसद जम्मू-कश्मीर के लोगों को अधिकारविहीन करना है।

गृह मंत्रालय ने जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद-बिक्री के संबंध में मंगलवार (अक्टूबर 27, 2020) को महत्वपूर्ण सूचना जारी की। मंत्रालय द्वारा जारी किए गए निर्देश के मुताबिक अब केंद्र शासित प्रदेश में कोई भी व्यक्ति जमीन खरीद सकता है और वहाँ बस सकता है। हालाँकि, अभी खेती की जमीन को लेकर रोक जारी रहेगी।

नए भूमि कानून के पास होने के साथ ही विपक्षी दल और ‘सेकुलर’ नेताओं का मेल्टडाउन शुरू हो गया है। इस पर उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट कर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने लिखा कि जम्मू-कश्मीर में जमीन के मालिकाना हक के कानून में जो बदलाव किए गए हैं, वो अस्वीकार्य हैं। अब तो बिना खेती वाली जमीन के लिए स्थानीयता का सबूत भी नहीं देना है। इसी के साथ कृषि भूमि के ट्रांसफर को और आसान बना दिया गया है। अब जम्मू-कश्मीर बिकने के लिए तैयार है, जो गरीब जमीन का मालिक है अब उसे और मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। 

माकपा के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने नए भूमि कानून को “हाइवे डाका” के रूप में वर्णित किया और घोषित किया, “इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।”

वहीं पूर्व मुख्यमंत्री व पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भी नए भूमि कानून की आलोचन करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने आखिरकार जम्मू-कश्मीर को बेचना शुरू कर दिया। उन्होंने नए कानून को केंद्र सरकार का नापाक मंसूबा करार देते हुए कहा कि इसका मकसद जम्मू-कश्मीर के लोगों को अधिकारविहीन करना है। उन्होंने लिखा कि असंवैधानिक तरीके से अनुच्छेद 370 हटाने से लेकर जम्मू-कश्मीर के प्राकृतिक स्रोतों की लूट और अब जम्मू-कश्मीर की जमीन को बेचना सब केंद्र सरकार की साजिश है।

पाकिस्तानी संसद की कश्मीर कमेटी ने भी अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए इस मेल्टडाउन में हिस्सा लिया। इसने दावा किया कि नया भूमि कानून कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन है।

मेल्टडाउन राजनीतिक स्पेक्ट्रम के उदारवादी गिरोह के कुछ ‘बौद्धिक’ हलकों में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिला। देविका मित्तल, जो दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर होने का दावा करती हैं, ने दावा किया कि नया भूमि कानून ‘फासीवादी शासन द्वारा आक्रमण का कार्य’ है।

यहाँ यह जानना उचित है कि नया भूमि कानून शेष भारत में कानूनों के अनुरूप है। अब तक, जम्मू और कश्मीर के लोग भारत के अन्य क्षेत्रों में भूमि खरीद सकते थे, लेकिन अन्य राज्यों के भारतीयों को जम्मू-कश्मीर में भूमि का अधिकार नहीं था। नया कानून अनुच्छेद 370 के उन्मूलन के उद्देश्य को आगे बढ़ाता है, जो कि भारतीय मुख्यधारा के साथ जम्मू-कश्मीर का एकीकरण है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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