Homeसोशल ट्रेंडNDTV के पत्रकार की डेस्क पर आतंकी ओसामा बिन लादेन? वायरल हो रही तस्वीर

NDTV के पत्रकार की डेस्क पर आतंकी ओसामा बिन लादेन? वायरल हो रही तस्वीर

लोग ये नहीं समझ पा रहे हैं कि अगर ये तस्वीरें सच्ची है तो कोई ओसामा बिन लादेन की मूर्ति या डॉल अपने घर या दफ्तर में रखेगा ही क्यों? वो तो एक आतंकी था, जिसने कई जानें ली और दुनिया भर में कहर मचाया।

ओसामा बिन लादेन दुनिया में अब तक के सबसे खूँखार आतंकियों में से गिना जाता है। वैश्विक आतंकी संगठन अलकायदा के सरगना रहे लादेन ने ही ‘वर्ल्ड ट्रेड सेंटर’ में ऐसी तबाही मचाई थी कि अमेरिका ने कई सालों तक उसकी तलाश की और उसे मार गिराया। क्या आप ऐसा सोच सकते हैं कि इतने दुर्दांत आतंकी की तस्वीर कोई अपने घर में टाँगेगा? अच्छा, क्या आप ये सोच सकते हैं कि उसका गुड्डा या डॉल कोई अपने दफ्तर या घर में रखे? आपने लाफिंग बुद्धा या गणेश जी की छोटी मूर्तियाँ लोगों के डेस्क पर देखी होगी, अब लादेन का डॉल देखिए।

ऐसा हम नहीं कह रहे, सोशल मीडिया में लगातार वायरल हो रही तस्वीरों में ऐसा दावा किया जा रहा है। आप ख़ुद देखें और तय करें। दरअसल, ‘गँजहों की गोष्ठी’ के लेखक साकेत सूर्येश ने ट्विटर पर ये तस्वीर शेयर की। तस्वीर में दिख रहा है कि एनडीटीवी के पत्रकार विष्णु सोम के टेबल पर ऐसा डॉल रखा हुआ है, जिसकी शक्ल आतंकी ओसामा बिन लादेन से मिलती-जुलती है। ओसामा को अमेरिका ने पाकिस्तान में मार गिराया था। अब सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है कि एनडीटीवी पत्रकार के डेस्क पर उसकी मूर्ति रखी हुई है।

ऊपर हमने वो विडियो भी शेयर किया है, जिसमें दिख रहा है कि विष्णु सोम की डेस्क पर ओसामा बिन लादेन का डॉल रखा हुआ है। ऐसा सोशल मीडिया पर शेयर हो रही तस्वीरों और विडियो का दावा है। अभी तक एनडीटीवी या विष्णु सोम ने कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया है। वैसे एनडीटीवी ऐसी कई ख़बरें चलाता रहा है, जिनसे पाकिस्तान को मदद मिलती रही है। ओसामा भी अरसे तक पाकिस्तान में ही छिपा हुआ था। नीचे संलग्न की गई तस्वीर में आप देख सकते हैं कि एनडीटीवी की डेस्क पर क्या रखा हुआ है:

विष्णु सोम की डेस्क पर आतंकी ओसामा की मूर्ति?

हालाँकि, लोग ये नहीं समझ पा रहे हैं कि अगर ये तस्वीरें सच्ची है तो कोई ओसामा बिन लादेन की मूर्ति या डॉल अपने घर या दफ्तर में रखेगा ही क्यों? वो तो एक आतंकी था, जिसने कई जानें ली और दुनिया भर में कहर मचाया। अब देखना पड़ेगा कि कथित फैक्ट-चेक वाले इसका बचाव करने के लिए क्या हथकंडे अपनाते हैं।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

बेचे जाने और लीज पर देने का अंतर भूल बैठे हैं अखिलेश यादव, JPNIC ‘बिक गया’ या सिर्फ लीज पर गया? सपा प्रमुख के...

JPNIC विवाद में अखिलेश यादव के ‘बेचने’ के आरोप की पड़ताल पर जानिए योगी सरकार का लीज मॉडल, CAG की आपत्तियां और 265 करोड़ से 865 करोड़ तक कैसे पहुँचा प्रोजेक्ट।

UP में तेजी से बढ़ रही है ‘गो-इकोनॉमी’, दूध के साथ-साथ गोमूत्र भी बन रहा है रोजगार का साधन: शैम्पू, साबुन और ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर...

सवाल उनसे है जो गाय, गोबर और गौमूत्र का नाम सुनते ही मजाक बनाने लगते हैं- जब यही व्यवस्था किसान का खर्च घटाकर उसकी आय बढ़ा रही है और तो उपहास किस बात का है?
- विज्ञापन -