Homeसोशल ट्रेंडतालिबान एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर से पट्रोलिंग या फाँसी: वायरल वीडियो है लेकिन दिल...

तालिबान एयर फोर्स के हेलीकॉप्टर से पट्रोलिंग या फाँसी: वायरल वीडियो है लेकिन दिल दहलाने वाला

सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो में हेलीकॉप्टर से लटके शख्स को तालिबानियों द्वारा फाँसी की सजा पाया गया बता रहे हैं। जबकि तालिब टाइम्स के अनुसार - "वायु सेना के हेलीकॉप्टर गश्त कर रहे हैं।"

अफगानिस्तान से एक वीडियो वायरल हो रहा है। तालिबानी शासन में उड़ते हेलीकॉप्टर के वीडियो को लेकर तरह-तरह के दावे किए जा रहे हैं। पहले वीडियो देख लेते हैं।

अब बात इस वीडियो के पीछे किए जा रहे दावों की। सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो में हेलीकॉप्टर से लटके शख्स को तालिबानियों द्वारा फाँसी की सजा पाया गया बता रहे हैं।

जो ऐसे दावे कर रहे हैं, देखें उनका क्या कहना है:

इस्लामी अमीरात अफगानिस्तान से ‘आधिकारिक समाचार’ देने (देने का दावा करने वाले) वाले ट्विटर अकाउंट तालिब टाइम्स का हालाँकि कुछ और ही कहना है।

“हमारी वायु सेना! इस्लामी अमीरात के वायु सेना के हेलीकॉप्टर इस समय कंधार शहर के ऊपर से उड़ान भर रहे हैं, शहर में गश्त कर रहे हैं।”

वीडियो को गौर से देखें तो हेलिकॉप्ट UH-60 ब्लैक हॉक प्रतीत होता है। यानी अमेरिकी सैनिक जत्थों का आखिरी विमान जिस दिन अफगानिस्तान छोड़ कर उड़ा, उसी दिन इस्लामी अमीरात अफगानिस्तान ने ‘अपने एयर फोर्स’ को उड़ा कर मंशा जता दी।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

खून वही, बस नैरेटिव बदल गया: प्राचीन बलि से ईसाई संस्कार तक, इतिहास ने ये फर्क कैसे बनाया?

पश्चिम ने पुरानी सभ्यताओं को खून और बलि के नाम पर बर्बर कहा। ईसाई परंपरा को आध्यात्मिक ऊँचाई बताया। लेकिन चर्च के केंद्र में भी रोटी और वाइन के जरिए शरीर और रक्त का अनुष्ठान बैठा है। सभ्यता की कहानी इतनी साफ नहीं।

हमें पितृसत्ता की अधूरी कहानी क्यों सुनाई गई? Patriarchy? Think Again

भारत की शुरुआती वैदिक सभ्यता में महिलाओं का समाज में बहुत सम्मानजनक स्थान था, जहाँ उन्हें शिक्षा और धार्मिक अनुष्ठानों का पूरा अधिकार था। वैदिक साहित्य में गार्गी और मैत्रेयी जैसी महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं, जो दार्शनिक चर्चाओं और बौद्धिक विमर्श में सक्रिय थीं।
- विज्ञापन -