विषय: कुम्भ मेला

कुम्भ

कुम्भ: स्नान करती महिलाओं के फोटो लेने पर हाई कोर्ट सख़्त

प्रशासन 1000 से ज़्यादा सीसीटीवी कैमरों की मदद से पूरे मेला क्षेत्र की निगरानी कर रहा है। पूरे इलाके पर नजर रखने के लिए 40 निगरानी टावर का भी निर्माण किया गया है।
तीर्थ

हिन्दुओं की जिस परिक्रमा को अकबर ने करवा दिया था बंद, योगी सरकार ने करवाई विधिवत शुरुआत

पौराणिक मान्यता के अनुसार प्रयागराज पहुँचकर इन चारों पावन स्थानों के दर्शन मात्र से ही प्रयाग की परिक्रमा पूरी मानी जाती है।
नागा साधु

वैरागी जीवन जीते हुए वीतरागी हो जाना है नागा संन्यासी होना

कई मुस्लिम, ईसाई और बाकी धर्मों के लोग भी स्वीकार किए गए हैं। इनमें वो लोग भी शामिल हैं जो पहले डॉक्टर और इंजीनियर रह चुके हैं।
मौनी अमावस्या

फोटो फ़ीचर: मौनी अमावस्या पर संगम का नज़ारा अद्भुत, अविश्वसनीय, अकल्पनीय

ऐसे नज़ारे इतिहास ने पहले शायद ही कहीं देखा हो। सोशल मीडिया पर आज पूरे दिन इन तस्वीरों ने लोगों को अभिभूत किया।
पौष पूर्णिमा

कल्पवासियों के लिए ही नहीं बल्कि आम साधकों के लिए भी मोक्षदाई है पौष पूर्णिमा

पौष पूर्णिमा के दिन ही शाकंभरी जयंती भी मनाई जाती है। जैन धर्मावलम्बी इसी दिन से पुष्‍याभिषेक यात्रा की शुरुआत करते हैं। छत्तीसगढ़ के आदिवासी इलाकों के लोग इस दिन 'छेरता पर्व' मनाते हैं।
टेंट सिटी

कुम्भ 2019: ख़ास आकर्षण, जो जीवन भर नहीं भूलेंगे आप!

'पेशवाई' प्रवेशाई का देशज़ शब्द है, जिसका अर्थ है शोभायात्रा, जो विश्व भर से आने वाले लोगों का स्वागत कर कुम्भ मेले के आयोजन को विश्व पटल पर सूचित करने के उद्देश्य से निकाली जाती है
अखाड़ा

अखाड़ा: नागा से लेकर अन्य साधु-संतों का सनातन में क्यों है विशेष महत्त्व

जब बात शाही स्नान की हो तो अखाड़े, उनका वैभव, धार्मिक-आध्यात्मिक परम्परा सब एक साथ कुम्भ में उपस्थित और जो अभी तक प्रयागराज नहीं पहुँचे हैं, सभी के मन में कौतूहल पैदा करते हैं। आख़िर क्या है इन अखाड़ों का महत्त्व? क्यों इनमें शामिल होने की इतनी होड़ रहती है? चलिए आप सभी को बताता हूँ, सनातन धर्म की ध्वजा थामे इन अखाड़ों के बारें में। अखाड़ा शब्द को सुनते ही प्रायः जो दृश्य मानस पटल पर उभरता है वह मल्लयुद्ध का। मल्ल्युद्ध अर्थात शारीरिक दमख़म किन्तु यहाँ शारीरिक मल्लयुद्ध से भी बड़ा...
साधु

जानिए कुम्भ को: शंकराचार्य ने संगठित किया, सम्राट हर्षवर्धन ने प्रचारित

कुम्भ मेला का मूल को 8वीं सदी के महान दार्शनिक शंकर से जुड़ती है। जिन्होंने वाद विवाद एवं विवेचना हेतु विद्वान सन्यासीगण की नियमित सभा परम्परा की शुरुआत की थी।
कन्हैया प्रभुनंद गिरी

‘दलित’ महामंडलेश्वर कन्हैया प्रभुनंद गिरि ने धर्मान्तरित दलितों से घर वापसी की अपील की

जूना अखाड़े में बड़ी संख्या में दलित जाति के पुरुष और महिला संत पहले से हैं। इनमें से आठ को महामंडलेश्वर की उपाधि भी दी गई है। जिनमें पाँच पुरुष और तीन महिला महामंडलेश्वर हैं।
जटाओं के साथ साधु

कुम्भ 2019: अखाड़ों की परंपरा और जटाएँ

अखाड़ो की परंपरा अपनी विशिष्टता, भव्यता और रोचकता के कारण हमेशा से जनमानस में कौतूहल, जिज्ञासा का विषय रहे हैं।
राम वन गमन की झाँकी

फ़ोटो फ़ीचर: भारतीय संस्कृति की थाती समेटे ‘संस्कृति ग्राम’ व ‘संस्कृति कुम्भ’ का वर्चुअल टूर

लोक संस्कृति की मनोरम झाँकियाँ देखनी हो, लोकगीतों की ताल पर झूमना हो तो पधारिए 'संस्कृति कुम्भ' जो अपनी पूरी भव्यता के साथ प्राचीन से नवीन भारत की तमाम खूबियों को समेटे आपकी राह देख रहा है।
Narendra Modi

भव्य और सुरक्षित कुम्भ पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सीधी नज़र

1954 में मेले की तैयारियों के लिए एक उच्च स्तरीय कमिटी बनाई गई थी। मेले की हर जानकारी सीधे पुलिस हेडक्वॉर्टर को भेजी जाती थी। इसके बाद वहाँ से ये सारी जानकारी पीएम नेहरू को भेजी जाती थी। फिर भी उस साल के कुम्भ में मची भगदड़ में कई लोग हताहत हुए थे।

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