इसमें कोई दो राय नहीं कि कॉन्ग्रेस का ये फैसला न केवल जम्मू-कश्मीर बल्कि पूरे देश में उस पर भारी पड़ेगा और संकट में पड़े कॉन्ग्रेस के राजनीतिक भविष्य के लिए ये ताबूत में आखिरी कील का काम करेगा।
इसमें कोई चौकाने वाली बात नहीं है कि जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 को समाप्त करने के खिलाफ बेहद मुखर रही कॉन्ग्रेस पार्टी भी इस विवादास्पद गठबंधन में शामिल हो गई है।
ट्विटर को अगले 5 दिनों में समझाने का निर्देश दिया गया है कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता का अपमान करने के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए?
जम्मू कश्मीर की स्थानीय पार्टियों का भारत-विरोधी रुख तो जगजाहिर है, लेकिन अब कॉन्ग्रेस पार्टी भी फ़ारूक़ अब्दुल्लाह और महबूबा मुफ़्ती जैसे नेताओं के सुर में सुर मिला रही है।
41 वर्षीय पूर्व नौकरशाह ने ट्वीट किया, “मैं सभी को सूचित करना चाहूँगा कि मैंने लड़ाई जारी रखने के अपने प्रयास में कॉन्ग्रेस पार्टी में शामिल होने का फैसला किया है।"