फरवरी में यह बात सामने आई थी कि सीमा रिज़वी पर हमले के आरोपों में सफूरा ज़रगर समेत 7 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। रिज़वी ने अपनी शिकायत में कहा था कि जामिया मस्जिद के नजदीक कुछ प्रदर्शनकारियों ने उसे रोक लिया था। आरएसएस का एजेंट बताते हुए हमला किया था।
निजामुद्दीन स्थित तबलीगी जमात के मरकज में हर रोज देश और विदेश से 4 से 5 हजार लोग इकट्ठा होते थे। यहाँ आने वाले लोगों से उनके देश और उनके उद्देश्य के बारे में पूछा जाता था। इसके बाद जो लोग जमात के लिए आते थे उन लोगों को मरकज में रोका जाता था।
मामले की जाँच के लिए पुलिस परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी खंगाल सकती है। इस क्वारंटाइन सेंटर में 200 लोगों को रखा गया है, जो कि दिल्ली मरकज से जुड़े हुए हैं।
कोरोना के मद्देनजर क्वारंटाइन किए गए लोगों के फोन नंबर एसएचओ को मुहैया कराया गया था। जिनका इस्तेमाल क्वारंटाइन किए गए लोगों की मूवमेंट जानने के लिए किया गया।
“जब मेरी पत्नी को प्रसव पीड़ा हुई तो मैंने 108,102,1031 आदि कई हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया। मगर संपर्क नहीं हो सका। इसके बाद मैंने दिल्ली पुलिस को कॉल किया, जो 20 मिनट में हमारे पास पहुँची और हमें अस्पताल ले गई।"
दिल्ली पुलिस यह पता करने में जुटी है कि उन जमातियों ने इमरान से कैसे संपर्क साधा या फिर इमरान उन्हें कैसे जानता था। पुलिस को आशंका है कि इमरान ने पहले भी जमातियों को बॉर्डर पार कराया होगा।
15 दिसंबर को जामिया नगर और न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में हुई हिंसा के मामले में क्राइम ब्रांच ने उसे गिरफ्तार कर कोर्ट के सामने पेश किया। अदालत ने उसे दो दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया।
एक अधिकारी ने कहा है कि दिल्ली की मस्जिदों में अभी और भी विदेशी जमातियों के छिपे होने की आशंका है। वहीं मस्जिदों से निकाले गए 800 से ज्यादा विदेशियों को राजधानी के अलग-अलग अस्पतालों में क्वारंटाइन किया गया है।
मुकदमा दर्ज होने के बाद से मौलाना साद फरार है। ऑडियो मैसेज सामने आने के बाद से उसके भी कोरोना संक्रमित होने की आशंका जताई जा रही है। ऑडियो में उसने कहा था कि डॉक्टर के कहने पर वह घर पर ही क्वारंटाइन है।