AAP के संयोजक मयूर पंघाल (Mayur Panghaal) ने IB अधिकारी को अपमानित करते हुए सोशल मीडिया पर कई अपमानजनक ट्वीट किए। उसने ना सिर्फ मृतक अंकित शर्मा को ठुल्ला कहा, बल्कि यह भी कहा कि मरे हुए ठुल्ले के लिए उसे कोई अफ़सोस नहीं है।
मृत आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की माँ ने रोते हुए बताया कि उनके बेटे को मुस्लिम भीड़ घसीट कर ले गई। स्थानीय लोग कह रहे हैं कि AAP के निगम पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडों ने शर्मा को मार डाला। हुसैन के 5 मंजिला इमारत से लगातार पेट्रोल बम फेंके जा रहे हैं, उनके सैकड़ों लोग जमा हैं।
युवती ने बताया कि यह घटना जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर के पास की ही है। ऑपइंडिया को भेजे हुए संदेश में युवती ने बताया है कि मुस्लिम बस्ती में दिन में ही स्पीकर्स से ऐलान किया गया था कि दिन में बारह बजे के बाद दंगे होंगे।
'आजतक (इंडिया टुडे)' के पत्रकार ग्राउंड रिपोर्टिंग के लिए दिल्ली के एक इलाक़े में गया हुआ था। वहाँ से उसने बताया कि उस क्षेत्र में पुलिस की तैनाती नहीं की गई है। उसने एक तरह से दिल्ली पुलिस को बदनाम करने की कोशिश की। देखिए कैसे एक जिम्मेदार नागरिक ने उसकी पोल खोली।
दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में हुई हिंसा के मामले में 12 से अधिक लोगों की पहचान कर ली है। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुई हिंसा में दो गैंग इरफ़ान छेनू और नासिर गैंग के शामिल होने की बात भी की है।
एनएसए डोभाल ने दिल्ली के कई क्षेत्रों में घूम कर स्थिति का जायजा लिया और अधिकारियों को विभिन्न निर्देश दिए। डोभाल ने जनता को आश्वासन दिया है कि दिल्ली में ज़मीन पर पर्याप्त संख्या में पुलिस बल मौजूद हैं और किसी को भी अब डरने की ज़रूरत नहीं है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि अनुराग ठाकुर, प्रवेश वर्मा और कपिल मिश्रा के विडियो के आधार पर जानबूझ कर एकतरफा हंगामा किया जा रहा। उन्होंने हाईकोर्ट से पुलिस को बदनाम करने की कोशिशों पर लगाम लगाने की अपील की।
उत्तर-पूर्वी इलाकों में जारी हिंसा के बीच NDTV की जर्नलिस्ट निधि राजदान ने ट्वीट शेयर करते हुए लिखा कि उसके कुछ सहकर्मियों को दंगाइयों की एक भीड़ ने बुरी तरह से पीटा और तभी छोड़ा जब उन्होंने अपनी पहचान 'हिन्दू' के रूप में बताई।
एक व्यथित हिन्दू ने कहा- "आप आए हैं। बहुत बड़ी बात है। यहाँ तो अभी तक कोई भी नहीं आया, हमारा आदमी मार दिया गया।" नितिन कहते हैं कि उनके सिर से पिता का साया उठ गया। नितिन ने उस रात कई दरवाजे खटखटाए लेकिन किसी ने भी मदद नहीं की।
इस नैरेटिव से बचिए और पूछिए कि जिसकी गली में हिन्दू की लाश जला कर पहुँचा दी गई, उसने तीन महीने से किसका क्या बिगाड़ा था। 'दंगा साहित्य' के कवियों से पूछिए कि आज जो 'दोनों तरफ के थे', 'इधर के भी, उधर के भी' की ज्ञानवृष्टि हो रही है, वो तीन महीने के 89 दिनों तक कहाँ थी, जो आज 90वें दिन को निकली है?